Green Chilli Farming : भारतीय रसोई में हरी मिर्च का इस्तेमाल करीब हर दिन होता है। सब्जी का तड़का हो, चटनी बनानी हो या पकौड़ों का स्वाद बढ़ाना हो, हरी मिर्च हर खाने का जरूरी हिस्सा बन चुकी है। यही कारण है कि इसकी मांग सालभर बनी रहती है। अच्छी बात यह है कि हरी मिर्च की खेती (chilli cultivation) करने के लिए बड़े खेत की जरूरत नहीं होती। किसान चाहें तो कम जगह में भी इसकी खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। घर की छत, बालकनी या छोटे खेत में भी इसे आसानी से उगाया जा सकता है।
अच्छे बीज का चुनाव है सबसे जरूरी
हरी मिर्च की अच्छी पैदावार के लिए सबसे पहले सही और स्वस्थ बीज का चुनाव करना जरूरी है। किसान बीज बाजार से खरीद सकते हैं या फिर पकी हुई लाल मिर्च से भी बीज तैयार कर सकते हैं। पूरी तरह पकी हुई मिर्च के बीज ज्यादा मजबूत होते हैं और जल्दी अंकुरित होते हैं। बीज निकालने के बाद उन्हें एक दिन तक छांव में सुखाना चाहिए। इससे बीज खराब नहीं होते और पौधे जल्दी निकलते हैं।
हल्की और भुरभुरी मिट्टी में करें बुवाई
हरी मिर्च के पौधों को ऐसी मिट्टी पसंद होती है जिसमें पानी जमा न हो। इसलिए खेत या गमले की मिट्टी हल्की और भुरभुरी होनी चाहिए। बीज को करीब आधा सेंटीमीटर गहराई में बोना चाहिए और ऊपर से हल्की मिट्टी डाल देनी चाहिए। इसके बाद हल्का पानी देना जरूरी होता है। मिट्टी में नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन ज्यादा पानी नहीं होना चाहिए। सही तापमान मिलने पर बीज 7 से 14 दिनों के भीतर अंकुरित होने लगते हैं।
पौध तैयार होने पर बड़े गमले या खेत में लगाएं
जब पौधों में कुछ पत्तियां निकल आएं और उनकी लंबाई कुछ सेंटीमीटर हो जाए, तब उन्हें बड़े गमले या खेत में लगा देना चाहिए। ध्यान रखें कि गमले में नीचे छेद जरूर हो ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके। हरी मिर्च के पौधों को रोज कम से कम 6 घंटे धूप की जरूरत होती है। पर्याप्त धूप मिलने से पौधे मजबूत बनते हैं और अधिक मिर्च लगती है।
धीरे-धीरे धूप में रखें पौधे
अगर पौधे शुरुआत में घर के अंदर तैयार किए गए हैं तो उन्हें सीधे तेज धूप में नहीं रखना चाहिए। इससे पौधों को नुकसान हो सकता है। पहले कुछ घंटों के लिए बाहर रखें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। इससे पौधे मौसम के अनुसार खुद को आसानी से ढाल लेते हैं और तेजी से बढ़ते हैं।
जरुरत के अनुसार ही करें सिंचाई
हरी मिर्च की खेती में सबसे बड़ी गलती ज्यादा पानी देना माना जाता है। पौधों को केवल उतना ही पानी देना चाहिए जितनी जरूरत हो। मिट्टी की ऊपरी सतह सूखी लगे तभी सिंचाई करनी चाहिए। गर्मियों में गमले वाले पौधों को ज्यादा पानी की जरूरत पड़ सकती है। मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए सूखे पत्ते या कोकोपीट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
फूल आने पर दें सही खाद
जब पौधों में छोटे सफेद फूल आने लगते हैं, तब उन्हें अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है। इस समय जैविक खाद, वर्मीकंपोस्ट या तरल खाद देना फायदेमंद रहता है। पोटाश वाली खाद मिर्च की अच्छी पैदावार में मदद करती है। हालांकि ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद देने से पौधों में पत्तियां ज्यादा आती हैं लेकिन मिर्च कम लगती है। इसलिए संतुलित खाद का इस्तेमाल जरूरी है।
कीट और बीमारियों से करें बचाव
हरी मिर्च के पौधों पर कई बार माहू और सफेद मक्खी जैसे कीट लग जाते हैं। खासतौर पर बरसात और उमस वाले मौसम में यह समस्या बढ़ जाती है। किसानों को समय-समय पर पौधों की पत्तियों की जांच करनी चाहिए। नीम के तेल का छिड़काव करने से कीटों से काफी हद तक बचाव हो सकता है। साथ ही पौधों को खुली हवा और अच्छी धूप मिलती रहे तो फंगल रोग भी कम लगते हैं।
समय पर तोड़ाई से बढ़ता है उत्पादन
हरी मिर्च की फसल आमतौर पर रोपाई के 2 से 3 महीने बाद तैयार होने लगती है। जब मिर्च हरी, चमकदार और मजबूत दिखाई दे तब उसकी तुड़ाई करनी चाहिए। समय-समय पर मिर्च तोड़ते रहने से पौधे में नए फूल आते हैं और उत्पादन लगातार बढ़ता रहता है। सही देखभाल के साथ किसान हरी मिर्च की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं।
