बिजनेस

चेक काटने से पहले हो जाएं सावधान! इस गलती के कारण हो सकती है 2 साल की जेल

Bank Cheque News: अगर आप चेक इश्यू करते हैं तो यह हमेशा सुनिश्चित करें कि आपके बैंक अकाउंट में पर्याप्त पैसा हो। अगर ऐसा नहीं है तो चेक इश्यू करने से बचें। चेक बाउंस होने पर आपको पेनल्टी समेत जेल की सजा हो सकती है।

Image

चेक बाउंटस

Bank Cheque News: हम सभी बैंक चेक का इस्तेमाल बड़े भुगतान या किसी बड़े लेनदेन में करते हैं। कई बार देखने को मिलता है कि बैंक अकाउंट में बैलेंस नहीं होने पर भी लोग चेक काट देते हैं। चेक बाउंस को छोटी-मोटी दिक्कतें मानते हैं, लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। बैंकिंग एक्सपर्ट का कहना है कि चेक बाउंस होना NI एक्ट के सेक्शन 138 के तहत क्रिमिनल केस शुरू करने के लिए काफी है, बशर्ते कानूनी नोटिस दिया गया हो और चेक देने वाला इसे मिलने के 15 दिनों के अंदर पेमेंट न करे। चेक बाउंस मामले में 2 साल तक की जेल, चेक अमाउंट का दोगुना जुर्माना या दोनों वसूल किया जा सकता है। बता दें कि चेक बाउंस होने पर पेनल्टी चार्ज लगने से तुरंत फाइनेंशियल नुकसान होता है। जब कोई चेक बाउंस हो जाता है, तो बैंक हर बार ₹250 से ₹750 तक का डिसऑनर चार्ज लगाता है।

इस मामले में देना होगा ज्यादा पेनल्टी

इसके अलावा, हर ऑटो-डेबिट अलग से गिना जाता है, जो कई बार फेल होने पर भी गिना जाता है। जानकारों का कहना है कि अगर चेक EMI, किराए या क्रेडिट कार्ड पेमेंट के लिए था, तो जिस व्यक्ति या फर्म ने इसे लिया है, वह आपसे एक्स्ट्रा फीस ले सकता है, जैसे बाउंस फीस, लेट पेमेंट फीस और यहां तक कि ब्याज भी। उदाहरण के लिए, अगर किसी के तीन मैंडेट फेल हो गए हैं, तो कोई भी कानूनी कार्रवाई शुरू होने से पहले, बैंक और लेंडर चार्ज के तौर पर तुरंत खर्च ₹2,000-₹3,000 हो सकता है।

क्रेडिट स्कोर भी होता है खराब

बैंकिंग एक्सपर्ट का कहना है कि चेक बाउंस मामले में फाइनेंशियल नुकसान से कहीं ज्यादा क्रेडिट स्कोर का नुकसान बड़ा हाता है। अगर आप अपनी EMI या क्रेडिट कार्ड बिल समय पर या बिल्कुल भी नहीं चुकाते हैं, तो लेंडर कहेगा कि आप डिफॉल्टर हैं या डेज पास्ट ड्यू (DPD) हैं। इससे आपका क्रेडिट स्कोर 50 से 70 पॉइंट तक गिर जाता है। हालांकि CIBIL सीधे सेविंग्स अकाउंट एक्टिविटी को ट्रैक नहीं करता है, लेकिन लेंडर तुरंत लोन और क्रेडिट कार्ड पेमेंट फेलियर की रिपोर्ट करते हैं। एक बार बाउंस होने पर यह मैनेज हो सकता है, लेकिन बार-बार फेल होने से कई फाइनेंशियल पाबंदियां लग सकती हैं।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

और पढ़ें
End of Article