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क्या है इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम जिसे जल्द लागू करवाना चाहते हैं सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ

  • Authored by: अंशुमन साकल्ले
  • Updated Dec 19, 2023, 08:12 PM IST

भारत में सालाना लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं में घायल होते हैं और इनमें से बहुत सारे लोग अपनी जान भी गंवा देते हैं। इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम वो जरिया बन सकता है जिसके लागू होने से ए क्सीडेंट में बड़ी कमी आ सकती है।

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इंटेजलजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम इसका एक जरिया साबित हो सकता है।

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KEY HIGHLIGHTS
  • क्या है इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम
  • सड़क दुर्घटनाएं रोकने का जरिया
  • देश में जल्द लागू हो सकता है

Inteligent Transport System: सालाना भारत में जितने लोग सड़क दुर्घटना में अपनी जान गांवा देते हैं, उनती जानहानि पूरी दुनिया में कहीं नहीं होती। इसके अलावा लाखों लोग हर साल सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल भी होते हैं जो कई बार जीवन भर का सब क बनकर रह जाता है। ऐसे में हमारे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को अगर और बेहतर बनाया जाएगा तो इससे रोड एक्सीडेंट की संख्या में बड़ी गिरावट आ सकती है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या में बड़ी कमी लाना चाहते हैं। इंटेजलजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम इसका एक जरिया साबित हो सकता है।

इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने मंगलवार को भारत में एक ‘इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम’ (आईटीएस) के तत्काल कार्यान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत में लगातार बढ़ते यातायात के कारण सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु का खतरा अधिक है। इंटरनेशनल रोड फेडरेशन की भारतीय इकाई (आईआरएफ-आईसी) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय मानक ब्यूरो परिवहन इंजीनियरिंग विभाग के चेयरमैन बलराज भनोट ने कहा कि आईटीएस, चालकों को सड़क की स्थिति के बारे में वास्तविक जानकारी प्रदान करके सड़क सुरक्षा में सुधार करने का एक तरीका है।

लाखों लोगों की जान बचेगी

उन्होंने कहा, ‘‘हमें आने वाली समस्याओं तथा चुनौतियों का अनुमान लगाना चाहिए। उनके लिए तैयार रहना चाहिए। इसमें ही आईटीएस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।’’ कार्यक्रम में आईआरएफ के मानद अध्यक्ष के.के. कपिला ने कहा कि देश में सड़क सुरक्षा में सुधार का सबसे अच्छा तरीका स्मार्ट परिवहन प्रणाली प्रौद्योगिकी का उपयोग करना है। कुल मिलाकर टेक्नोलॉजी का फायदा उठाते हुए भारत में हर साल हजारों सड़क दुर्घटनाएं रोकी जा सकती हैं और इनमें मरने और घायल होने वाले लाखों लोगों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

अंशुमन साकल्ले
अंशुमन साकल्लेauthor

अंशुमन साकल्ले जून 2022 से टाइम्स नाउ नवभारत (www.timesnowhindi.com/) में बतौर सीनियर स्पेशल करेस्पॉन्डेंट कार्यरत हैं। ये ईएमएमसी, दैनिक भास्कर, एनडीटीवी और जी न्यूज डिजिटल में काम करने के बाद संस्थान से जुड़े। इन्हें सभी मुख्य बीट्स पर काम करने का अनुभव है और ये 12 वर्ष से भी ज्यादा इसी पेशे में गुजार चुके हैं। एक्सपर्टीज की बात करें तो ऑटो और टेक से जुड़ी तमाम खबरों का जिम्मा यही संभाल रहे हैं। ऑन ग्राउंड रिपोर्ट हो या वीडियो या फिर गाड़ियों का रिव्यू, ये हमेशा अलग-अलग एंगल से खबरों को रोचक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। भोपाल के रहने वाले अंशुमन बड़े घुमक्कड़ हैं और ये देश की लगभग सभी प्रचलित जगहों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कर चुके हैं। एनडीटीवी से लेकर अब तक इन्होंने सिर्फ ऑटोमोबाइल जगत से जुड़ी खबरों पर ही काम किया है, हालांकि कोर बीट से इतर चुनाव, बजट या किसी भी बडे इवेंट पर इन्हें बड़ी और महत्वपूर्ण खबरों की जिम्मेदारी भी दी जाती है। इन सबके अलावा राजनीति में भी इन्हें खासी दिलचस्पी है, यही वजह है कि मध्यप्रदेश की पॉलिटिक्स को ये बहुत गहराई से जानते हैं।

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