अमेरिका के एयर स्पेस में चीन का जासूसी गुब्बारा उड़ रहा है या चीन के मुताबिक मौसम की जानकारी के लिए भेजा गुब्बारा अपने रास्ते से भटक कर अमेरिकी एयर स्पेस में दाखिल हो गया। चीन ने जासूसी गुब्बारा होने से इनकार किया है। लेकिन अमेरिका का कहना है कि मोंटाना में न्यूक्लियर साइलोज हैं और इसके जरिए निगरानी की जा रही है। सवाल यह है कि अमेरिकी जब इतना सबकुछ जान रहा है कि तो गुब्बारे को क्यों नहीं मार गिराया गया। बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन चाहते थे कि गुब्बारे को गिरा दिया जाए। लेकिन पेंटागन के अधिकारियों ने नागरिक क्षति का हवाला देते हुए गिराने से मना कर दिया। इस विषय पर कुछ अमेरिकी एक्सपर्ट कह रहे हैं कि अब यह हिंडबर्ग तो है नहीं।
अमेरिका क्यों नहीं गिरा रहा स्पाई बैलून
अमेरिकी अधिकारियों ने सलाह देते हुए कहा कि ऐसा करने पर बड़े पैमाने पर नागरिकों को नुकसान हो सकता है। यह पता नहीं कि गुब्बारे का कौन सा मलबा कहां गिरेगा। इस तरह की सलाह के बाद जो बाइडेन प्रशासन ने गुब्बारे को गिराने का फैसला नहीं किया। चीन का कहना है कि गुब्बारा सिर्फ एक असैन्य एयरशिप है जिसका मकसद मौसमी गतिविधियों के बारे में जानकारी हासिल करना था। हवा की वजह से गुब्बारा रास्ता भटक कर यूएस की एयरस्पेस में दाखिल हुआ। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की घटना के लिए खेद है। जब गुब्बारे को गिराए जाने की बात आई तो जानकारों ने कहा कि चूंकि साइज और ऊंचाई ज्यादा है,लिहाजा शूट डाउन की वजह से मलबे के फैलने की आशंका मीलों तक है लिहाजा गुब्बारे को गिराना सही नहीं होगा।
गुब्बारे को गिराना इतना आसान नहीं
इसके अलावा जानकार कहते हैं कि इस तरह के गुब्बारों में हीलियम गैस भरी होती है। आप इसको इतनी आसानी से नहीं गिरा सकते। उन्होंने 6 मई 1937 के एक वाक्ये का जिक्र करते हुए कहा था कि एयरशिप में हाइड्रोजन गैस भरी हुई थी और शूट डाउन की कोशिश में 90 सेकेंड के अंदर भीषण आग लग गई। इसी तरह से 1998 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि किस तरह से एक गुब्बारे को गिराने के लिए कनाडियन एयरफोर्स ने एफ-18 का इस्तेमाल किया। करीब 20 मिलीमीटक वाले हजारों गोलियों को दागा गया और गुब्बारे को जमीन पर लाने में 6 दिन लग गए।
