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कार और बस में कितने टन का AC होता है? रोज सफर करते हैं, लेकिन नहीं जानते होंगे

आप अक्सर कार में सफर करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप जिस कार में सफर करते हैं, उसमें कितने टन का एसी होता है। अधिकतर लोग नहीं जानते हैं, लेकिन यह है बड़ा दिलचस्प।

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AC IN CAR

भीषण गर्मी के मौसम में कार और बस में सफर करते समय एयर कंडीशनर (AC) सबसे जरूरी सुविधाओं में से एक माना जाता है। आज लगभग हर कार और अधिकांश बसें एसी से लैस होती हैं। हालांकि रोजाना इन वाहनों में सफर करने वाले बहुत से लोग यह नहीं जानते कि इनमें इस्तेमाल होने वाला एसी कितने टन क्षमता का होता है।

आखिर क्या होता है एसी का "टन"?

एसी की क्षमता को "टन" में मापा जाता है। यहां टन का मतलब वजन से नहीं बल्कि कूलिंग क्षमता से होता है। एक टन एसी लगभग 12,000 BTU (ब्रिटिश थर्मल यूनिट) प्रति घंटे की कूलिंग क्षमता प्रदान करता है। जितना बड़ा स्थान होगा, उसे ठंडा करने के लिए उतनी अधिक टन क्षमता वाले एसी की जरूरत पड़ेगी।

कार में कितने टन का एसी होता है?

सामान्य हैचबैक, सेडान और कॉम्पैक्ट एसयूवी कारों में आमतौर पर 1 टन से 1.5 टन के बराबर कूलिंग क्षमता वाला एसी सिस्टम लगाया जाता है। हालांकि कारों में एसी को घरेलू एसी की तरह टन में नहीं बेचा जाता, लेकिन उनकी कूलिंग क्षमता इसी दायरे के आसपास होती है। बड़ी एसयूवी और लग्जरी वाहनों में यह क्षमता 2 टन तक भी पहुंच सकती है, ताकि केबिन को तेजी से ठंडा किया जा सके।

बसों में कहीं ज्यादा ताकतवर होता है एसी

बसों का आकार कार की तुलना में काफी बड़ा होता है, इसलिए उनमें अधिक क्षमता वाले एयर कंडीशनिंग सिस्टम की जरूरत होती है। साधारण एसी बसों में आमतौर पर 4 से 6 टन तक की कूलिंग क्षमता वाले एसी लगाए जाते हैं। वहीं लंबी दूरी की वोल्वो, स्कैनिया और अन्य प्रीमियम कोच बसों में 8 से 12 टन तक की क्षमता वाले एसी सिस्टम इस्तेमाल किए जा सकते हैं। कुछ बड़ी लग्जरी बसों में यह क्षमता इससे भी अधिक हो सकती है।

बस में इतना बड़ा एसी क्यों जरूरी होता है?

एक बस में एक समय में 30 से 50 या उससे अधिक यात्री सफर करते हैं। इसके अलावा बड़ी खिड़कियां, बार-बार खुलने वाले दरवाजे और अधिक अंदरूनी जगह के कारण गर्मी भी ज्यादा पैदा होती है। ऐसे में पूरे केबिन को समान रूप से ठंडा रखने के लिए अधिक क्षमता वाले एसी सिस्टम की आवश्यकता पड़ती है।

वाहन के एसी और घर के एसी में क्या अंतर है?

कार और बस में लगा एसी इंजन की शक्ति से चलता है, जबकि घरों में इस्तेमाल होने वाला एसी बिजली से संचालित होता है। इसके अलावा वाहन का एसी लगातार बदलते तापमान और बाहरी परिस्थितियों के अनुसार काम करता है, इसलिए उसकी डिजाइन और कार्यप्रणाली घरेलू एसी से अलग होती है।

सफर के दौरान महसूस होती है इसकी असली ताकत

जब बाहर का तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब कार और बस के एसी की क्षमता का सही अंदाजा लगता है। छोटी कार में लगभग 1 से 1.5 टन और बड़ी बस में 4 से 12 टन तक की कूलिंग क्षमता यात्रियों को आरामदायक सफर का अनुभव देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेय author

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिय... और देखें

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