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US Inflation: ईरान से लड़ाई के बीच अमेरिका में फटा 'महंगाई बम', क्या इसी वजह से बैकफुट पर ट्रंप?

Iran के साथ जंग में टिके रहने के लिए US हर दिन अरबों डॉलर खर्च कर रहा है। वहीं, होर्मुज बंद होने का असर US में भी ऊर्जा कीमतों पर पड़ा है, जिससे मार्च में महंगाई 0.9 फीसदी बढ़ी है।

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2 साल के शीर्ष पर महंगाई

US Inflation Spike: ईरान से टकराव के बीच अमेरिका में महंगाई ने अचानक जोरदार उछाल लिया है। मार्च में यह 3.3% पर पहुंच गई, जो करीब दो साल का उच्च स्तर है। तेल कीमतों में तेज उछाल ने अर्थव्यवस्था और राजनीति दोनों को झकझोर दिया है, जिससे ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है। क्योंकि अमेरिका में मध्यावधि चुनाव भी आ रहे हैं।

तेल झटके से ‘महंगाई बम’ फूटा

ईरान के साथ तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधा के चलते तेल कीमतों में जबरदस्त उछाल आया। इसका सीधा असर अमेरिकी महंगाई पर पड़ा, जो मार्च में 3.3% तक पहुंच गई। फरवरी के मुकाबले यह तेज बढ़त बाजार के अनुमान के अनुरूप जरूर थी, लेकिन झटका बड़ा रहा।

US inflation

अमेरिका में महंगाई बढ़ी

पेट्रोल कीमतों ने बिगाड़ा खेल

महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह गैसोलीन कीमतों में 21% से ज्यादा उछाल रहा। फ्यूल कॉस्ट में इस तेजी ने ट्रांसपोर्ट से लेकर एविएशन तक हर सेक्टर की लागत बढ़ा दी। कुल महंगाई वृद्धि में करीब 75% योगदान सिर्फ ईंधन का रहा, जिससे यह स्पष्ट है कि संकट कितना गहरा है।

फेड की राह हुई मुश्किल

महंगाई में इस उछाल ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दर कटौती की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है। पहले जहां बाजार को राहत की उम्मीद थी, अब फेड को ज्यादा सतर्क रुख अपनाना पड़ सकता है। कोर महंगाई का 2.6% तक पहुंचना इस चिंता को और बढ़ाता है।

ट्रंप क्यों आए बैकफुट पर?

ऊर्जा कीमतों में उछाल और महंगाई का दबाव सीधे राजनीतिक असर भी दिखा रहा है। ट्रंप प्रशासन पहले से ही टैरिफ और जियोपॉलिटिकल फैसलों को लेकर आलोचना झेल रहा था। अब महंगाई बढ़ने से आम जनता की नाराजगी का जोखिम बढ़ गया है, जिससे नीति स्तर पर आक्रामक रुख नरम पड़ता दिख सकता है।

आम जनता पर बढ़ा दबाव

पेट्रोल की कीमतों में तेज उछाल से अमेरिकी उपभोक्ताओं का बजट बिगड़ गया है। कई राज्यों में ईंधन कीमतें ऐतिहासिक स्तर के करीब पहुंच गई हैं, जिससे रोजमर्रा का खर्च बढ़ा है। आने वाले समय में इसका असर खाद्य कीमतों और सर्विस सेक्टर पर भी दिख सकता है।

क्या आगे और बढ़ेगी मुश्किल?

हालांकि तेल कीमतें कुछ नरम हुई हैं, लेकिन अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। सप्लाई सामान्य होने में समय लग सकता है, जिससे महंगाई का दबाव बना रह सकता है। यही वजह है कि बाजार और नीति-निर्माता दोनों फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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