अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर लगाया नौसैनिक प्रतिबंध हटा लिया है। तेहरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने ये दावा किया। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही हम इस बात पर जोर दे रहे थे कि प्रतिबंध हटना चाहिए। अब इसकी शुरुआत हो गई है। उन्होंने कहा कि समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर से पहले ही यह प्रतिबंध हटा दिया गया है।
ईरानी सरकारी वेबसाइट के हवाले से इटली की समाचार एजेंसी 'एडनक्रोनोस'ने बताया कि अमेरिका ने स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर से पहले ही ईरानी बंदरगाहों पर लागू नौसैनिक प्रतिबंध समाप्त कर दिया। यह प्रतिबंध लगभग दो महीने पहले लगाया गया था।
इस बीच, ईरानी मीडिया ने सोमवार को दावा किया कि तीन तेल टैंकर और जरूरी सामान लेकर जा रहे दो अन्य जहाज हाल के दिनों में प्रतिबंधित क्षेत्र से गुजरने में सफल रहे। इसे भी क्षेत्र में तनाव कम होने और समुद्री गतिविधियों के सामान्य होने का संकेत माना जा रहा है।
वहीं, सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरान के साथ हुए नए समझौते का स्वागत किया। उन्होंने इसे मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
दोनों नेताओं ने फ्रांस के एवियन शहर में हुए जी-7 समिट के दौरान मुलाकात की। उन्होंने कहा कि यह समझौता दुनिया के ऊर्जा बाजारों में स्थिरता ला सकता है। होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद कर सकता है और ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने में मददगार हो सकता है। मैक्रों ने बैठक की शुरुआत में कहा कि मुझे लगता है कि कल हुआ समझौता बहुत महत्वपूर्ण था। यह ईरान के साथ शांति समझौता है। यह समझौता सबसे पहले परमाणु मुद्दे को हल करेगा और यह पूरी दुनिया की शांति के लिए बहुत अहम है।
मैक्रों ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि इससे लेबनान में शांति की कोशिशों को भी मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि यह लेबनान में शांति लाने में मदद करेगा। हम इस समझौते का समर्थन करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कोशिशों में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। वहीं, ट्रंप ने कहा कि इस समझौते का असर पहले से दिखने लगा है और होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो रही है। यह रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।
