Moong Dal Farming : गर्मी के मौसम में जहां कई फसलों की खेती करना मुश्किल हो जाता है, वहीं मूंग दाल किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है। यह फसल कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है और बहुत कम समय में तैयार हो जाती है। खास बात यह है कि मूंग की खेती (moong cultivation) छोटे खेत से लेकर बड़े रकबे तक आसानी से की जा सकती है। अगर किसान शुरुआत में सही तरीके से तैयारी कर लें, तो केवल 60 से 70 दिनों में अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं।
सही समय और धूप वाली जगह का करें चयन
मूंग दाल की बुवाई ऐसे समय करनी चाहिए जब तापमान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच हो। भारत के ज्यादातर इलाकों में गर्मी की शुरुआत से लेकर मध्य गर्मी तक का समय इसकी खेती के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। खेत ऐसी जगह होना चाहिए जहां रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप आती हो। इसके अलावा खेत की मिट्टी में पानी रुकना नहीं चाहिए। जहां पानी ज्यादा जमा होता है वहां पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं। इसलिए अच्छी जल निकासी वाली जमीन का चयन करना जरूरी है।
मिट्टी को भुरभुरी और उपजाऊ बनाएं
बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करें। मिट्टी को करीब 15 से 20 सेंटीमीटर गहराई तक पलटें ताकि पौधों की जड़ें आसानी से फैल सकें। खेत से खरपतवार, पत्थर और पुरानी फसल के अवशेष निकाल दें। इसके बाद मिट्टी में सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाएं। ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद डालने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि मूंग का पौधा खुद भी मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद करता है। खेती के लिए हल्की और भुरभुरी मिट्टी सबसे बेहतर रहती है।
सही दूरी और गहराई पर करें बुवाई
मूंग की खेती में पौधों को कहीं और तैयार करके लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं। बीज को 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई में बोना चाहिए। एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच 10 से 15 सेंटीमीटर की दूरी रखें। वहीं कतारों के बीच लगभग 25 से 30 सेंटीमीटर का फासला होना चाहिए। बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करें ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे। सामान्य तौर पर 4 से 7 दिनों के भीतर बीज अंकुरित हो जाते हैं।
कम पानी में भी होती है अच्छी पैदावार
मूंग दाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे दूसरी फसलों की तुलना में कम पानी की जरूरत होती है। गर्मी के मौसम में हर 3 से 4 दिन में हल्की सिंचाई काफी रहती है। सिंचाई करने से पहले मिट्टी की नमी जरूर जांच लें। अगर मिट्टी में पहले से हल्की नमी हो तो पानी देने की जरूरत नहीं है। ज्यादा पानी देने से जड़ सड़ने की समस्या हो सकती है और फलियां भी कम लगती हैं। फूल आने और फलियां बनने के समय सिंचाई थोड़ी कम कर देनी चाहिए।
शुरुआती दिनों में खरपतवार पर रखें नजर
फसल के शुरुआती 2 से 3 हफ्ते बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान खेत में उगने वाली घास और खरपतवार को समय-समय पर हटाना जरूरी है ताकि पौधों को पूरा पोषण और धूप मिल सके। एक या दो बार हाथ से निराई-गुड़ाई करने से फसल का विकास बेहतर होता है। बाद में जब पौधे फैल जाते हैं तो खरपतवार अपने आप कम होने लगते हैं। करीब 30 से 40 दिनों में पौधों पर फूल आने लगते हैं और इसके बाद फलियां बनना शुरू हो जाती हैं।
सही समय पर करें कटाई
मूंग की फसल आमतौर पर 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है। जब ज्यादातर फलियां भूरी और सूखी दिखाई देने लगें, तब कटाई करनी चाहिए। किसान चाहें तो फलियां तोड़ सकते हैं या पूरा पौधा उखाड़ सकते हैं। कटाई के बाद फसल को 2 से 3 दिन तक धूप में अच्छी तरह सुखाना जरूरी है। इसके बाद दानों को अलग किया जाता है। समय पर कटाई करने से फलियां फटने और दाने गिरने का नुकसान कम होता है।
मिट्टी की सेहत भी सुधारती है मूंग
मूंग दाल सिर्फ कमाई का अच्छा जरिया ही नहीं है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करती है। यह फसल मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाती है, जिससे अगली फसल को भी फायदा मिलता है। कम लागत, कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए गर्मी के मौसम में एक बेहतर विकल्प बन सकती है।
