मुर्रा भैंस अधिक दूध और बेहतर मुनाफे के लिए भरोसेमंद, असली-नकली की पहचान कैसे करें?
- Authored by: रामानुज सिंह
- Updated Dec 10, 2025, 11:49 AM IST
Murra Bhains: किसान और पशुपालक अधिक दूध और बेहतर मुनाफा देने वाली नस्ल चाहते हैं, इसलिए मुर्रा भैंस उनकी पहली पसंद बन गई है। इसकी दूध उत्पादन क्षमता उत्कृष्ट होती है, जिससे डेयरी व्यवसाय में इसकी मांग बढ़ रही है। लेकिन बाजार में नकली या क्रॉस नस्लें भी मिलती हैं, जो नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञों के अनुसार असली मुर्रा की सही पहचान बेहद जरूरी है।
मुर्रा भैंस असली है या नकली, कैसे करें पहचान? (तस्वीर-istock)
Murra Bhains : किसान और पशुपालक ऐसी नस्ल के पशु पालना चाहते हैं, जो ज्यादा दूध दें और मुनाफा भी बढ़ाएं। इसी कारण मुर्रा भैंस सबसे अधिक पसंद की जाने वाली नस्ल बन चुकी है। इसकी दूध उत्पादन क्षमता बेहद अच्छी होती है, जिसके कारण डेयरी बिजनेस करने वालों के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन बाजार में नकली या क्रॉस नस्ल की भैंसें भी मिल जाती हैं, जिन्हें असली मुर्रा बताकर बेच दिया जाता है। इससे किसान को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसलिए सही नस्ल की पहचान होना बहुत जरूरी है। एक्सपर्ट के मुताबिक मुर्रा भैंस की पहचान और उसके फायदे के बारे में उपयोगी जानकारी शेयर की है।
मुर्रा भैंस क्यों है किसानों की पहली पसंद?
भारत में गाय और भैंस का पालन बड़े पैमाने पर किया जाता है, लेकिन इनमें मुर्रा भैंस खास जगह रखती है। यह भैंस कीमत में जरूर महंगी होती है, लेकिन इससे मिलने वाला दूध और उसकी गुणवत्ता किसान के खर्च की भरपाई कर देती है। मुर्रा भैंस का दूध न केवल ज्यादा मात्रा में मिलता है, बल्कि उसका फैट लेवल भी अधिक होता है, जिससे दूध की कीमत बेहतर मिलती है। यही वजह है कि डेयरी उद्योग से जुड़े लोग मुर्रा नस्ल को प्राथमिकता देते हैं।
अधिक दूध उत्पादन इसकी सबसे बड़ी ताकत
मुर्रा भैंस की सबसे खास बात इसका दूध उत्पादन है। यह एक दिन में करीब 20 से 25 लीटर तक दूध दे सकती है, जो साधारण भैंसों की तुलना में काफी ज्यादा है। अधिक दूध मिलने से किसान की आमदनी बढ़ती है और डेयरी बिजनेस फलता फूलता है। इसके दूध में फैट की मात्रा भी अच्छी रहती है, जिसके कारण दूध और उससे बनने वाले उत्पादों को बाजार में अधिक मूल्य मिलता है।
कम देखभाल में स्वस्थ रहने वाली नस्ल
मुर्रा भैंस की एक और खासियत यह है कि यह अन्य नस्लों की तुलना में ज्यादा मजबूत होती है और बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी बेहतर होती है। इसकी देखभाल बहुत कठिन नहीं होती, इसलिए नए किसान भी बिना अधिक परेशानी के इसे पाल सकते हैं। मजबूती और अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता होने के कारण इसकी मृत्यु दर कम होती है, जिससे नुकसान की संभावना भी घटती है।
असली मुर्रा भैंस की पहचान कैसे करें?
किसी भी किसान के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण बात है कि वह असली मुर्रा भैंस की सही पहचान कर सके। इसके लिए शरीर की बनावट, रंग और खासकर सींग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
रंग और शरीर की बनावट
मुर्रा भैंस का रंग पूरी तरह से गहरा काला होता है। केवल पूंछ के बिलकुल नीचे हल्का सफेद रंग दिखाई दे सकता है। इसका शरीर मजबूत, भारी और गठीला होता है। वजन आमतौर पर 700 से 1000 किलो तक हो सकता है।
सिर और गर्दन
सिर छोटा और चेहरा नुकीला होता है। गर्दन लंबी और पतली होती है, जो इस नस्ल को एक आकर्षक बनावट देती है।
सींग इसकी सबसे खास पहचान
मुर्रा भैंस के सींग छोटे, मोटे और कसकर मुड़े हुए होते हैं। इनका आकार जलेबी या पेंच जैसा लगता है। सींग माथे से निकलकर पीछे की ओर मुड़कर कान के पास दिखाई देते हैं। यह पहचान बाजार में मिलावटी नस्लों से इसे अलग बनाती है।
पूंछ और थन
पूंछ लंबी होती है और घुटनों से नीचे तक जाती है। पूंछ के सिरे पर सफेद बालों का गुच्छा हो सकता है, लेकिन यह केवल नीचे के हिस्से में ही होना चाहिए। थन चारों ओर समान दूरी पर होते हैं और आकार में मोटे व शंक्वाकार दिखाई देते हैं।
मुर्रा भैंस डेयरी बिजनेस का मजबूत आधार
अगर किसान सही पहचान के साथ असली मुर्रा भैंस खरीदता है, तो यह उसके डेयरी बिजनेस को एक नई ऊंचाई दे सकती है। ज्यादा दूध, उचित फैट लेवल, कम बीमारियां और बेहतर आय ये सभी बातें मुर्रा भैंस को सबसे सफल और भरोसेमंद नस्ल बनाती हैं। इसलिए खरीदारी करते समय उसकी नस्ल की पहचान जरूर करें और किसी एक्सपर्ट की सलाह लेना न भूलें।