US-Iran Talks: अमेरिका और ईरान के बीच आज (शुक्रवार) ओमान में बातचीत होगी। दोनों देशों की बातचीत पर मिडिल ईस्ट से लेकर पूरी दुनिया की नजर है। ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन और इसके चलते अमेरिका की तरह से लगतार हमले की धमकी के बीच अब दोनों देश शांति वार्ता के लिए तैयार हो चुके हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने साफ किया है कि अगर बातचीत का माहौल दबाव और धमकियों से मुक्त रहा, तभी वह अमेरिका के साथ बातचीत करने को तैयार है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने विदेश मंत्री अब्बास अराकची को निर्देश दिए हैं कि वह अनुकूल परिस्थितियों में कूटनीतिक संवाद की संभावनाएं तलाशें। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से कहा गया है कि किसी भी तरह की वार्ता सम्मान, विवेक और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए।
दोनों देशों की क्या है मांग?
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित बातचीत ओमान की राजधानी मस्कट में होने वाली है। हालांकि बातचीत के एजेंडे को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी बरकरार हैं। ईरान चाहता है कि चर्चा केवल उसके परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहे, जबकि अमेरिका मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों जैसे मुद्दों को भी शामिल करने के पक्ष में है।
शांति की गुंजाइश बेहद कम
इस बातचीत से शांति की गुजाइंश के आसार बेहद कम हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि इस डील का निकलना मुश्किल है। दोनों मुल्कों का अड़ियल रवैय्या ये बता रहा है कि डिप्लोमेसी से ज्यादा सैन्य विकल्प हावी हो सकते हैं।ईरान की दो टूक
ईरान के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल सैय्यद अब्दुलरहीम मूसावी ने मीटिंग से ठीक पहले अमेरिका को खुली चुनौती भी दे डाली है। ईरान ने न केवल अपनी मिसाइलों का परीक्षण किया, बल्कि एक नए अंडरग्राउंड मिसाइल सेंटर का उद्घाटन भी किया है।
मूसावी ने साफ कर दिया कि ईरान अपने मिसाइल प्रोग्राम पर कोई चर्चा नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि दुश्मन की एक छोटी-सी गलती उन्हें कार्रवाई की खुली छूट दे देगी और तब कोई भी अमेरिकी सुरक्षित नहीं रहेगा।
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना तैनात
इससे पहले अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत की है। इसके जवाब में ईरान ने भी चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक अहम कूटनीतिक कदम हो सकती है, लेकिन प्रतिबंधों, परमाणु गतिविधियों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हाल ही में ये जानकारी सामने आई थी कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई किसी सीक्रेट बंकर में जा छिपे हैं। आशंका जताई जा रही है कि अगर ये बातचीत बेअसर रही तो दोनों देशों के बीच टकराव और भी ज्यादा बढ़ सकता है।
