रियल एस्टेट में प्रोजेक्ट देरी से पूरा होना आम है। हालांकि, कई मामलों में प्रोजेक्ट सालों से अटके या बंद पड़े हुए हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो आप बिल्डर से ब्याज सहित पैसा पाने का हक रखते हैं। रियल एस्टेट कानून RERA यह अधिकार होम बायर्स को देता है। आइए समझते हैं कि किस हालल में रेरा आपको बिल्डर से पैसे वापस दिला सकता है।
RERA के तहत पैसा पाने का अधिकार क्या?
RERA की धारा 18 के तहत, अगर प्रमोटर तय शर्तों के मुताबिक समय पर घर का कब्जा देने में नाकाम रहता है, तो कुछ परिस्थितियों में खरीदार प्रोजेक्ट से बाहर निकलकर अपने द्वारा जमा की गई रकम की वापसी मांग सकता है। इसके साथ लागू नियमों के अनुसार ब्याज और कुछ मामलों में मुआवजे का दावा भी किया जा सकता है।
कब मिल सकता है RERA के तहत रिफंड?
सिर्फ प्रोजेक्ट में देरी होने से हर मामले में तुरंत रिफंड मिलना तय नहीं है। रेरा आम तौर पर कई बातों को देखती है। इनमें बिक्री समझौते में दी गई कब्जे की तारीख, देरी कितनी हुई है, देरी की वजह क्या है और प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति क्या है, जैसी बातें शामिल हैं।
अगर प्रोजेक्ट का निर्माण लंबे समय से बंद है, जरूरी मंजूरियां नहीं मिली हैं, प्रमोटर ने प्रोजेक्ट को लगभग छोड़ दिया है या उसे पूरा करने की कोई ठोस योजना नजर नहीं आती, तो खरीदार के रिफंड के दावे कर सकता है। इसके अलावा प्रोजेक्ट का RERA रजिस्ट्रेशन, उसकी मौजूदा रेगुलेटरी स्थिति और प्रमोटर के खिलाफ पहले से हुई शिकायतों या आदेशों को भी देखा जाता है।
तेलंगाना के मामला बना नजीर
हाल ही में तेलंगाना RERA के एक मामले ने इस अधिकार को समझने का एक उदाहरण दिया। मामले में एक घर खरीदार ने 3BHK फ्लैट बुक किया था, जिसकी कुल कीमत करीब 56.7 लाख रुपये थी। खरीदार ने करीब 14.17 लाख रुपये का भुगतान किया था। बिल्डर-बायर एग्रीमेंट के मुताबिक जरूरी बिल्डिंग परमिशन मिलने के बाद तय समय के भीतर फ्लैट का कब्जा दिया जाना था। लेकिन प्रोजेक्ट में जरूरी मंजूरियां नहीं ली गईं और निर्माण कार्य भी आगे नहीं बढ़ा। खरीदार को डेवलपर की तरफ से संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि दूसरे खरीदार पहले ही प्रमोटर के खिलाफ शिकायत कर चुके थे। अथॉरिटी ने पाया कि प्रोजेक्ट को पूरा करने की कोई ठोस योजना नहीं थी और प्रोजेक्ट व्यावहारिक तौर पर रुका हुआ था। ऐसे हालात को देखते हुए रेरा ने होम बायर्स को अनिश्चित समय तक कब्जे का इंतजार करने के बजाय भुगतान की गई रकम वापस करने का निर्देश दिया। इसके साथ लागू नियमों के अनुसार ब्याज देने का भी आदेश दिया गया।
ब्याज कैसे मिलेगा?
RERA के तहत रिफंड के साथ मिलने वाले ब्याज की दर संबंधित राज्य के नियमों के आधार पर तय होती है। इसलिए हर राज्य में ब्याज की गणना का तरीका एक जैसा होना जरूरी नहीं है।
तेलंगाना के मामले में ब्याज की दर राज्य RERA नियमों के तहत SBI की MCLR से जुड़ी थी, जिसमें अतिरिक्त ब्याज जोड़ा जाता है। भुगतान की गई रकम और लागू अवधि के आधार पर ब्याज की गणना की जाती है।
अपना पैसा पाने के लिए क्या करें?
अगर बिल्डर प्रोजेक्ट का काम पूरा नहीं कर रहा है और जवाब नहीं दे रहा है, तो सबसे पहले फ्लैट बुकिंग से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें। इनमें बिल्डर-बायर एग्रीमेंट, अलॉटमेंट लेटर, पेमेंट रसीदें, बैंक स्टेटमेंट, होम लोन से जुड़े रिकॉर्ड और कब्जे की वादा की गई तारीख के दस्तावेज शामिल हैं। इसके अलावा बिल्डर के साथ ईमेल, WhatsApp या अन्य माध्यमों से हुई बातचीत का रिकॉर्ड भी रखें। प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति की तस्वीरें और वीडियो भी उपयोगी सबूत हो सकते हैं।
होम बायर्स को संबंधित राज्य के RERA पोर्टल पर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन, मंजूरी, समय-सीमा और प्रमोटर के खिलाफ दर्ज शिकायतों की जानकारी भी जांचनी चाहिए। अगर बिल्डर अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करता है, तो खरीदार RERA की धारा 31 के तहत शिकायत कर सकता है। मामले में दस्तावेजी सबूत बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
आदेश के बाद भी पैसा न मिले तो क्या करें?
RERA से रिफंड का आदेश मिल जाने के बाद भी अगर बिल्डर भुगतान नहीं करता है, तो खरीदार को आदेश लागू कराने की प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है। RERA की धारा 40 के तहत आदेश के अनुसार देय रकम की वसूली की व्यवस्था है।
इसका मतलब यह है कि खरीदार के लिए सिर्फ शिकायत करना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरत पड़ने पर रिफंड आदेश को लागू कराने और बकाया रकम की वसूली के लिए भी कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है।
