Sugarcane Farmer Living Standard: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने सोमवार को कहा कि गन्ने की खेती में कृत्रिम मेधा (AI) का उपयोग क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बदल सकता है और किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठा सकता है। यह बात उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे, और सहकारिता मंत्री बालासाहेब पाटिल की उपस्थिति में एक कार्यक्रम के दौरान कही। इस कार्यक्रम का विषय था — “गन्ना, चावल और बागवानी फसलों में एआई का उपयोग”।
AI को किसानों तक पहुंचाने के लिए MoU पर हस्ताक्षर
AI तकनीक को किसानों तक व्यापक रूप से पहुंचाने के लिए वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (VSI) और कृषि विकास ट्रस्ट के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
चीनी मिलों को गन्ना आपूर्ति की कमी एक बड़ी चुनौती
पवार ने कहा कि चीनी मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल रहा, जिससे मिलों का पेराई सत्र सिर्फ 100 दिन या उससे कम ही चल पाता है। इसके चलते फैक्ट्री मशीनों का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता और मिलों की वित्तीय लाभप्रदता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
प्रति एकड़ उपज बढ़ाने में AI की अहम भूमिका
इस समस्या का समाधान बताते हुए पवार ने कहा कि हमें प्रति एकड़ उपज बढ़ानी होगी और इसमें AI महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। गन्ने की पैदावार बढ़ाकर चीनी और एथनॉल जैसे उप-उत्पादों का उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है। AI गन्ना अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने और किसानों को बेहतर आमदनी देने में मदद करेगा।”
गन्ने के लिए गेम-चेंजर साबित होगा AI
पवार ने कहा कि AI सभी फसलों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन गन्ने की खेती में यह गेम-चेंजर साबित होगा। उन्होंने बताया कि कृषि विकास ट्रस्ट ने इस दिशा में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की मदद से एक विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की है।
चीनी मिलों के कृषि विभाग को सुधारने की जरूरत
पवार ने यह भी कहा कि अधिकतर चीनी मिलों के कृषि अधिकारी केवल बुवाई, कटाई और परिवहन पर ध्यान देते हैं, जबकि उन्हें यह देखना चाहिए कि गन्ना कैसे उगता है, उसकी गुणवत्ता कैसे बढ़े, और चीनी की रिकवरी दर में सुधार कैसे हो। उन्होंने सभी सहकारी चीनी मिलों से आग्रह किया कि वे अपने कृषि विभागों को मजबूत करें, और जरूरत पड़ने पर VSI आवश्यक प्रशिक्षण देने को तैयार है। (इनपुट भाषा)
