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पाकिस्तान में भैंस पालना भी हुआ मुश्किल, अब देना होगा 'गोबर टैक्स'!

पाकिस्तान की गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अब सरकार ने अजीबोगरीब रास्ता अपनाया है। पंजाब प्रांत में भैंस पालकों पर 'गोबर टैक्स' लगाने की तैयारी है, जिसके तहत हर भैंस के गोबर पर रोजाना 30 रुपये शुल्क लिया जाएगा। महंगाई और बिजली संकट से जूझ रहे किसानों के लिए यह 'कंगाली टैक्स' मुसीबत बन गया है।

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Buffalo Tax Pakistan

पाकिस्तान की आर्थिक हालत इन दिनों जिस कदर दबाव में है, उसका अंदाज़ा सरकार द्वारा लिए जा रहे अजीबोगरीब फैसलों से लगाया जा सकता है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि सरकार अब राजस्व जुटाने के लिए उन चीजों में भी 'कमाई' का जरिया ढूंढ रही है, जिन्हें कभी बेकार या अपशिष्ट समझा जाता था। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मरियम नवाज की सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। 'सुथरा पंजाब' नामक एक नए अभियान के तहत अब भैंस के गोबर पर टैक्स लगाने की योजना बनाई गई है। यह खबर सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक में चर्चा का विषय बन गई है और लोग इसे पाकिस्तान की कंगाली का चरम बता रहे हैं।

यही नहीं ईरान वॉर के बीच दुनियाभर में तेल की कीमतें आसमान छु रही हैं तो पाकिस्तान ने भी अपने देश में पेट्रोल डीजल के रेट्स बढ़ा दिए हैं. हालिया बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें 137.24 रुपये बढ़कर 458.40 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमतें 184.49 रुपये बढ़कर 520.35 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने इन नई दरों का ऐलान किया है।

क्या है 'गोबर टैक्स'?

पंजाब सरकार के नए आदेश के मुताबिक, प्रांत की लगभग 168 मान्यता प्राप्त पशु कॉलोनियों में पाली जा रही हर भैंस पर रोजाना 30 रुपये का शुल्क (फीस) लिया जाएगा। प्रशासन ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है और लाहौर जैसी बड़ी मंडियों में इसे सख्ती से लागू करने का खाका तैयार है। सरकार का तर्क है कि शहरों की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और कचरा प्रबंधन के लिए इस धन की आवश्यकता है। सरकार इस कदम को एक 'ग्रीन पहल' के रूप में पेश कर रही है। उनका दावा है कि इस गोबर को इकट्ठा कर बायोगैस बनाई जाएगी, जिससे ऊर्जा उत्पादन होगा और पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा। हालांकि, जनता के बीच इस तर्क को 'जबरन वसूली' के रूप में देखा जा रहा है।

पशुपालकों और किसानों में भारी नाराजगी

इस फैसले ने पाकिस्तान के उन किसानों और डेयरी मालिकों की कमर तोड़ दी है जो पहले से ही चारे की बढ़ती कीमतों और बिजली की किल्लत से जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में पशु पालना पहले ही घाटे का सौदा साबित हो रहा था, और अब 'गोबर टैक्स' ने उनकी परेशानियों को दोगुना कर दिया है। कई किसान इसे तंज कसते हुए 'कंगाली टैक्स' या 'खून चूसने वाला टैक्स' कह रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को अपनी अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए खर्चों में कटौती करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय उन लोगों पर बोझ डाला जा रहा है जो बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

राजनीतिक रंग और जनता का विरोध

इस मुद्दे ने अब पाकिस्तान में राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। विपक्ष का कहना है कि मरियम नवाज सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए आम जनता की जेब पर डाका डाल रही है। आलोचकों का तर्क है कि जो गोबर कभी खाद के रूप में किसानों के काम आता था, अब उस पर टैक्स देना अव्यवहारिक है। छोटे किसान, जो दो-चार पशुओं के सहारे अपना घर चलाते हैं, उनके लिए रोजाना का यह खर्च महीने के बजट को बिगाड़ देगा। सोशल मीडिया पर लोग पाकिस्तान की इस आर्थिक तंगी का मजाक उड़ा रहे हैं, वहीं जमीन पर किसानों का गुस्सा सड़कों पर उतरने को तैयार है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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