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टायर में कम हवा पड़ रही है भारी, हर साल 4,500 करोड़ रुपये का ईंधन हो रहा बर्बाद

एटीएमए ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में 1.3 लाख से अधिक यात्री वाहनों के टायर की जांच की गई। इनमें से लगभग एक लाख टायर जांच केवल पिछले वर्ष के दौरान की गई। एटीएमए ने कहा कि टायर में हर एक पीएसआई की कमी से ईंधन दक्षता लगभग 0.2 प्रतिशत घट जाती है।

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गाड़ियों में कम हवा की वजह से फ्यूल का बड़ा नकुसान हो रहा है। (फोटो क्रेडिट-iStock)

भारत में वाहनों के टायर में कम हवा होने के कारण हर साल 4,500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 42 करोड़ लीटर से ज्यादा पेट्रोल का नुकसान हो रहा है। उद्योग संगठन एटीएमए के एक अध्ययन में यह बात सामने आई। वाहन टायर विनिर्माता संघ (एटीएमए) की तकनीकी इकाई इंडियन टायर टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी (आईटीटीएसी) के अध्ययन में सामने आया कि भारतीय सड़कों पर बड़ी संख्या में ऐसे वाहन हैं जिनके टायर में हवा यात्री वाहन विनिर्माता द्वारा अनुशंसित स्तर से कम होती है। इससे ईंधन की भारी बर्बादी, वाहन रखरखाव लागत में वृद्धि और सड़क सुरक्षा जोखिम बढ़ रहे हैं।

एटीएमए ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में 1.3 लाख से अधिक यात्री वाहनों के टायर की जांच की गई। इनमें से लगभग एक लाख टायर जांच केवल पिछले वर्ष के दौरान की गई। इसमें कहा गया, 'निष्कर्षों से पता चला कि 32 प्रतिशत टायर में हवा अनुशंसित स्तर से 20 प्रतिशत से अधिक कम थी। वहीं 21 प्रतिशत टायर में हवा अनुशंसित स्तर से 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत कम पाई गई।'

अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों का हवाला देते हुए एटीएमए ने कहा कि टायर में हर एक पीएसआई (पाउंड प्रति वर्ग इंच) की कमी से ईंधन दक्षता लगभग 0.2 प्रतिशत घट जाती है। सर्वेक्षण के दौरान जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर एटीएमए का अनुमान है कि टायर में हवा कम होने कारण भारत के कुल वाहन ईंधन उपभोग के बराबर 0.75 प्रतिशत ईंधन क्षमता का नुकसान हो रहा है।

56.77 अरब लीटर पेट्रोल की खपत

एटीएमए ने कहा, 'भारत में वार्षिक पेट्रोल खपत लगभग 56.77 अरब लीटर आंकी गई है और इसका लगभग पूरा उपयोग यात्री वाहनों (जिनमें दोपहिया वाहन भी शामिल हैं) द्वारा किया जाता है। इसका मतलब है कि हर साल लगभग 42.57 करोड़ लीटर पेट्रोल का नुकसान हो रहा है। मौजूदा खुदरा ईंधन कीमतों के आधार पर इस बर्बाद ईंधन का मूल्य 4,500 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है।'

संगठन ने स्पष्ट किया कि यह अनुमान केवल पेट्रोल खपत से संबंधित है और इसमें डीजल, सीएनजी या एलपीजी से चलने वाले वाहन शामिल नहीं हैं। एटीएमए ने कहा, ’’ इसलिए टायर में कम हवा होने के कारण देश को होने वाला वास्तविक ईंधन नुकसान इससे भी अधिक होने की संभावना है।’’

आईटीटीएसी के चेयरमैन रेनजी इसाक ने अध्ययन पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'यह सर्वेक्षण घरेलू बजट और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले एक छिपे लेकिन महत्वपूर्ण बोझ को उजागर करता है।' उन्होंने कहा कि टायर में कम हवा से उत्सर्जन भी बढ़ता है, जिससे वायु प्रदूषण अधिक होता है। एटीएमए सेफ्टी अवेयरनेस ग्रुप के चेयरमैन सुदर्शन एस. गुसैन ने कहा कि आर्थिक नुकसान के अलावा टायर में कम हवा से सुरक्षा को भी गंभीर खतरा है। गुसैन ने कहा कि टायर में कम हवा से वे असमान रूप से घिसते हैं, जिससे वे ज्यादा समय तक नहीं चलते और और बदलने की भी लागत बढ़ जाती है।

(इनपुट-भाषा)

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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