Akshaya Tritiya 2026 : अक्षय तृतीया का त्योहार नजदीक आते ही भारतीय बाजार में सोने और चांदी को लेकर हलचल बढ़ गई है। इस साल निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि बढ़ती कीमतों के बीच किसमें निवेश किया जाए। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल 15 अप्रैल को सोने की कीमत (gold prices) करीब 95,500 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो अब बढ़कर करीब 1,55,570 रुपये प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) हो गई है। यानी एक साल में करीब 63 प्रतिशत की बड़ी बढ़त देखने को मिली है। चांदी की कीमतों में भी तेजी बनी हुई है।
कीमत बढ़ने की वजहें
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने-चांदी की कीमतों में यह तेजी कई कारणों से आई है। दुनियाभर के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिससे इसकी मांग बढ़ी है। इसके अलावा गोल्ड ETF में निवेश भी बढ़ा है और खुदरा निवेशक भी इस समय खरीदारी कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव, खासकर ईरान युद्ध जैसी स्थितियों ने भी सोने को सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के रूप में मजबूत बनाया है। डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का भी असर सोने-चांदी पर पड़ रहा है।
हाल के बाजार का हाल
पिछले हफ्ते सोने की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि चांदी करीब 4 प्रतिशत चढ़ी। इस दौरान डॉलर थोड़ा कमजोर हुआ और कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। हालांकि, बाजार अभी भी अनिश्चितता से भरा हुआ है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।
अक्षय तृतीया पर मांग बनी मजबूत
कीमतें बढ़ने के बावजूद अक्षय तृतीया पर सोने-चांदी की मांग कम नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह त्योहार भारतीय परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए लोग खरीदारी जरूर करते हैं। हालांकि, अब लोग इसे केवल परंपरा के रूप में नहीं बल्कि लंबी अवधि के निवेश और संपत्ति बचाने के नजरिए से भी देख रहे हैं।
खरीदारी के तरीके में बदलाव
इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां लोग भारी ज्वेलरी खरीदते थे, वहीं अब हल्के गहनों की मांग बढ़ रही है। साथ ही 24 कैरेट शुद्ध सोना और 999.9 शुद्धता वाली चांदी के सिक्के और बार ज्यादा खरीदे जा रहे हैं। लोग कम खर्च में निवेश करना चाहते हैं, इसलिए छोटे-छोटे निवेश की ओर झुकाव बढ़ा है।
ETF और डिजिटल गोल्ड की बढ़ती लोकप्रियता
आज के समय में निवेशक फिजिकल गोल्ड के बजाय गोल्ड ETF और सिल्वर ETF जैसे विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हैं जैसे कि ज्वेलरी पर लगने वाले मेकिंग चार्ज से बचना, सुरक्षित स्टोरेज की चिंता न होना और आसानी से खरीद-बिक्री करना। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में जनवरी 2026 में गोल्ड ETF में 24,040 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो पिछले साल की तुलना में 106 प्रतिशत ज्यादा है।
वैश्विक और भारतीय निवेशकों का अलग नजरिया
एक दिलचस्प बात यह है कि जहां पश्चिमी देशों के निवेशक सोने को अल्पकालिक निवेश के रूप में देख रहे हैं, वहीं भारत और चीन जैसे एशियाई देशों में इसे लंबी अवधि के सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जा रहा है। यही वजह है कि यहां ETF में निवेश लगातार बढ़ रहा है।
आगे का अनुमान
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें और बढ़ सकती हैं। कुछ अनुमान के अनुसार, अगले अक्षय तृतीया तक सोने का भाव 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे सोच-समझकर निवेश करें और अपने पोर्टफोलियो में सोने-चांदी को संतुलित रूप से शामिल करें।
इस अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी महंगा जरूर है, लेकिन निवेशकों का भरोसा अब भी कायम है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब लोग पारंपरिक खरीदारी के बजाय समझदारी और प्लानिंग के साथ निवेश कर रहे हैं। चाहे फिजिकल गोल्ड हो या ETF, दोनों ही विकल्प आज के समय में निवेश के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
