आज के समय में नई कार खरीदने के लिए ज्यादातर लोग कार लोन (Car Loan) का सहारा लेते हैं। आसान ईएमआई (EMI) की सुविधा के कारण लाखों लोग अपनी पसंदीदा कार खरीद पाते हैं। लेकिन कई बार नौकरी छूटने, आय कम होने या किसी दूसरी पैसों से जुड़ी परेशानी की वजह से ईएमआई समय पर जमा नहीं हो पाती। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या बैंक या फाइनेंस कंपनी आपकी कार तुरंत जब्त कर सकती है? इस सवाल का जवाब है- नहीं। दरअसल, इसके लिए कुछ तय प्रक्रियाएं और नियम होते हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है।
एक EMI छूटते ही गाड़ी जब्त नहीं होती
अगर किसी वजह से आपकी एक ईएमआई मिस हो जाती है तो बैंक या फाइनेंस कंपनी तुरंत आपकी कार अपने कब्जे में नहीं ले सकती। आमतौर पर सबसे पहले बैंक ग्राहक को फोन, ईमेल, एसएमएस या लिखित नोटिस के जरिए भुगतान करने की याद दिलाता है। इस दौरान ग्राहक को बकाया राशि जमा करने का मौका दिया जाता है। अगर ग्राहक आर्थिक परेशानी की जानकारी बैंक को समय रहते दे देता है, तो कई मामलों में बैंक किस्तों की रिस्ट्रक्चरिंग या भुगतान के लिए अतिरिक्त समय देने जैसे विकल्प भी उपलब्ध करवा सकता है।
कब बढ़ सकती है परेशानी?
अगर लगातार कई महीनों तक ईएमआई जमा नहीं की जाती और ग्राहक बैंक के नोटिस का भी जवाब नहीं देता, तो मामला गंभीर हो सकता है। ऐसी स्थिति में बैंक या लोन देने वाली संस्था लोन डिफॉल्ट मान सकती है और गाड़ी को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। हालांकि, यह कार्रवाई भी तय नियमों के तहत ही की जाती है। बैंक को पहले ग्राहक को नोटिस देना होता है और भुगतान का अवसर देना पड़ता है। सीधे जाकर गाड़ी जब्त करना उचित प्रक्रिया नहीं माना जाता।
पहले मिलता है अंतिम नोटिस
जब बैंक को लगता है कि ग्राहक लगातार भुगतान नहीं कर रहा है तो वह अंतिम नोटिस जारी कर सकता है। इसके बाद भी अगर बकाया राशि जमा नहीं होती, तो गाड़ी को रिकवर (Repossess) किया जा सकता है। कई मामलों में गाड़ी जब्त होने के बाद भी ग्राहक को बकाया राशि चुकाकर गाड़ी वापस लेने का अवसर दिया जाता है।
अगर भुगतान फिर भी नहीं किया जाता, तो बैंक गाड़ी की नीलामी कर सकता है। नीलामी से प्राप्त राशि से पहले बकाया लोन, ब्याज और दूसरे शुल्क एडजस्ट किए जाते हैं। अगर कोई राशि बचती है तो वह ग्राहक को लौटाई जा सकती है। वहीं अगर नीलामी की रकम पूरी बकाया राशि से कम होती है तो शेष रकम की जिम्मेदारी तब भी ग्राहक पर रह सकती है।
आर्थिक परेशानी हो तो क्या करें?
अगर किसी कारण से ईएमआई भरना मुश्किल हो रहा है तो बैंक से बात करने में देरी न करें। कई बैंक अस्थायी राहत, ईएमआई रीशेड्यूल, लोन की अवधि बढ़ाने या दूसरे समाधान देने पर विचार करते हैं। समस्या छिपाने के बजाय समय रहते बैंक से संपर्क करना बेहतर विकल्प होता है।
