US Iran War: ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को नाटो (NATO) से बाहर निकालने की धमकी दी है। दरअसल, रोपीय सदस्य देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए जहाज भेजने से इनकार कर दिया था। यह बात ट्रंप 'न गवार गुजरी।' नतीजा ये हुआ कि ट्रंप ने दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य गठबंधन से अमेरिका को बाहर निकालने की धमकी दे डाली।
इसी बीच नाटो के प्रमुख मार्क रूटे (Mark Rutte) अगले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं। वॉशिंगटन में होने वाली यह मीटिंग भले ही पहले से तय बताई जा रही हो, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात और बढ़ते मतभेद इसे बेहद अहम बना रहे हैं।
मार्को रुबियो और पीट हेगसेथ से भी करेंगे मुलाकात
शुक्रवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रुट्टे के कार्यक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के साथ वार्ता भी शामिल है। ये निर्धारित वार्ताएं एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हो रही हैं, क्योंकि ट्रंप ने खुले तौर पर 77 साल पुराने सैन्य समझौते की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं।
महासचिव 8 अप्रैल को ट्रंप से मुलाकात करेंगे, जिसके बाद रूबियो और हेगसेथ के साथ बैठकें होंगी। इसके अतिरिक्त, नाटो प्रमुख 9 अप्रैल को रोनाल्ड रीगन प्रेसिडेंशियल फाउंडेशन इंस्टीट्यूट में भाषण देंगे।
क्या कहती है नाटो की संधि?
नाटो संधि के अनुच्छेद 13 के अनुसार कोई भी पक्ष अमेरिका की सरकार को एक वर्ष का नोटिस देकर सदस्यता समाप्त कर सकता है। इसके बाद अमेरिका अन्य सरकारों को सदस्यता समाप्ति की सूचना देगा। आज तक किसी भी नाटो सदस्य ने अपनी सदस्यता रद नहीं की है।समझें नाटो का महत्व
नाटो दुनिया का एक प्रमुख सैन्य गठबंधन है, जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी। इसका पूरा नाम उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization) है। इसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप और उत्तरी अमेरिका के देशों की सामूहिक सुरक्षा के लिए बनाया गया था, ताकि किसी एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाए।
नाटो का सबसे अहम सिद्धांत इसका Article 5 है, जिसके अनुसार अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो बाकी सभी सदस्य उसकी रक्षा के लिए आगे आते हैं। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत 30 से ज्यादा देश शामिल हैं, और इसका मुख्य उद्देश्य शांति बनाए रखना, सुरक्षा सहयोग बढ़ाना और बड़े युद्धों को रोकना है।
