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Rice Export: 172 देशों में ‘मेड इन इंडिया’ चावल की गूंज, निर्यात में बंपर बढ़ोतरी की उम्मीद, टूटेंगे सारे रिकॉर्ड!

Rice Export: कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) चेयरमैन अभिषेक देव ने कहा कि विदेशी बाजारों से मजबूत मांग के चलते चालू वित्त वर्ष में भारत का चावल निर्यात मात्रा के लिहाज से 10% से अधिक बढ़ने की संभावना है।

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भारत का चावल बनेगा ग्लोबल सुपरस्टार, निर्यात में जबरदस्त उछाल आने वाला है! (तस्वीर-istock)

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Rice Export : कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के चेयरमैन अभिषेक देव ने गुरुवार को कहा कि विदेशी बाजारों से मजबूत मांग के चलते चालू वित्त वर्ष में भारत का चावल निर्यात मात्रा के लिहाज से 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ने की संभावना है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 2.01 करोड़ टन चावल का 12.95 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात किया, जो 172 से अधिक देशों को भेजा गया।

भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन 2025

देव नई दिल्ली में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (BIRC) 2025 के अवसर पर बोल रहे थे। यह सम्मेलन भारत मंडपम में दो दिवसीय कार्यक्रम के रूप में शुरू हुआ। इसका आयोजन भारतीय चावल निर्यातक संघ (IREF) द्वारा किया जा रहा है, जबकि APEDA ने इस आयोजन को गैर-वित्तीय सहायता प्रदान की है।

मूल्य के लिहाज से भी बढ़ेगा निर्यात

अभिषेक देव ने कहा कि न केवल मात्रा बल्कि मूल्य के आधार पर भी चावल निर्यात में वृद्धि की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि सितंबर में चावल का निर्यात 33.18 प्रतिशत बढ़कर 92.5 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया, जबकि अप्रैल–सितंबर की अवधि में यह 10 प्रतिशत बढ़कर 5.63 अरब डॉलर हो गया।

नए बाजारों पर फोकस

न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक APEDA चेयरमैन ने बताया कि सरकार ने 26 देशों की पहचान की है जो वर्तमान में भारत से बहुत कम मात्रा में चावल आयात करते हैं। इन देशों, जिनमें फिलिपीन भी शामिल है, में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। देव ने कहा कि हम भारतीय चावल की विभिन्न किस्मों को बढ़ावा देने के लिए इन 26 देशों में एक प्रतिनिधिमंडल भेज रहे हैं।

चावल आधारित उत्पादों के निर्यात पर जोर

उन्होंने यह भी कहा कि केवल चावल ही नहीं, बल्कि चावल आधारित प्रसंस्कृत उत्पादों जैसे राइस क्रैकर्स आदि के निर्यात को भी बढ़ाने की जरूरत है।

सम्मेलन में 10,000 से अधिक प्रतिनिधि

आईआरईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने बताया कि इन 26 देशों के व्यापार प्रतिनिधियों को सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है, जहां भारत अपनी विभिन्न चावल किस्मों का प्रदर्शन कर रहा है। इस वैश्विक आयोजन में करीब 10,000 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, जिनमें उत्पादक, निर्यातक, आयातक, नीति निर्माता, वित्तपोषक, लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ, अनुसंधान संस्थान और अन्य सेवा प्रदाता शामिल हैं।

भारत की उत्पादन क्षमता

भारत विश्व के सबसे बड़े चावल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश ने लगभग 4.7 करोड़ हेक्टेयर भूमि से करीब 15 करोड़ टन चावल का उत्पादन किया, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 28 प्रतिशत है। उन्नत बीज किस्मों, बेहतर कृषि तकनीकों और विस्तारित सिंचाई सुविधाओं की बदौलत भारत की औसत पैदावार 2014-15 के 2.72 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में लगभग 3.2 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है।

भारत की बढ़ती उत्पादन क्षमता, विविध चावल किस्में, और नए वैश्विक बाजारों में विस्तार की रणनीति से आने वाले वर्षों में भारत की चावल निर्यात क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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