Pusa Krishi Vigyan Mela 2025: पूसा कृषि विज्ञान मेले की तारीख आ गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को यहां ‘पूसा कृषि विज्ञान मेला’ 2025 का उद्घाटन करेंगे। इसमें किसानों, छात्रों और अन्य अंशधारकों को नवीनतम बीज किस्मों और प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईएआरआई) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में किसानों सहित लगभग एक लाख लोगों के भाग लेने की उम्मीद है।
‘उन्नत कृषि-विकसित भारत मेले का विषय
आईएआरआई के निदेशक चेरुकुमल्ली श्रीनिवास राव ने कि केंद्रीय कृषि मंत्री उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे, जबकि कृषि राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर विशिष्ट अतिथि होंगे। उन्होंने कहा कि मेले का विषय - ‘उन्नत कृषि-विकसित भारत’ है। राव ने कहा कि इस वर्ष के मेले का मुख्य आकर्षण आईएआरआई द्वारा विकसित नई किस्मों और प्रौद्योगिकियों का जीवंत प्रदर्शन होगा। इसमें आईएआरआई के साथ-साथ आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, केवीके (कृषि विज्ञान केंद्र), एफपीओ, उद्यमियों, स्टार्टअप, सार्वजनिक और निजी कंपनियों की प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और सेवाओं पर प्रदर्शनियां होंगी।़
इस आयोजन के दौरान जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, डिजिटल कृषि, युवाओं और महिलाओं के उद्यमिता विकास सहित महत्वपूर्ण मुद्दों पर तकनीकी सत्र और किसान-वैज्ञानिक बातचीत होगी। इसमें प्रमुख किस्मों के पूसा बीजों की बिक्री और मौके पर कृषि संबंधी सलाह शामिल होंगी।
आईएआरआई के संयुक्त निदेशक-विस्तार रवींद्र पदारिया ने कहा कि हमें तीन दिवसीय मेले के दौरान लगभग एक लाख आगंतुकों के आने की उम्मीद है। वर्ष 2023 के आयोजन के दौरान, किसानों ने लगभग 2.2 करोड़ रुपये मूल्य के बीज खरीदे थे और आईएआरआई को उम्मीद है कि इस बार यह संख्या इससे कहीं अधिक होगी। पहले यह मेला झारखंड में आयोजित किया गया था। कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी 24 फरवरी को समापन सत्र के मुख्य अतिथि होंगे। डेयर के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक हिमांशु पाठक उद्घाटन और समापन सत्रों की अध्यक्षता करेंगे।
आईएआरआई के बयान के अनुसार, वर्ष 2024 के दौरान 10 विभिन्न फसलों की विभिन्न फसल किस्में - ब्रेड गेहूं में सात, चावल में तीन, मक्का की आठ संकर, मोती बाजरा की एक संकर, चने की दो किस्में, अरहर की एक संकर, मूंग की तीन किस्में, मसूर की एक किस्म, डबल जीरो सरसों की दो किस्में और सोयाबीन की एक किस्म - जारी की गईं थी।
