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बुखार से लेकर एलर्जी और डाइबिटीज तक, 1 अप्रैल से महंगी होंगी 767 जरूरी दवाएं

देश में 1 अप्रैल से आम लोगों पर महंगाई का एक और झटका मिला है। सरकार ने 767 जरूरी दवाओं की कीमत बढ़ाने की अनुमति दे दी है। यह फैसला राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने लिया है।

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Medicine Expensive

आम आदमी की रसोई के बजट के साथ-साथ अब उसकी मेडिकल किट पर भी महंगाई की मामूली दस्तक होने वाली है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने देश की 767 आवश्यक दवाओं (Essential Medicines) की अधिकतम कीमतों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। नए नियमों के मुताबिक, 1 अप्रैल 2026 से इन दवाओं की कीमतों में 0.64956% की बढ़ोतरी की जाएगी। हालांकि सरकार का दावा है कि यह बढ़ोतरी बहुत ही सीमित है, लेकिन इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ेगा जो लंबे समय से गंभीर बीमारियों की दवाएं ले रहे हैं। यह फैसला वार्षिक थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार पर लिया गया है, जो हर साल दवाओं की लागत और बाजार की स्थिति को देखते हुए तय किया जाता है।

किन दवाओं पर बढ़ेंगे दाम?

इस सूची में वे सभी दवाएं शामिल हैं जो हमारे रोजमर्रा के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण 'एंटीबायोटिक' दवाएं जैसे एमोक्सिसिलिन, एजिथ्रोमाइसिन और सेफिक्सिम शामिल हैं। इसके अलावा, बुखार और दर्द के लिए इस्तेमाल होने वाली पैरासिटामोल और एस्पिरिन की श्रेणियों में भी बदलाव दिखेगा। दिल की बीमारियों (Heart Diseases) के लिए जरूरी दवाएं जैसे एटोरवास्टेटिन और एम्लोडिपिन, और मधुमेह (Diabetes) व सांस संबंधी बीमारियों की दवाओं के दाम भी 1 अप्रैल से बदल जाएंगे। एलर्जी के लिए सेटिरिजिन और संक्रमण के इलाज में काम आने वाली एल्बेंडाजोल जैसी दवाएं भी अब नए रेट पर मिलेंगी। राहत की बात यह है कि यह बढ़ोतरी 1 प्रतिशत से भी कम है, जिससे सामान्य स्ट्रिप की कीमत में केवल कुछ ही पैसों का अंतर आएगा।

  • दर्द व बुखार: एस्पिरिन, पैरासिटामोल श्रेणी
  • दिल की दवाएं: एटोरवास्टेटिन, एम्लोडिपिन, क्लोपिडोग्रेल
  • एलर्जी: सेटिरिजिन
  • संक्रमण: एल्बेंडाजोल, एंटी-रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन, एंटी-टेटनस
  • सांस संबंधी दवाएं: बुडेसोनाइड, फॉर्मोटेरोल
  • विटामिन: विटामिन C, कोलेकैल्सीफेरॉल
  • इसके अलावा मधुमेह, हार्मोन और अन्य जरूरी संयोजन दवाएं भी सूची में शामिल हैं।

आम जनता के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

NPPA द्वारा सीलिंग प्राइस (अधिकतम कीमत) तय करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि कोई भी दवा कंपनी या रिटेलर मनमानी कीमत नहीं वसूल सकता। नई कीमतें बिना जीएसटी (GST) के तय की गई हैं, जिसका मतलब है कि टैक्स लगाने के बाद भी दवा की कुल कीमत सरकार द्वारा तय लिमिट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यह नियम सरकारी और निजी दोनों बाजारों पर लागू होता है। यदि कोई दुकानदार या कंपनी तय कीमतों से अधिक पैसे मांगती है, तो यह कानूनी रूप से दंडनीय अपराध माना जाएगा। इससे बाजार में पारदर्शिता बनी रहती है और गरीब मरीजों को भारी-भरकम बिलों से सुरक्षा मिलती है।

सरकार का मानना है कि दवाओं के निर्माण की लागत और कच्चे माल (API) की कीमतों में वैश्विक स्तर पर होने वाले बदलावों को देखते हुए यह मामूली बढ़ोतरी जरूरी थी। 0.64% की यह वृद्धि इतनी कम है कि इससे मरीजों के मासिक मेडिकल खर्च पर कोई बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा। NPPA का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के हर नागरिक को किफायती दामों पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध हों। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी अनिवार्य है कि दवा निर्माता कंपनियां घाटे में न जाएं, ताकि बाजार में दवाओं की किल्लत पैदा न हो।

bhawana gupta
भावना किशोरauthor

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यूज़ नेशन, इंडिया न्यूज़, टीवी 9 भारतवर्ष और ज़ी न्यूज़, न्यूज 18 में काम करने का अनुभव. अभी Times Now में Special correspondent हैं.दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य ,रेल, कल्चरल, शिक्षा मंत्रालयों के साथ दिल्ली क्राइम ,पॉलिटिक्स और राजधानी की हर छोटी बड़ी खबरों पर खास तौर से नजर रखती हैं. लोगों से जुड़ी खबरों पर काम करने और लोगों तक सही और सटीक खबरें पहुंचाने को अपना मकसद मानती हैं।

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