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46% FII होल्डिंग, ₹1068 करोड़ प्रॉफिट, फिर भी चाय-समोसे से सस्ता क्यों ये शेयर?

46% से ज्यादा FII होल्डिंग वाली ₹63 हजार करोड़ की इस कंपनी ने FY 26 की चौथी तिमाही में 45% प्रॉफिट रिपोर्ट किया है। अप्रैल में स्टॉक 20% उछल चुका है। लेकिन, फिर भी ब्रोकरेज ने टारगेट क्यों घटा दिया।

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संस्थागत निवेशकों की होल्डिंग 50% से ज्यादा

High FII Holding Stocks: निवेशकों के लिए विदेशी निवेशकों की ज्यादा भागीदारी एक तरह का इंडिकेटर होता है, जो बताता है कि बड़े निवेशक कहां ग्रोथ देख रहे हैं। ऐसा ही एक स्टॉक है, जिसमें 46% FII और 32% DII होल्डिंग है। पिछले वित्त वर्ष (FY 26) की चौथी तिमाही (Q4) में कंपनी ने 45% की धांसू प्रॉफिट ग्रोथ रिपोर्ट की है। वहीं, पिछले इस महीने में अब तक शेयर की कीमत में 20% से ज्यादा का उछाल आ चुका है, इसके बाद भी शेयर की कीमत एक चाय और समोसा के कॉम्बो से कम है।

यहां जिस कंपनी की बात की जा रही है, उसका मार्केट कैप भी 63 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का है। लेकिन, इसके बाद भी बड़े ब्रोकरेज ने शेयर प्राइस पर निराशाजनक रुख अपनाते हुए टारगेट प्राइस को डाउनग्रेड किया है। इस कंपनी का नाम है यस बैंक और हाल में कंपनी ने अपने नतीजे जारी करते हुए 1,068.42 करोड़ रुपये का प्रॉफिट रिपोर्ट किया है। वहीं, अप्रैल में शेयर की प्राइस ₹17.25 से आज बढ़कर 20.71 रुपये तक पहुंच गई है। इस तरह 20% से ज्यादा प्रॉफिट दिया है।

Yes Bank Q4 Result and Share Holding Pattern

यस बैंक का चौथी तिमाही में जोरदार प्रदर्शन

क्या करती है कंपनी?

YES Bank देश का एक प्रमुख प्राइवेट सेक्टर बैंक है, जो रिटेल, SME, कॉर्पोरेट बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट्स में काम करता है। पिछले कुछ सालों में बैंक ने अपनी स्ट्रैटेजी को रिटेल-फोकस्ड बनाया है, जिससे बिजनेस मिक्स में स्थिरता आई है।

तेजी के पीछे क्या है ट्रिगर?

हालिया तेजी के पीछे तीन बड़े फैक्टर हैं। पहला, Q4 में मजबूत प्रॉफिट ग्रोथ मिली है। इसके अलावा NPA में बड़ी गिरावट आई है इसके साथ ही FII की हिस्सेदारी, लगातार 45% से ऊपर बनी हुई है। इन फैक्टर्स ने शॉर्ट टर्म में सेंटिमेंट को मजबूत किया है और शेयर में तेजी देखने को मिली है।

फिर ब्रोकरेज को क्या खराबी दिखी?

High FII Holding, प्रॉफिट ग्रोथ और शेयर प्राइस में जंप तक की कहानी, तो लुभावनी लगती है। लेकिन, यहां से आगे एक नया मोड आता है, जहां बैंक की कमाई का बड़ा हिस्सा “Security Receipt (SR) रिकवरी” से आ रहा है, जो असल में एक बार मिलने वाला लाभ है। ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि जैसे-जैसे यह रिकवरी कम होगी, प्रॉफिट ग्रोथ भी धीमी पड़ सकती है। इसके अलावा बैंक का ROE अभी भी करीब 7% के आसपास है, जो इंडस्ट्री के हिसाब से कमजोर माना जाता है।

ब्रोकरेज ने क्यों दिया SELL कॉल?

JM Financial ने YES Bank पर ₹17 का टारगेट देते हुए SELL रेटिंग बरकरार रखी है। उनका साफ कहना है कि मौजूदा वैल्यूएशन बैंक की असली कमाई से ज्यादा उम्मीदों को दिखा रहा है। यानी बाजार जिस मजबूत रिकवरी की उम्मीद कर रहा है, वह अभी तक पूरी तरह साबित नहीं हुई है।

क्या है असली रिस्क ?

Yes Bank Ltd में सबसे बड़ा रिस्क इसकी कमाई की क्वालिटी को लेकर है। हालिया प्रॉफिट ग्रोथ का बड़ा हिस्सा “Security Receipt (SR) रिकवरी” से आया है, जो एक बार मिलने वाला फायदा है और आगे घट सकता है। इसके अलावा बैंक का ROE अभी भी करीब 7% के आसपास है, जो इंडस्ट्री के मुकाबले कमजोर है। ब्रोकरेज का मानना है कि अगर रिकवरी सपोर्ट कम हुआ, तो प्रॉफिट ग्रोथ टिकाऊ नहीं रह पाएगी और वैल्यूएशन पर दबाव आ सकता है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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