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पृथ्वी पर कब लौटेंगी सुनीता विलियम्स? अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी पर इस दिन फैसला करेगा NASA

Sunita Williams News: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से सुनीता विलियम्स की धरती पर कब वापसी होगी? इसका फैसला अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा तो करना है। सुनिता समेत दो अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने के संबंध में नासा शनिवार को फैसला करेगा। आपको इससे जुड़ी कुछ खास और जरूरी बातें बताते हैं।

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अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स की कब तक हो सकती है वापसी?

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

When will Sunita Williams Return to Earth: अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ (NASA) इस सप्ताहांत में यह फैसला करेगी कि बोइंग का नया कैप्सूल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से सुनीता विलियम्स समेत उन दो अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी के लिए सुरक्षित है या नहीं, जो जून से पृथ्वी पर लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

बैठक में अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी पर होगा फैसला

नासा प्रशासक बिल नेल्सन और अन्य शीर्ष अधिकारी शनिवार को बैठक करेंगे जिसके बाद इस संबंध में घोषणा होने की संभावना है। अंतरिक्ष यात्रियों सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने पांच जून को बोइंग के स्टारलाइनर से अंतरिक्ष में उड़ान भरी थी। इस परीक्षण उड़ान के दौरान ‘थ्रस्टर’ में खराबी आ गई और ‘हीलियम’ रिसाव के कारण नासा ने कैप्सूल को स्टेशन पर ही खड़ा रखा और इंजीनियर इस बात पर विचार कर रहे हैं कि आगे क्या किया जाना चाहिए।

Sunita Williams

सुनीता विलियम्स

...तो पृथ्वी पर खाली ही लौट आएगा स्टारलाइनर

‘स्पेसएक्स’ अंतरिक्ष यात्रियों को वापस ला सकता है, लेकिन इसके लिए उन्हें अगले फरवरी तक वहां रहना पड़ेगा। उन्हें स्टेशन पर पहुंचने के एक या दो सप्ताह बाद वापस लौटना था। यदि नासा यह निर्णय लेता है कि ‘स्पेसएक्स’ से अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी ही उचित मार्ग है, तो स्टारलाइनर सितंबर में पृथ्वी पर खाली ही लौट आएगा।

NASA AP

बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स।

हर प्रकार के जोखिम का किया जाएगा विश्लेषण

नासा ने कहा कि इंजीनियर ‘स्टारलाइनर थ्रस्टर’ के लिए एक नए कंप्यूटर मॉडल का आकलन कर रहे हैं। नासा ने कहा कि अंतिम फैसला करते समय हर प्रकार के जोखिम का विश्लेषण किया जाएगा। बोइंग ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अंतरिक्ष और जमीन पर ‘थ्रस्टर’ के व्यापक परीक्षण से पता चला है कि स्टारलाइनर अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाने में सक्षम है।

यह बोइंग की पहली परीक्षण उड़ान थी जिसमें चालक दल सवार था। ‘स्पेस शटल’ के सेवा से हटने के बाद नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों की अंतरिक्ष स्टेशन पर आवाजाही का काम बोइंग और स्पेसएक्स को सौंपा है। ‘स्पेसएक्स’ 2020 से यह काम कर रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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