Kisan Ki Khabren : फॉस्फोरस (Phosphorus) पौधों के लिए एक बेहद जरूरी खनिज है, जो उनकी बढ़वार, फूल और फल बनाने की क्षमता को मजबूत करता है। यह मिट्टी में पाया जाता है और पौधे इसे अपनी जड़ों के जरिए ग्रहण करते हैं। लेकिन अगर मिट्टी में फॉस्फोरस की कमी हो जाए तो पौधे कमजोर हो जाते हैं, उनकी वृद्धि धीमी हो जाती है और उत्पादन भी कम हो जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, फॉस्फोरस पौधों में ऊर्जा बनाने और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इसकी सही मात्रा मिट्टी में होना जरूरी है।
मिट्टी की जांच सबसे पहला कदम
किसी भी सुधार से पहले मिट्टी की जांच (Soil Test) कराना जरूरी है। इससे पता चलता है कि मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्व कम हैं। अगर रिपोर्ट में फॉस्फोरस की कमी पाई जाती है, तो उसे पूरा करने के लिए सही उपाय अपनाने चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ फॉस्फोरस पर ध्यान देना काफी नहीं है, बल्कि मिट्टी की पूरी स्थिति देखनी चाहिए।
मिट्टी का सही पीएच स्तर जरूरी
फसलों की अच्छी बढ़वार के लिए मिट्टी का पीएच स्तर 5.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। अगर मिट्टी बहुत ज्यादा अम्लीय (Acidic) हो जाती है, तो पौधे फॉस्फोरस को सही तरीके से नहीं ले पाते। इसलिए पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मिट्टी का पीएच संतुलित हो, तभी खाद और पोषक तत्व सही तरीके से काम करेंगे।
रासायनिक खाद से तुरंत लाभ
एक्सपर्ट्स के मुताबिक फॉस्फोरस की कमी को जल्दी पूरा करने के लिए किसान बाजार में मिलने वाली NPK (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम) खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे अगर 10-20-10 NPK खाद का उपयोग किया जाए, तो इसमें फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है। इससे पौधों को तुरंत पोषण मिलता है और उनकी बढ़वार तेज होती है।
गोबर और पशु खाद का उपयोग
प्राकृतिक तरीके से फॉस्फोरस बढ़ाने के लिए गाय या मुर्गी के गोबर से बनी कंपोस्ट बहुत उपयोगी होती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक कि मुर्गी और गाय का गोबर फॉस्फोरस से भरपूर होता है। लेकिन ध्यान रहे कि इसे पूरी तरह सड़ा (composted) हुआ होना चाहिए, वरना मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ सकती है।
धीरे-धीरे असर करने वाला उपाय
रॉक फॉस्फेट एक प्राकृतिक खनिज है, जिसे पीसकर मिट्टी में मिलाया जाता है। यह धीरे-धीरे काम करता है और लंबे समय तक फॉस्फोरस उपलब्ध कराता है। इसे पौधों की जड़ों के पास मिट्टी में मिलाया जाता है ताकि पोषक तत्व धीरे-धीरे पौधों तक पहुंचते रहें।
फिश इमल्शन से तुरंत पोषण
अगर जल्दी असर चाहिए तो फिश इमल्शन (मछली से बनी तरल खाद) का उपयोग किया जा सकता है। इसे पानी में मिलाकर पौधों की जड़ों के पास डाला जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह तेजी से काम करता है और पौधों को तुरंत ऊर्जा देता है, लेकिन इसकी तेज गंध जानवरों को आकर्षित कर सकती है, इसलिए सावधानी जरूरी है।
धीमी लेकिन असरदार खाद
बोन मील यानी जानवरों की हड्डियों से बनी पाउडर खाद भी फॉस्फोरस का अच्छा स्रोत है। इसमें कैल्शियम भी पाया जाता है, जो पौधों की जड़ों को मजबूत बनाता है। इसे पौधे लगाने से पहले या बाद में मिट्टी में मिलाया जा सकता है। यह धीरे-धीरे पोषण देता है और लंबे समय तक असर करता है।
फॉस्फोरस पौधों की सेहत और उत्पादन के लिए बेहद जरूरी तत्व है। मिट्टी की जांच, सही पीएच संतुलन और उपयुक्त खादों का उपयोग करके इसकी कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है। सही देखभाल से किसान बेहतर फसल और अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
