प्राइवेट सेक्टर के प्रमुख एक्सिस बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ अमिताभ चौधरी ने बैंकों को एक बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि बैंकों के पास जमा भारी-भरकम FCNR (B) राशि की वजह से जोखिम भरे या असामान्य तरीके से लोन बांटे जाने का खतरा बढ़ सकता है। वैश्विक फिनटेक सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र के शीर्ष अधिकारियों को इस विदेशी पूंजी का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करने की सलाह दी।
विदेशी मुद्रा जमा और बैंक कर्ज का गणित
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक अमिताभ चौधरी ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की रियायती अदला-बदली योजना के तहत बैंकों ने एनआरआई (प्रवासी भारतीयों) से 127 अरब डॉलर से भी ज्यादा की FCNR (बी) जमा राशि हासिल की है। यह रकम बहुत बड़ी है और बैंकों पर इसका सही इस्तेमाल करने का दबाव है। चौधरी के अनुसार, इस भारी जमा राशि के दबाव में बैंक ऐसे कर्ज दे सकते हैं जो सामान्य से अधिक जोखिम वाले हों। हालांकि, उन्होंने यह उम्मीद जताई कि बैंक जिम्मेदारी से काम लेंगे और ऐसी लापरवाही से बचेंगे। उल्लेखनीय है कि योजना में उम्मीद से ज्यादा पैसा आने के बाद आरबीआई ने इसे तय समय से करीब एक महीने पहले ही बंद कर दिया था।
आगामी वर्षों में कर्ज वृद्धि की रफ्तार
देश में कर्ज (लोन) की मांग और वृद्धि दर पर बात करते हुए एक्सिस बैंक प्रमुख ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में बैंकों की कर्ज वृद्धि दर करीब 15 से 16 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में दिख रही 19 प्रतिशत तक की ऊंची कर्ज वृद्धि दर वास्तव में पिछले वित्त वर्ष के कम आधार (बेस इफेक्ट) की वजह से है। आने वाले समय में यह दर स्वाभाविक और स्थिर स्तर पर लौट आएगी।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना और अमेरिका से अंतर
अमिताभ चौधरी ने देश में ब्याज दरों के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दिए। उनके मुताबिक, आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में दरों में वृद्धि तय मानी जा रही है, जो अक्टूबर या दिसंबर में देखने को मिल सकती है। चौधरी ने एक बड़ी समस्या की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के सरकारी बॉन्ड (प्रतिभूतियों) पर मिलने वाले रिटर्न (प्रतिफल) के बीच का अंतर पिछले कई दशकों में सबसे ज्यादा हो गया है। यह बड़ा अंतर भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक चुनौती बन रहा है।
बैंकिंग क्षेत्र का विलय और फिनटेक से प्रतिस्पर्धा
भविष्य की बैंकिंग व्यवस्था पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अगले कुछ सालों में बैंकों का आपस में विलय और एकीकरण तेजी से बढ़ेगा। बड़े आकार के बैंक भविष्य के वित्तीय संकटों में एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेंगे और एक्सिस बैंक भी ऐसे नए अवसरों पर नजर बनाए रखेगा। वहीं, फिनटेक कंपनियों के बारे में उन्होंने कहा कि वे बैंकों के लिए चुनौती जरूर बनी रहेंगी, लेकिन इससे बैंकों के अस्तित्व को कोई खतरा नहीं है। एक्सिस बैंक फिनटेक कंपनियों को केवल अपने प्रतिस्पर्धी के रूप में नहीं, बल्कि एक बेहतर साझेदार के रूप में भी देखता है।
