पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अगर हम कहें कि आप महज 1 लीटर तेल की खपत में गाड़ी से दिल्ली से अहमदाबाद या गोरखपुर से आगे पटना से कुछ पहले तक का सफर कर सकते हैं तो यह बात आपको किसी मजाक से कम नहीं लगेगी। लेकिन हम मजाक नहीं कर रहे हैं। दरअसल, अमेरिका के Brigham Young University के छात्रों के एक समूह ने ऐसा अल्ट्रा-एफिशिएंट व्हीकल तैयार किया है, जिसने फ्यूल एफिशिएंसी को लेकर सभी को हैरान कर दिया है। यह खास कम्बंशन इंजन व्हीकल करीब 911 किलोमीटर प्रति लीटर तक की एफिशिएंसी देने का दावा करता है। दुनिया भर में फ्यूल की बढ़ती कीमतों और बेहतर माइलेज की मांग के बीच अमेरिकी छात्रों का यह प्रोजेक्ट हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा हैं।
Shell Eco-marathon प्रतियोगिता के लिए तैयार हुई गाड़ी
इस खास व्हीकल को Supermileage नाम दिया गया है। इसे खासतौर पर Shell Eco-marathon प्रतियोगिता के लिए तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य रोजमर्रा की ड्राइविंग नहीं, बल्कि सबसे ज्यादा फ्यूल इकोनॉमी हासिल करना है।
डिजाइन की बात करें तो यह व्हीकल ट्राइक और कॉम्पैक्ट कार का मिक्स नजर आता है। इसे लाइटवेट कार्बन फाइबर मटेरियस से बनाया गया है और इसकी बॉडी कम ऊंची रखी गई है ताकि हवा का रेसिस्टेंस कम किया जा सके। यही एरोडायनैमिक डिजाइन इसकी एफिशिएंसी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है।
कौन चला सकता है 49 किलोग्राम की गाड़ी
अब आप जानना चाहेंगे कि इस व्हीकल को कौन चला सकता है। दरअसल, व्हीकल इतना कॉम्पैक्ट है कि इसमें केवल लगभग 5 फीट 4 इंच तक की हाइट और 54 किलोग्राम वजन वाला ड्राइवर ही बैठ सकता है। खास बात ये है कि इस पूरी गाड़ी का वजन केवल 49 किलोग्राम बताया गया है। कम वजन की वजह से ही गाड़ी को चलाने में बहुत कम एनर्जी की जरूरत पड़ती है।
1 लीटर तेल में 911 किलोमीटर की दूरी
Shell Eco-marathon के नियमों के तहत इस सुपरमाइलेज व्हीकल ने Indianapolis Motor Speedway पर 16 किलोमीटर की दूरी तय की। इसमें सामान्य फ्यूल टैंक की जगह केवल 30 मिलीलीटर ethanol reservoir का इस्तेमाल किया गया। टेस्ट के दौरान इसे 2,145 miles per gallon यानी भारतीय मानकों के हिसाब से लगभग 911 kmpl की एफिशिएंसी मिली।
हालांकि यह गाड़ी केवल एफिशिएंसी डेमो के लिए बनाई गई है। इसकी टॉपी स्पीड करीब 37 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित है। वास्तविक सड़कों और ट्रैफिक में गाड़ी की रेंज और परफॉर्मेंस में अंतर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, तेज हवा या रोड कंडीशन का असर गाड़ी की एफिशिएंसी पर पड़ सकता है।
छात्रों की यह उपलब्धि दिखाती है कि आने वाले समय में इसी तरह के एक्सपेरिमेंट्स फ्यूल एफिशिएंसी और सस्टेनेबल मोबिलिटी के क्षेत्र में नई संभावनाओं के दरवाजे खुल सकते हैं।
