Nir Kaissar for Bitcoin, Gold or Stocks : अगले 5 साल के लिए निवेश करना हो तो पैसा कहां लगाना चाहिए? सोना, बिटकॉइन, बॉन्ड, रियल एस्टेट या शेयर बाजार? यह ऐसा सवाल है, जिसका जवाब तमाम निवेशक चाहते हैं। वहीं, अलग-अलग एक्सपर्ट इस सवाल का अपने हिसाब से अलग-अलग जवाब देते हैं।
बहरहाल, मार्केट्स कॉलमिस्ट और यूनिसन एडवाइजर्स (Unison Advisors) के संस्थापक नीर कैसर (Nir Kaissar) ने इस सवाल का अपने हिसाब से जवाब दिया है। कैसर ने Bloomberg Opinion के साथ अपनी राय साझा करते हुए कहा, कि उन्होंने अलग-अलग एसेट क्लास का टूर्नामेंट कराया और आखिर में शेयरों को विजेता चुना।
बॉन्ड के मुकाबले सोना, कैश के मुकाबले बिटकॉइन
Kaissar ने शुरुआत Gold और Bonds से की। बॉन्ड को बोरिंग बताते हुए उन्होंने गोल्ड को चुना। इसके बाद कैश (Cash) और बिटकॉइन (Bitcoin) की बारी आई। उन्होंने माना कि यह मुश्किल चुनाव है, लेकिन कैश रखने में उनकी खास दिलचस्पी नहीं है। इसलिए उन्होंने बिटकॉइन को आगे बढ़ाया। हालांकि, उन्होंने बिटकॉइन के लिए कोई रिटर्न लक्ष्य या कीमत का अनुमान नहीं दिया।
AI की ऊर्जा जरूरतों पर तेल को तरजीह
अगला मुकाबला रियल एस्टेट (Real Estate) और तेल (Oil) के बीच हुआ। कैसर ने कहा कि उन्हें रियल एस्टेट पसंद है, लेकिन उन्होंने तेल को चुना। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बहुत ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होगी। उनके मुताबिक, यह जरूरी नहीं कि AI की पूरी ऊर्जा मांग तेल से ही पूरी हो, लेकिन ऊर्जा के उस बड़े बाजार में तेल की भी भूमिका रहेगी। उनका तर्क AI के विस्तार से बढ़ने वाली ऊर्जा मांग पर आधारित है।
प्राइवेट इक्विटी के रिटर्न पर भरोसा नहीं
जब मुकाबला स्टॉक्स (Stocks) और प्राइवेट इक्विटी (Private Equity) के बीच आया, तो कैसर ने शेयरों को चुना। उन्होंने प्राइवेट इक्विटी को अपारदर्शी बताते हुए सवाल उठाया कि उसमें वास्तव में क्या हो रहा है, यह निवेशकों को साफ पता नहीं चलता। उन्होंने प्रकाशित रिटर्न की विश्वसनीयता पर भी संदेह जताया। इसके बाद उन्होंने गोल्ड और बिटकॉइन के मुकाबले में उन्होंने सोने को चुना। उनका तर्क था कि दोनों को वैल्यू स्टोर के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन सोना ऐसी चीज है जिसे हाथ में पकड़ा जा सकता है, जबकि बिटकॉइन अमूर्त है।
फाइनल में कौन बना टॉपर
आखिरी दौर में उन्होंने स्टॉक्स, ऑयल और फिर गोल्ड के बीच मुकाबला कराया। इस मुकाबले में शेयरों को चुनने की वजह बताते हुए कैसर ने कहा कि शेयरों के जरिये निवेशक कई अच्छी कंपनियों में हिस्सेदारी ले सकता है। इसके लिए एक इंडेक्स फंड खरीदना भी पर्याप्त हो सकता है। इसके उलट, सोना एक ही एसेट है। उनके मुताबिक, शेयरों से एक कंपनी या कमोडिटी पर निर्भर हुए बिना कई कारोबारों की ग्रोथ में भागीदारी मिलती है।
क्या निवेशकों को भी यही करना चाहिए?
Kaissar ने किसी खास शेयर, इंडेक्स, पोर्टफोलियो एलोकेशन या संभावित रिटर्न का सुझाव नहीं दिया। यह उनका व्यक्तिगत एसेट-क्लास चुनाव था, हर निवेशक के लिए निवेश सलाह नहीं। शेयर बाजार में 5 साल के दौरान भी उतार-चढ़ाव संभव है। उनका संदेश इतना है कि अगर अगले 5 साल के लिए सिर्फ एक एसेट क्लास चुनना पड़े, तो वह कई कंपनियों में हिस्सेदारी देने वाले शेयरों को प्राथमिकता देंगे।
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