Stubble Burning : केंद्र सरकार पराली जलाने की समस्या को रोकने के लिए नई और व्यापक योजना तैयार करने जा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने कहा है कि सरकार धान की बुवाई के समय से ही किसानों को जागरूक करेगी, ताकि फसल कटाई के बाद पराली जलाने की नौबत न आए। इस कदम का उद्देश्य पर्यावरण को बचाना और मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखना है।
पर्यावरण मंत्री के साथ हुई अहम बैठक
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक मंगलवार को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के उपायों पर चर्चा की गई। साथ ही फसल अवशेष यानी पराली के बेहतर प्रबंधन के लिए नई योजनाओं पर भी विचार किया गया। सरकार का मानना है कि पराली जलाने की समस्या का समाधान केवल सख्ती से नहीं, बल्कि किसानों को सही जानकारी और सुविधाएं देकर किया जा सकता है।
धान की बुवाई से ही शुरू होगी तैयारी
बैठक के बाद शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार ने यह तय किया है कि धान की बुवाई के समय से ही ऐसी योजना बनाई जाएगी, जिससे किसानों को पराली जलाने की जरूरत न पड़े। इसके लिए किसानों को आधुनिक तकनीकों, मशीनों और वैकल्पिक उपायों की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि समय रहते जागरूकता अभियान चलाने से पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
प्रदूषण का बड़ा कारण है पराली
हर साल धान की कटाई के बाद बड़ी मात्रा में पराली निकलती है। कई किसान इसे जल्दी से निपटाने के लिए खेतों में आग लगा देते हैं। इससे भारी मात्रा में धुआं निकलता है, जो दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में वायु प्रदूषण बढ़ाने का कारण बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार पराली जलाने से केवल हवा ही प्रदूषित नहीं होती, बल्कि खेत की उपजाऊ मिट्टी को भी नुकसान पहुंचता है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीवाणु और पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
किसानों को मिलेंगे बेहतर विकल्प
सरकार अब ऐसी व्यवस्था पर काम कर रही है, जिससे किसान पराली का उपयोग अन्य कार्यों में कर सकें। इसके लिए मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने, जागरूकता कार्यक्रम चलाने और वैकल्पिक तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। कृषि मंत्रालय का मानना है कि यदि किसानों को सही समय पर जानकारी, संसाधन और सहायता मिले तो पराली जलाने की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
पर्यावरण और खेती दोनों को होगा फायदा
सरकार की नई योजना से एक तरफ वायु प्रदूषण कम होगा, वहीं दूसरी ओर मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहेगी। इससे किसानों को लंबे समय में बेहतर उत्पादन मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। आने वाले महीनों में सरकार इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर सकती है।
