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रूस को मिला अमेरिका का साथ! प्रस्तावित यूक्रेन शांति समझौते के तहत क्रीमिया पर रूसी नियंत्रण को मान्यता देने के लिए ट्रंप तैयार

Russia-Ukraine Peace Deal: प्रस्तावित यूक्रेन शांति समझौते के तहत क्रीमिया पर रूसी नियंत्रण को मान्यता देने के लिए अमेरिका तैयार है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने बार-बार रूस को क्षेत्र सौंपने से इनकार कर दिया है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस-यूक्रेन वार्ता अहम स्तर पर है, कोई युद्ध समाप्त करने के प्रयास में समर्थन नहीं कर रहा है।

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सांकेतिक तस्वीर।

Photo : ANI

Russia-Ukraine Conflict: रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते के हिस्से के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका क्रीमिया पर रूसी नियंत्रण को मान्यता देने के लिए तैयार है, प्रस्तावित रूपरेखा से परिचित एक अधिकारी का हवाला देते हुए सीएनएन ने ये जानकारी दी है। शांति प्रस्ताव में दोनों देशों के बीच तत्काल युद्ध विराम शामिल है। रूपरेखा को बृहस्पतिवार को पेरिस में यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ साझा किया गया।

अमेरिकी विदेश मंत्री और रूस विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत

सीएनएन ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस प्रस्ताव के बारे में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच फोन पर भी बातचीत हुई। हालांकि, कुछ ऐसे हिस्से हैं जिन्हें अभी भी पूरा किया जाना है और अमेरिका अगले सप्ताह लंदन में यूरोप और यूक्रेन के साथ इस पर काम करने की योजना बना रहा है, सूत्र ने कहा। रूस ने 2014 में सैन्य आक्रमण के बाद क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था- एक ऐसा कदम जिसकी अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा व्यापक रूप से अवैध के रूप में निंदा की गई थी।

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने बार-बार रूस को क्षेत्र सौंपने से इनकार कर दिया है। इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि कोई भी पक्ष वार्ता को बहुत कठिन बनाता है, तो अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते के अपने प्रयासों को 'छोड़' सकता है, सीएनएन ने बताया। ट्रंप ने कहा, 'यदि, किसी कारण से, दोनों पक्षों में से कोई भी इसे बहुत कठिन बनाता है, तो हम बस यही कहेंगे, 'आप मूर्ख हैं, आप मूर्ख हैं। आप भयानक लोग हैं,' और हम बस इसे छोड़ देंगे।'

अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान के बाद आई ट्रंप की टिप्पणी

सीएनएन ने बताया कि चेतावनी के बावजूद, ट्रंप ने एक समझौते को सुरक्षित करने के बारे में सतर्क आशावाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हमारे पास इसे पूरा करने का वास्तव में अच्छा मौका है। यह अभी चरम पर आ रहा है।' ट्रंप की टिप्पणी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के एक बयान के बाद आई, जिन्होंने 'कुछ दिनों' के भीतर यूक्रेन में शांति प्रयासों को छोड़ने का सुझाव दिया।

यूरोपीय, यूक्रेनी और रूसी अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता के बाद पेरिस में बोलते हुए, रुबियो ने यह निर्धारित करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया कि युद्ध समाप्त किया जा सकता है या नहीं। पेरिस से रवाना होने से पहले उन्होंने संवाददाताओं से कहा, 'हमें अब बहुत जल्दी निर्णय लेने की जरूरत है, और मैं कुछ ही दिनों की बात कर रहा हूं, कि यह संभव है या नहीं।'

अहम स्तर पर रूस-यूक्रेन वार्ता: जानिए ट्रंप ने क्या कुछ कहा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच वार्ता अब ऐेसे स्तर पर पहुंच चुकी है, जिसमें कुछ निष्कर्ष निकलना चाहिए, लेकिन दोनों में से कोई भी देश उनके (ट्रंप) युद्ध समाप्त कराने के प्रयासों का समर्थन नहीं कर रहा है। ट्रंप ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार को चेतावनी देते हुए कहा था कि आने वाले दिनों में अगर रूस और यूक्रेन के बीच वार्ता में कोई प्रगति नहीं हुई तो अमेरिका दोनों देशों के बीच शांति समझौता कराने के प्रयासों को छोड़कर आगे बढ़ सकता है क्योंकि कई महीने तक प्रयास करने के बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में मीडिया से कहा, 'अगर किसी कारण से दोनों में से कोई एक पक्ष इसे बहुत कठिन बना देता है तो हम कह देंगे कि आप मूर्ख हैं और फिर हम इसे छोड़ देंगे।' यह पूछे जाने पर कि क्या रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन वार्ता में देरी कर रहे हैं तो इसके जवाब में ट्रंप ने कहा, 'मुझे लगता है कि ऐसा नहीं है।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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