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अंगूठी, पेन, घड़ी के चक्कर में फंस गए इमरान, क्या नवाज शरीफ जैसा होगा हाल

  • Agency by: Agency
  • Updated Oct 21, 2022, 09:11 PM IST

Imran Khan And Toshkhana Case: इमरान खान पाकिस्तान के पहले पूर्व प्रधानमंत्री नहीं है, जिन पर चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। इसके पहले साल 2018 में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के चुनाव लड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। चुनाव आयोग के फैसले के बाद इमरान खान के पास अब न्यायालय की आस बची है।

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यह फोटो जनवरी 2019 की है। जब इमरान खान को 'गोल्ड कलाश्निकोव' का गिफ्ट सऊदी प्रिंस से मिला था।

Photo : Twitter
KEY HIGHLIGHTS
  • सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के सांसदों ने अगस्त 2022 में इमरान खान के खिलाफ पाकिस्तान के चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।
  • इमरान ने चुनाव आयोग को बताया था कि उन्होंने गिफ्ट्स को 2.15 करोड़ रुपए में खरीदा था और उसे बेचकर करीब 5.8 करोड़ रुपए मिले थे।
  • इसके पहले साल 2018 में चुनाव के नामांकन में गलत जानकारी देने के आरोप में नवाज शरीफ पर कार्यवाही हुई थी।

Imran Khan And Toshkhana Case: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) पर अगले 5 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस दौरान वह कोई भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। जाहिर है इस फैसले से इमरान खान के राजनीतिक करियर पर संकट मंडरा गया है। इमरान खान पर पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग ने तोशाखाना मामले पर कार्रवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। इमरान खान पर, प्रधानमंत्री रहते विदेशी नेताओं से प्राप्त उपहारों की बिक्री से हुई आय को छिपाने का आरोप था। इमरान खान पाकिस्तान (Pakistan) के पहले पूर्व प्रधानमंत्री नहीं है, जिन पर चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया गया है। इसके पहले साल 2018 में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (Nawaz Sharif) के चुनाव लड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था।

क्या है तोशखाना मामला (Toshkhana Case)

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के सांसदों ने अगस्त 2022 में इमरान खान के खिलाफ पाकिस्तान के चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें इमरान खान पर आरोप लगाया गया था कि तोशाखाने (देश का भंडार गृह) उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए विदेश से मिले गिफ्ट को बेच दिया था। और खरीदे गए उपहारों की बिक्री से हुई इनकम का खुलासा नहीं किया था। इमरान ने चुनाव आयोग को बताया था कि उन्होंने तोशाखाने से इन सभी गिफ्ट्स को 2.15 करोड़ रुपए में खरीदा था। इन्हें बेचकर उन्हें करीब 5.8 करोड़ रुपए मिले थे।

किन तोहफों को बेचा गया

इमरान खान ने इसके तहत ग्राफ कंपनी की एक घड़ी, एक कीमती पेन, एक अंगूठी और रॉलेक्स कंपनी की चार घड़ियां समेत अन्य कीमती चीजें शामिल बेचकर कमाई की। जबकि नियम के अनुसार अगर मिलने वाले गिफ्ट की कीमत 30 हजार रुपये से कम है तो उसे व्यक्ति मुफ्त में अपने पास रख सकता है। लेकिन गिफ्ट की कीमत 30 हजार रुपये से ज्यादा है तो उस कीमत का 50 प्रतिशत जमा करके उसे खरीदा जा सकता है। साल 2018 में सत्ता में आने के बाद इमरान खान को अरब शासकों से सबसे ज्यादा महंगे उपहार मिले थे, जो तोशाखाना में जमा किए गए थे। बाद में खान ने संबंधित कानूनों के अनुसार उपहारों को रियायती मूल्य पर खरीदा और उन्हें मोटे मुनाफे पर बेच दिया।

उप चुनाव में भारी जीत के बाद आया ये फैसला

इमरान खान को अयोग्य घोषित करने के फैसले की टाइमिंग कई सारे सवाल भी खड़े कर रही है। असल में इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए- इंसाफ (PTI)को उप चुनाव में एक तरफा जीत मिली है। सोमवार को आए उप चुनाव के नतीजों में नेशनल असेंबली की आठ में से छह सीटों पर जबकि प्रांतीय विधानसभा उपचुनाव की तीन में से दो सीट पर जीत मिली है। इमरान खान की पार्टी ने नेशनल असेंबली की सात सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से छह में जीत मिली है। इमरान खान की पार्टी PTI की यह सफलता, शहबाज शरीफ सरकार के लिए बड़ा झटका है। क्योंकि अप्रैल में अविश्वास मत में हारने के बाद से सत्ता गंवा चुके इमरान लगातार जल्द चुनाव की मांग कर रहे थे। और उप चुनाव में जीत उनकी लोकप्रियता में गिरावट नहीं आने का संकेत भी है।

अब क्या करेंगे इमरान

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सिकंदर सुल्तान राजा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सर्वसम्मति से इमरान खान के खिलाफ निर्णय सुनाया है। चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किए जाने के साथ ही चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि इमरान खान के खिलाफ भ्रष्ट आचरण कानून के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। इस फैसले पर इमरान खान की पार्टी के महासचिव असद उमर ने कहा है कि इस फैसले के खिलाउ इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। ऐसे में इमरान खान को भले ही चुनाव आयोग से झटका लगा है लेकिन उनके पास न्यायालय की आस जरूर है। लेकिन अगर न्यायालय से इमरान को झटका लगता है तो उनकी स्थिति नवाज शरीफ जैसी हो सकती है।

नवाज शरीफ के साथ क्या हुआ था

इसके पहले साल 2018 में चुनाव के नामांकन में गलत जानकारी देने के आरोप में नवाज शरीफ पर कार्यवाही हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी शख्स को संविधान की धारा 62 (1) के तहत अयोग्य कर दिया गया तो वह आजीवन अयोग्य होगा। इसके बाद नवाज शरीफ लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। नवाज शरीफ पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाई हैं।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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