SARAS Aajeevika Mela: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय सरस (एसएआरएएस) आजीविका मेले में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों और ग्रामीण उत्पादकों के लिए वैज्ञानिक खेती से जुड़ी कई व्यावहारिक वर्कशॉप्स का आयोजन करेगा। इन वर्कशॉप्स का उद्देश्य किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी देना है, ताकि वे कम लागत में बेहतर उत्पादन कर सकें और अपनी आय बढ़ा सकें।
जैविक प्रमाणीकरण पर विशेष सत्र
मेले के पहले दिन एसएचजी किसानों के लिए भागीदारी गारंटी प्रणाली (पीजीएस) रिजस्ट्रेशन पर एक स्पेशल वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। इस सत्र में किसानों को जैविक खेती के लिए जरूरी प्रमाणन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। इसमें यह समझाया जाएगा कि जैविक प्रमाणीकरण कैसे प्राप्त किया जाता है, इसके लिए किन-किन दस्तावेजों की जरूरत होती है और समूह के रूप में प्रमाणीकरण की प्रक्रिया क्या है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक वर्कशॉप में यह भी बताया जाएगा कि जैविक प्रमाणन की लागत कितनी होती है और इसके लिए सरकार की ओर से किस तरह की आर्थिक मदद उपलब्ध है। अधिकारियों के अनुसार, इस सत्र का मकसद एसएचजी किसानों को कम खर्च में जैविक प्रमाणन दिलाने में मदद करना है, ताकि उनके उत्पादों को बाजार में बेहतर पहचान और ऊंची कीमत मिल सके। जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में यह प्रशिक्षण किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
मिट्टी जांच और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर प्रशिक्षण
मेले के दूसरे दिन मिट्टी परीक्षण और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर एक व्यावहारिक कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस सत्र में किसानों को मिट्टी के सही तरीके से नमूने लेने की प्रक्रिया सिखाई जाएगी। साथ ही यह बताया जाएगा कि मिट्टी की जांच कैसे की जाती है और उसकी रिपोर्ट को कैसे समझा जाता है। किसानों को मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसानों को यह पता चलता है कि उनकी जमीन में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी या अधिकता है। इसके आधार पर वे सही मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे अनावश्यक खाद पर होने वाला खर्च कम होगा और फसल की पैदावार भी बढ़ेगी। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक जानकारी देकर उनकी खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।
अंतर-मंत्रालयीय सहयोग की पहल
यह सभी वर्कशॉप सरस आजीविका मेले में एक व्यापक पहल का हिस्सा हैं, जिसकी अगुवाई ग्रामीण विकास मंत्रालय कर रहा है। विभिन्न मंत्रालय मिलकर स्वयं सहायता समूहों से जुड़े परिवारों की आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। बेहतर खेती के तरीके, जैविक प्रमाणीकरण और तकनीकी जानकारी के जरिए ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
पशुपालन और डेयरी पर भी मिलेगा प्रशिक्षण
23 फरवरी को पशुपालन और डेयरी विभाग की ओर से एसएचजी सदस्यों के लिए वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस सत्र में पशुओं की बेहतर देखभाल, संतुलित चारे की योजना और डेयरी व पोल्ट्री व्यवसाय में मूल्यवर्धन के तरीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन आधारित आय बढ़ाने के लिए जरूरी कौशल देना है।
28 राज्यों की 900 से अधिक महिला उद्यमियों की भागीदारी
इस सरस आजीविका मेले में देश के 28 राज्यों से 900 से ज्यादा महिला उद्यमी हिस्सा ले रही हैं। ये सभी महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं और अपने-अपने राज्यों के उत्पादों को प्रदर्शित कर रही हैं। मेले के जरिए उन्हें अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार और नए ग्राहक मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह मेला सिर्फ उत्पादों की बिक्री का मंच नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं और किसानों को नई तकनीक, बेहतर प्रबंधन और बाजार से जुड़ने के अवसर प्रदान करने का एक बड़ा प्रयास है। वैज्ञानिक खेती और पशुपालन से जुड़ी ये कार्यशालाएं स्वयं सहायता समूहों की आर्थिक मजबूती की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती हैं।
