परमाणु ऊर्जा में उतरा अडानी समूह, Adani Atomic Energy नाम से बनाई नई कंपनी, एक्सचेंज फाइलिंग में दी जानकारी
- Authored by: यतींद्र लवानिया
- Updated Feb 12, 2026, 12:00 PM IST
आडानी समूह ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कदम रख दिया है। गुरुवार को अडानी पावर से एक्सचेंज फाइलिंग में इसकी जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में कदम रख रही है। इसके लिए अडानी पावर के अधीन एक सहायक कंपनी अडानी एटोमिक एनर्जी बनाई गई है।
परमाणु ऊर्जा में अडानी समूह की बड़ी बाजी
अडानी समूह की कंपनी अडानी पावर लिमिटेड ने न्यूक्लियर यानी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कदम रखते हुए नई सब्सिडियरी कंपनी अडानी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड (AAEL) का गठन किया है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि यह यूनिट बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए परमाणु ऊर्जा पर काम करेगी। यह पूरी तरह अडानी पावर की होल्डिंग वाली कंपनी होगी, जिसमें 100 फीसदी हिस्सेदारी मूल कंपनी की ही रहेगी। नई कंपनी को 11 फरवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर रजिस्टर किया गया और इसे न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया है।

Adani Power Nuclear Energy
SHANTI कानून से खुला रास्ता
अडानी समूह का यह कदम ऐसे समय आया है जब संसद ने दिसंबर 2025 में SHANTI कानून पास किया था, जिसका उद्देश्य भारत के सिविल न्यूक्लियर सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोलना है। सरकार का लक्ष्य 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावॉट तक पहुंचाना है। ऐसे में बड़े कॉरपोरेट समूह अब इस सेक्टर में दीर्घकालिक निवेश अवसर देख रहे हैं।
बड़ा रणनीतिक कदम
नई सब्सिडियरी की अधिकृत पूंजी फिलहाल 5 लाख रुपये रखी गई है, जिसे 10 रुपये फेस वैल्यू के 50 हजार इक्विटी शेयरों में विभाजित किया गया है। शुरुआती पूंजी भले सीमित हो, लेकिन इसे रणनीतिक एंट्री के तौर पर देखा जा रहा है, जहां आगे बड़े निवेश और प्रोजेक्ट्स की संभावना बन सकती है।
शेयर पर नतीजों का दबाव
इसी बीच अडानी पावर के शेयर में कमजोरी देखने को मिली। 12 फरवरी की सुबह के कारोबार में शेयर करीब 0.73 फीसदी गिरकर 149.75 रुपये पर ट्रेड करता दिखा। बाजार की नजर फिलहाल कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों और मार्जिन ट्रेंड पर बनी हुई है।
तीसरी तिमाही में मुनाफा और राजस्व दोनों घटे
दिसंबर 2025 तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट घटकर 2,488 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले करीब 15 फीसदी कम है। ऑपरेशंस से आय भी लगभग 9 फीसदी गिरकर 12,451 करोड़ रुपये पर आ गई। हालांकि EBITDA मार्जिन 36.5 फीसदी पर पहुंचा, जो सालाना आधार पर सुधरा है।
खर्च में कमी, लेकिन आय पर दबाव कायम
ईंधन लागत और फाइनेंस कॉस्ट में गिरावट से कंपनी को कुछ राहत मिली, मगर कुल आय में गिरावट के कारण मुनाफे पर दबाव बना रहा। कुल खर्च घटकर 10,050 करोड़ रुपये पर आ गया, फिर भी प्रॉफिट बिफोर टैक्स में सालाना आधार पर करीब 27 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।
लंबी अवधि के निवेश का संकेत
विश्लेषकों के मुताबिक, न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में कदम रखना अडानी पावर की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि निकट अवधि में कंपनी के शेयर की दिशा उसके ऑपरेटिंग प्रदर्शन और बाजार भावनाओं पर निर्भर रहेगी।
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