Urea Import: चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले आठ महीनों में भारत का यूरिया आयात तेजी से बढ़ा है। घरेलू उत्पादन में कमी के कारण देश को किसानों की जरूरतें पूरी करने के लिए विदेशी आपूर्ति पर अधिक निर्भर होना पड़ रहा है। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से नवंबर 2024-25 के दौरान भारत ने 71.7 लाख टन यूरिया का आयात किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 32.6 लाख टन था। यानी यूरिया आयात में 120 प्रतिशत से भी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
घरेलू उत्पादन में कमी और बिक्री में बढ़ोतरी
आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच घरेलू यूरिया उत्पादन में 3.7 प्रतिशत की गिरावट आई और यह घटकर 1.97 करोड़ टन रह गया। इसके उलट, किसानों द्वारा यूरिया की मांग बढ़ी है। इस दौरान कुल यूरिया बिक्री 2.3 प्रतिशत बढ़कर 2.54 करोड़ टन तक पहुंच गई। उत्पादन कम होने और मांग बढ़ने की वजह से आयात बढ़ाना जरूरी हो गया।
एफएआई का बयान और आपूर्ति प्रबंधन
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक एफएआई के चेयरमैन एस. शंकर सुब्रमण्यम ने कहा कि बेहतर योजना के कारण बिक्री में वृद्धि संभव हो पाई, लेकिन यूरिया और डीएपी जैसे उर्वरकों के लिए आयात पर बढ़ती निर्भरता यह दिखाती है कि आपूर्ति श्रृंखला का रणनीतिक प्रबंधन कितना जरूरी है। उन्होंने माना कि विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता एक बड़ी चुनौती बन रही है।
नवंबर में आयात और बिक्री की स्थिति
नवंबर महीने में यूरिया आयात में और तेज बढ़ोतरी देखी गई। इस महीने आयात 68.4 प्रतिशत बढ़कर 13.1 लाख टन हो गया, जबकि नवंबर 2024 में यह 7.8 लाख टन था। इसी दौरान यूरिया की बिक्री भी 4.8 प्रतिशत बढ़कर 37.5 लाख टन पहुंच गई। यह साफ दिखाता है कि खेती के मौसम में यूरिया की मांग लगातार बनी हुई है।
डीएपी पर बढ़ती आयात निर्भरता
सिर्फ यूरिया ही नहीं, बल्कि एक और महत्वपूर्ण उर्वरक डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) में भी आयात पर निर्भरता बढ़ रही है। वर्तमान में डीएपी की कुल आपूर्ति का 67 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा हो रहा है, जबकि पिछले वर्ष यह 56 प्रतिशत था। अप्रैल से नवंबर 2025-26 के दौरान डीएपी की बिक्री 71.2 लाख टन पर स्थिर रही।
डीएपी के घरेलू उत्पादन में गिरावट
डीएपी के घरेलू उत्पादन में भी कमी आई है। इस अवधि में उत्पादन 5.2 प्रतिशत घटकर 26.8 लाख टन रह गया। उत्पादन घटने और मांग बने रहने के कारण डीएपी के लिए भी विदेशों से आयात बढ़ाना पड़ा।
एफएआई महानिदेशक की राय
एफएआई के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने कहा कि इन आंकड़ों से दो अहम बातें सामने आती हैं। पहली, नाइट्रोजन और फॉस्फेट जैसे पोषक तत्वों के लिए भारत अब संरचनात्मक रूप से आयात आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। दूसरी, स्वदेशी फॉस्फेट उर्वरक जैसे सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) का प्रदर्शन बेहतर रहा है, जिसकी बिक्री में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
संतुलित रणनीति और भविष्य की योजना
डॉ. चौधरी ने कहा कि यह एक संतुलित रणनीति का संकेत है। एक तरफ जरूरी पोषक तत्वों की उपलब्धता के लिए योजनाबद्ध आयात किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के भीतर फॉस्फेट उत्पादन को मजबूत किया जा रहा है। भविष्य में एफएआई डेटा आधारित योजना, उर्वरकों के विविध उपयोग और सतत कृषि को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
यूरिया पर सब्सिडी और कीमत नियंत्रण
केंद्र सरकार किसानों को राहत देने के लिए यूरिया पर भारी सब्सिडी देती है। एक नवंबर 2012 से यूरिया की कीमत 45 किलो के एक बोरे के लिए 242 रुपये तय है, जिसमें नीम कोटिंग शुल्क और कर शामिल नहीं हैं। नई यूरिया नीति के तहत यूरिया को नियंत्रित वस्तु माना गया है और इसे फॉस्फेटिक उर्वरकों की तुलना में कहीं ज्यादा सब्सिडी मिलती है। यही वजह है कि किसानों में यूरिया की मांग लगातार बनी हुई है।
