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प्रोजेक्ट पजेशन से पहले फ्लैट खरीदने के हैं 3 बड़े फायदे, क्या आपको पता हैं?

अगर आप सपने का आशियाना खरीदने की योजना बना रहे हैं तो पजेशन के करीब प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदना फायदे का सौदा होगा। आइए जानते हैं क्यों?

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फ्लैट बाइंग टिप्स

पिछले कुछ सालों में घर की कीमत तेजी से बढ़ी है। इसके बावजूद लोग घर खरीदने का सपना नहीं छोड़ रहे हैं। कड़ी मेहनत और पैसे बचाकर घर खरीद रहे हैं। हालांकि, घर की बढ़ी कीमत अब लोगों को परेशान जरूर कर रही है। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो घर खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो हम आपको कम बजट में बेस्ट घर चुनने का सबसे सॉलिड तरीका बता रहे हैं। आप वैसे प्रोजेक्ट में घर खरीदें जो पजेशन के बिल्कुल करीब हो। आइए पजेशन से पहले घर खरीदने के फायदे के बारे में जानते हैं।

पजेशन से पहले फ्लैट खरीदने के कई फायदे

दिग्गज रियल एस्टेट एक्सपर्ट और अंतरिक्ष इंडिया के सीएमडी राकेश यादव बताते हैं कि पजेशन के करीब प्रोजेक्ट के बारे में लोगों में यह गलतफहमी होती है कि उनमें पैसा लगाना फायदेमंद नहीं है और रहने के लिए तैयार प्रोजेक्ट ज्यादा आकर्षक होते हैं। लेकिन,इस चक्कर में ज्यादातर लोग कीमत और क्वालिटी के बड़े फायदों को नजरअंदाज कर देते हैं। बन रही प्रॉपर्टी में कीमत को लेकर फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) मिलती है, जो रहने के लिए तैयार प्रोजेक्ट्स में नहीं मिलती। इसके साथ ही रेडी टू मूव के मुकाबले पजेशन के करीब प्रोजेक्ट में कीमत कम होती है। पजेशन की प्रॉपर्टी में आपको अच्छी डील मिल सकती है। आप अपने अनुसार फ्लैट का इंटीरियर करा सकते हैं। तैयार फ्लैट में आप अपनी मर्जी से दीवारों के नक्शे, टाइल्स या किचन के लेआउट में बदलाव नहीं कर सकते। लेकिन पजेशन से पहले, जब कंस्ट्रक्शन चल रहा होता है, तब आप बिल्डर से बात करके फ्लैट के इंटीरियर में बदलाव करवा सकते हैं। जैसे- अपनी पसंद की टाइल्स लगवाना, वायरिंग में बदलाव या वार्डरोब के लिए एक्स्ट्रा स्पेस बनवाना।

निवेशकों के लिए भी फायदे का सौदा

रेडी टू मूव प्रॉपर्टी के मुकाबले पजेशन के करीब प्रॉपर्टी निवेश के लिए भी बेहतर होती है। पजेशन पर आने पर प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ती ही है। हां, पजेशन से पहले फ्लैट खरीदते समय हमेशा यह सुनिश्चित कर लें कि प्रोजेक्ट RERA से रजिस्टर्ड हो और बिल्डर का ट्रैक रिकॉर्ड साफ हो। इससे आपका निवेश पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

मनपसंद फ्लैट चुनने की आजादी

रियल एस्टेट एक्सपर्ट प्रदीप मिश्रा कहते हैं कि रेडी टू मूव के मुकाबले पजेशन के करीब प्रोजेक्ट आपको मनपसंद फ्लैट चुनने की आजादी भी देता है। रेडी टू मूव में आपके पास बहुत ही सीमित विकल्प होते हैं। वहीं, पजेशन के करीब प्रोजेक्ट में आपके पास विकल्प बढ़ जाते हैं। आप अच्छे व्यू (जैसे पार्क फेसिंग या कॉर्नर फ्लैट) और वास्तु के हिसाब से सही फ्लोर और फ्लैट खुद चुन सकते हैं। इतना ही नहीं, नए बन रहे प्रोजेक्ट में खरीदार को नई सुविधाओं, आधुनिक डिजाइन और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का लाभ मिलता है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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