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क्या है TAPI: जिस पर कब्जा करना चाहता है तालिबान, भारत को कैसे होगा नुकसान? UN की रिपोर्ट में खुलासा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 11, 2023, 04:08 PM IST

What is TAPI Project: संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान के आांतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी अफगानिस्तान की आर्थिक परियोजनाओं को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रहे हैं। वह तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान- पाकिस्तान- भारत(TAPI) गैस पाइपलाइन के अफगान खंड के निर्माण पर नियंत्रण चाहता है।

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तालिबान

Photo : BCCL

What is TAPI Project: अफगानिस्तान की तालिबान सरकार में एक बार फिर से उथल-पुथल शुरू हो गई है। खबर है कि तालिबान सरकार में हक्कानी नेटवर्क और मुल्ला अली बरादर के बीच एक बार फिर से संघर्ष शुरू हो गया है। इस बार दोनों के बीच खींचतान दोनों के बीच कई मसलों को लेकरहै, जिसमें मुख्य तालिबान की आर्थिक परियोजनाएं हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान के आांतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी अफगानिस्तान की आर्थिक परियोजनाओं को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्य रूप से हक्कानी नेटवर्क तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान- पाकिस्तान- भारत(TAPI) गैस पाइपलाइन पर नियंत्रण की मांग कर रहा है। वह इस महत्वपूर्ण परियोजना के अफगान खंड के निर्माण पर नियंत्रण चाहता है।

कई पदों को लेकर हक्कानी और बरादर में कलह

संयुक्त राष्ट्र की 1988 की तालिबान प्रतिबंध समिति की विश्लेषणात्मक सहायता और प्रतिबंध निगरानी टीक की 14वीं रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य तंत्र और प्रांतीय प्रशासन के पदों को लेकर तालिबानी अधिकारियों के लिए संघर्ष चल रहा है। कई मसले ऐसे हैं, जिस पर आंतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी और कार्यवाहक प्रथम उप प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर के लिए सहमति नहीं बन पा रही है। इसमें ज्यादातकर आर्थिक मसले शामिल हैं।

दक्षिणी प्रांतीय प्रशासन का समर्थन करता है बरादर

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यवाहक प्रथम उप प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर दक्षिणी प्रांतीय प्रशासन का समर्थन करता है। वह तालिबान के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करके अन्य रास्ते खोलने के पक्ष में है। इसके अलावा बरादत विदेशों में अफगानिस्तान की संपत्ति को भी मुक्त करवाना चाहता है और वह विदेशी सहायता का विस्तार करने की प्रक्रिया को भी नियंत्रित करता चाहता हैं। वहीं हक्कानी ऐसा नहीं चाहता है, जिसको लेकर दोनों के बीच कलह का दौर जारी है।

क्या है TAPI?

TAPI तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के बीच पाइपलाइन योजना है। यह तुर्केमेनिस्तान से शुरू होकर पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुंचती है। 1814 किलोमीटर लंबी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन योजना के अंतर्गत दिसंबर 2010 में एक अंतर सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस पाइपलाइन योजना का निर्माण 2015 में शुरू हुआ था। हालांकि, अफगानिस्तान सरकार की अस्थिरता के कारण इस परियोजना के अफगान खंड का विकास काफी कम हुआ है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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