बिजनेस

66 किलो सोना, 335 किलो चांदी और ₹703 करोड़ का बीमा! जानें कहां विराजे हैं सबसे अमीर बप्पा?

GSB गणपति पंडाल में हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार भक्तों की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए करीब 100 CCTV कैमरे और हाईटेक कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई है।

Image

GSB गणपति

आज गणेश चतुर्थी है और इसी के साथ मुंबई समेत पूरे देश में 11 दिन के गणेश उत्सव की शुरुआत हो गई है। वैसे तो देशभर में बप्पा की भक्ति का रंग देखने को मिल रहा है, लेकिन मुंबई का गणेश उत्सव अपने आप में खास है। यहां मन्नतों के राजा यानी लालबागचा राजा हैं, तो वहीं मुंबई के माटुंगा में विराजमान GSB गणपति का अपना महत्व है।

इस साल GSB सेवा मंडल ने 24 फीट ऊंची बप्पा की प्रतिमा और उससे जुड़े आभूषणों व अन्य संपत्तियों के लिए करीब 703 करोड़ रुपये का बीमा कवर लिया है। बप्पा 66 किलो शुद्ध सोने के आभूषणों और सोने के सिंहासन से सजे हैं। वहीं, करीब 335 किलो चांदी से किया गया श्रृंगार और सजावट पूरे पंडाल की भव्यता को और बढ़ा रहे हैं। आइए सबसे अमीर बप्पा के बारे में जानते हैं।

5 दिन के लिए 703 करोड़ का बीमा कवर

माटुंगा स्थित GSB सेवा मंडल को देश का सबसे अमीर गणपति मंडल माना जाता है। इस साल मंडल ने अपने 5 दिवसीय गणेशोत्सव के लिए ₹703 करोड़ का रिकॉर्ड बीमा (Insurance) लिया है। इसमें सोने और चांदी के साथ

पंडाल में आने वाले श्रद्धालुओं (भक्तों), सेवादारों, रसोइयों, सुरक्षा गार्डों और काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह सबसे बड़ा कवर है।

यह बप्पा क्यों हैं खास?

मुंबई में इस साल करीब 2,700 सार्वजनिक गणपति मंडलों में भगवान गणेश की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इनमें लालबागचा राजा की भव्यता और लोकप्रियता अपनी जगह है, लेकिन मुंबई के माटुंगा में विराजमान GSB सेवा मंडल के गणपति की बात ही अलग है। GSB सेवा मंडल में न डीजे का शोर सुनाई देता है और न ही तेज संगीत। यहां पूरे वातावरण में वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई देती है।

मंडप में दो विशेष हवन कुंड बनाए गए हैं, जहां पांच दिनों तक 24 घंटे लगातार वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ हवन किया जाता है। मान्यता है कि इस हवन में दी गई आहुति के जरिए भक्तों की मनोकामनाएं बप्पा तक पहुंचती हैं। GSB की एक और खास परंपरा करीब 70 साल पुरानी है। मंडप के पास दो विशेष तराजू रखे गए हैं।

जब किसी भक्त की मनोकामना पूरी होती है, तो वह अपने बच्चों को इन तराजुओं में बैठाता है और उनके वजन के बराबर चावल, दाल और दूसरे अनाज का दान करता है। इस तरह जमा होने वाले अनाज से पूरे साल जरूरतमंदों और गरीबों के लिए महाप्रसाद तैयार किया जाता है। यानी यहां आस्था सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा और दान की परंपरा से भी जुड़ी हुई है।

atul. Singh
अतुल सिंहauthor

मैं अतुल सिंह,मैं 14 वर्षों से अधिक समय से टीवी पत्रकारिता में विभिन्न क्षेत्रों को खबरों को कवर करने वाला अनुभवी पत्रकार हूं। वर्तमान में Times Now नवभारत के लिए principal correspondent हूं। मैंने इंडिया टीवी, ज़ी न्यूज़,IBN 7 (न्यूज़ 18),Lemon न्यूज़ जैसे प्रमुख मीडिया संगठनों के साथ भी काम किया है। मनोरंजन,नागरिक मुद्दे ,इंफ्रा,राजनीति,आम और विधानसभा चुनाव और अपराध जैसे विषयों को बखूबी कवर किया है। वर्तमान में मुम्बई ब्यूरो से जुड़ा हुआ हूं। कई राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े कई विशेष खबरें भी कवर किया है।

और पढ़ें
End of Article