Farmer Success Story: महाराष्ट्र के छोटे से गांव चिते पिंपलगांव में जन्मे योगेश गवांडे ने अपनी मेहनत और इनोवेशन से खेती को आसान बनाने का अनूठा काम किया है। खेती-बाड़ी से जुड़े परिवार में पले-बढ़े योगेश ने बचपन में किसानों की मुश्किलें देखीं, जिसने उन्हें किसानों के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी। 2008 में औरंगाबाद में अपने चाचा के पास रहकर पढ़ाई की, लेकिन गांव की जड़ों से हमेशा जुड़े रहे। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान उनके भाई को मैनुअल कीटनाशक स्प्रेयर से जहर फैलने के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इस घटना ने योगेश को एक सुरक्षित और प्रभावी स्प्रेयर बनाने के लिए प्रेरित किया।
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बना दिया यूनीक कीटनाशक स्प्रेयर
कृषि जागरण की रिपोर्ट के अनुसार योगेश ने रोटरी मोशन को रेसिप्रोकेटिंग मोशन में बदलने के सिद्धांत पर आधारित एक पहिया-आधारित कीटनाशक स्प्रेयर डेवलप किया। शुरुआती मॉडल भारी था, लेकिन फंक्शनल था। स्थानीय शिक्षकों और एक ड्राइवर के प्रोत्साहन से उन्होंने डिज़ाइन को बेहतर बनाया और पहली यूनिट बेची।
कैसे शुरू किया प्रचार
2016 में योगेश ने फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर अपने प्रोडक्ट का प्रमोशन शुरू किया। उनके वीडियो वायरल हुए और दिसंबर 2016 में एक कृषि प्रदर्शनी में 65 यूनिट का पहला बड़ा ऑर्डर मिला। भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट (BYST) के मेंटर्स ने उनकी मदद की और उन्हें प्रोडक्ट क्वालिटी, प्राइसिंग और मार्केटिंग में सपोर्ट किया।
BYST की फाउंडर ट्रस्टी लक्ष्मी वेंकटरमन वेंकटेशन ने योगेश के विजन पर भरोसा जताया और उनकी एंटरप्रेन्योरशिप को प्रोत्साहित किया।
2.2 करोड़ रु पहुंच गया टर्नओवर
आज योगेश की कंपनी, नियो फार्मटेक, 22 राज्यों और केन्या, जाम्बिया, नाइजीरिया व रूस जैसे देशों में 7,000 से अधिक स्प्रेयर बेच चुकी है। बेसिक मॉडल की कीमत 10,000 रुपये और प्रीमियम मॉडल की 12,000 रुपये है।
2022-23 में कंपनी का टर्नओवर 2.2 करोड़ रुपये रहा, और इस साल 5 करोड़ रुपये पार करने की उम्मीद है। कोविड-19 के दौरान योगेश ने अपने स्प्रेयर को कीटाणुनाशक छिड़काव के लिए अनुकूलित किया, जिससे औरंगाबाद नगर निगम और अस्पतालों को आपूर्ति की।
अंतरराष्ट्रीय लेवल पर कामयाबी का सपना
YBI बूट कैंप में 25 देशों के उद्यमियों से मिलने के बाद योगेश ने अंतरराष्ट्रीय विस्तार का सपना देखा। उनकी सलाह है, "लगन और प्रतिबद्धता के साथ काम करें; रातोंरात सफलता नहीं मिलती।" योगेश की कहानी ग्रामीण भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सही मार्गदर्शन और अवसरों से बड़े बदलाव ला सकते हैं।
