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...फिर चमकेगी चांदी, सोना होगा और खरा! कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया ने बताया क्या करें निवेशक?

अगर गोल्ड-सिल्वर में निवेश को लेकर प्लानिंग है और कोई कन्फ्यूजन है, तो मशहूर कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया ने पूरी रणनीति बताई है। जानें जेवरात से ETF तक आगे क्या हैं संभावनाएं और आप क्या करें?

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गोल्ड सिल्वर रेश्यो दे रहा मजबूती के संकेत

Gold-Silver Price Prediction : गोल्ड अपने पीक से करीब 26% और चांदी करीब 39% नीचे है। पिछले करीब 6 महीने से दोनों कीमती धातुएं एक सीमित रेंज में बनी हुई हैं। मार्केट एक्सपर्ट इसे कंसोलिडेशन बता रहे हैं। ऐसे सवाल उठता है कि अगर किसी को गोल्ड और सिल्वर में निवेश करना है, तो क्या यह सही समय है या मौजूदा स्तर से भी गिरावट आ सकती है? इस सवाल का जवाब मशहूर कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया ने दिया है। अपने गोल्ड-सिल्वर आउटलुक में उन्होंने कई अहम बिंदुओं को उठाते हुए कहा है कि अब चांदी के फिर से चमकने के दिन लौट रहे हैं। खासतौर पर गोल्ड-सिल्वर रेश्यो भी पॉजिटिव संकेत दे रहा है। केडिया के मुताबिकचांदी का भाव आने वाले दिनों में 3.50 लाख तक जा सकता है और सोना फिर से अपने ऑल टाइम हाई 1.80 रुपये प्रति 10 ग्राम को छू सकता है।

कंसोलिडेशन लगभग पूरा

आने वाले दिनों में गोल्ड और सिल्वर के टेक्निकल लेवल को लेकर केडिया का मानना है कि दोनों ही कीमती धातुओं में लंबे कंसोलिडेशन का फेज अब पूरा होता दिख रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इनके नीचे जाने की तुलना मे ऊपर जाने की संभावनाएं ही ज्यादा नजर आती हैं। मसलन गोल्ड मई के आखिर से अगस्त के शुरुआत तक 3900 से 4100 डॉलर वाली रेंज को तोड़कर 4400 डॉलर की तरफ बढ़ रहा है। इसी तरह सिल्वर में भी मजबूती बन रही है।

ग्लोबल मार्केट्स का माहौल पॉजिटिव

गोल्ड और सिल्वर के लिए अब ग्लोबल माहौल पॉजिटव होता दिख रहा है। केडिया का कहना है कि जिस तरह निवेशक रूस-युक्रेन युद्ध को अपने रिस्क एसेसमेंट में प्राइस इन कर चुके हैं, उसी तरह अब ईरान-अमेरिका युद्ध का असर भी गोल्ड-सिल्वर में प्राइस इन हो चुका है। इसके अलावा युद्ध के शुरुआती दौर में गोल्ड-सिल्वर से निकलकर जो पैसा क्रूड में लगा था, वह भी अब निकल रहा है।

गोल्ड सिल्वर बढ़ेगा ग्लोबल निवेश

हेज फंड्स से लेकर इंस्टीट्यूशन तक फिर से गोल्ड की तरफ लौट रहे हैं। क्योंकि, ग्लोबल इक्विटी मार्केट अब भी बहुत वोलैटाइल है। खासतौर पर AI और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स का बुलबुला भी फटने लगा है। इन स्टॉक्स में जमकर मुनाफावसूली हो रही है, जिससे ग्लोबल इक्विटी मार्केट में अस्थिरता बढ़ती जा रही है। ऐसे में निवेशकों के सामने गोल्ड और सिल्वर जैसे एसेट्स के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचता है।

क्रिप्टो भी गोल्ड बैक हो रहा

केडिया ने बताया कि गोल्ड की डिमांड सेंट्रल बैंक से लेकर क्रिप्टो मार्केट तक हर जगह बनी हुई है। ऐसे में गोल्ड के मौजूदा स्तरों से बहुत नीचे जाने की कोई वजह नजर नहीं आती है। केडिया का कहना है कि दुनियाभर कें गोल्ड बैक्ड क्रिप्टो का चलन तेजी से बढ़ रहा है। Tether Gold (XAUt) और Paxos Gold (PAXG) जैसे टोकन तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। वहीं, सेंट्रल बैंकों की डिमांड के नजरिये से देखें, तो चीन लगातार 21 महीने से गोल्ड की खरीदारी कर रहा है।

भारत में लोकल डिमांड बढ़ना तय

केडिया ने भारत में लोकल डिमांड में भी ग्रोथ का अनुमान लगाया है। केडिया ने IIJS का हवाला देते हुए बताया कि देश के ज्वेलर्स में डिमांड को लेकर जबरदस्त ऑप्टिमिज्म है। खासतौर पर त्योहारी सीजन में मजबूत डिमांड देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ज्वेलरी सेक्टर की ग्रोथ में गोल्ड रेट बड़ी बाधा नहीं बनेगा क्योंकि ज्वेलरी इंडस्ट्री ने पिछले दिनों आई नरमी का फायदा रॉ मटेरियल जुटाने के लिए किया है।

ETF में क्या हो रणनीति?

गोल्ड और सिल्वर ETF को लेकर भी केडिया आशावादी हैं। उनका मानना है कि जनवरी में जब गोल्ड-सिल्वर पीक पर थे, तो गोल्ड-सिल्वर ETF में भी इनफ्लो पीक पर पहुंच गया। लेकिन, जैसे ही कीमतें अचानक गिरीं, तो इनफ्लो घट गया और ओवरऑल लिक्विडिटी घट गई। उस समय गोल्ड-सिल्वर ETF में जिन्होंने प्रॉफिट बुकिंग की वे इक्विटी में तेजी की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन, इक्विटी मार्केट के वोलैटाइल और रिलेटिवली महंगे होने की वजह से अब फिर से गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में इनफ्लो बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही उनका कहना है कि, जिन निवेशकों ने पीक पर शुरुआत की उनके लिए फिलहाल एवरेजिंग का अच्छा समय है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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