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इजराइल-हमास के बीच छिड़े युद्ध में क्यों कूदा हिजबुल्लाह? जानें पुरानी दुश्मनी का इतिहास

Israel-Palestine Conflict Update: हिजबुल्लाह ने विवादित क्षेत्र में इजराइली ठिकानों पर गोलाबारी की। मतलब ये कि इजराइल-हमास के बीच छिड़े युद्ध में अब हिजबुल्लाह भी कूद गया है। साल 2006 में इजराइल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ खूनी युद्ध लड़ा था। इजराइल और हिजबुल्लाह की दुश्मनी काफी पुरानी है, आपको इसका इतिहास बताते हैं।

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इजराइल-हमास युद्ध में अब हिजबुल्लाह की दखल।

Photo : AP

Hezbollah vs Israel: इजराइल ये बार-बार कहता रहा है कि लेबनान के आतंकवादी समूह 'हिजबुल्लाह' और सैन्य शाखा वाले इस्लामिक संगठन 'हमास' को ईरान से समर्थन मिलता है। इजराइल-हमास के बीच छिड़े युद्ध में अब हिजबुल्लाह भी कूद गया है। लेबनान के आतंकवादी समूह हिजबुल्लाह ने सीरिया में इजराइल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स के साथ लगती देश की सीमा पर एक विवादित इलाके में इजराइल के तीन ठिकानों पर रविवार को कई रॉकेट दागे और गोलाबारी की। आपको इजराइल और हिजबुल्लाह की दुश्मनी का इतिहास बताते हैं।

हिजबुल्लाह और इजराइल की दुश्मनी का इतिहास

लेबनानी संगठन हिजबुल्लाह अब तक इजराइल का दुश्मन बना हुआ है। हालांकि ये दुश्मनी काफी पुरानी है। बात साल 2006 की है, जब हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल ने खूनी जंग लड़ी थी। उस युद्ध में लेबनान में 1200 लोगों की मौत हो गई थी। मरनो वालों की लिस्ट में 160 इजराइली सैनिकों का भी नाम शामिल था। दरअसल इसकी शुरुआत कुछ इस तरह हुई कि इसी साल 2 इजराइली सैनिकों को हिजबुल्लाह ने उठा लिया और उससे बदले में अपने 3 साथियों को रिहा करने की मांग की। इजराइल ने हिजबुल्लाह की इस सौदे को अपनी बेइज्जती माना और उसने लेबनान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया।

और आखिरकार युद्ध में इजराइल की हुई हार

जब युद्ध शुरू हुआ तो इजराइल ने ये दावा किया कि 1 या 2 दिन में लेबनान में से हिजबुल्लाह का खात्मा कर दिया जाएगा, मगर 33 दिनों तक चले इस युद्ध के बाद दोनों देशों ने अपनी-अपनी जीत की बात कही, लेकिन बाद में इजराइल ने अपनी हार स्वीकार कर ली थी। इस युद्ध में 1200 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें करीब 160 इजराइली सैनिक, करीब 50 इजराइली नागरिक, करीब 200 हिजबुल्लाह लड़ाके और लगभग 900 लेबनानी नागरिक मारे गए थे। इसी युद्ध के बाद हिजबुल्लाह एक नई ताकत के रूप में जाना गया।

इजराइल के खिलाफ हिजबुल्लाह ने फिर खोला मोर्चा

अब इजराइल-हमास के बीच छिड़े युद्ध हिजबुल्लाह ने भी हमले शुरू कर दिए हैं। हिजबुल्लाह ने एक बयान में कहा कि 'फिलिस्तीनी विरोध' के साथ एकजुटता जताने के लिए 'बड़ी संख्या में रॉकेट और विस्फोटकों' का इस्तेमाल कर यह हमला किया गया। उसने बताया कि इजराइली ठिकानों को सीधे निशाना बनाया गया। इजराइली सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए लेबनानी इलाकों में गोलाबारी की, लेकिन अभी हताहतों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

इजराइली सेना ने बताया कि उसने उन इलाकों में गोलाबारी की, जहां लेबनानी सीमा की ओर से हमले किए गए थे। इजराइल ने 1967 के पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान सीरिया से शीबा फार्म्स का नियंत्रण छीन लिया था, लेकिन लेबनान इस इलाके पर तथा नजदीकी फार चौबा पर्वतीय क्षेत्र पर अपना दावा जताता है। इजराइल ने 1981 में गोलन हाइट्स पर कब्जा जमाया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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