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US Iran Peace Deal: पश्चिम एशिया में ऐतिहासिक शांति समझौते की तैयारी! राष्ट्रपति पेजेश्कियान का बड़ा बयान- हम परमाणु हथियार नहीं बना रहे

पश्चिम एशिया में शांति की ओर ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के सीजफायर समझौते का मसौदा अंतिम चरण में पहुंच गया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान दुनिया को आश्वस्त करने के लिए तैयार है कि वह परमाणु हथियार नहीं चाहता।

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न्यूक्लियर हथियार पर दुनिया को भरोसा देने के लिए तैयार हुआ ईरान (फाइल)

Photo : AP

US Iran Peace Deal: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी सैन्य तनाव और अनिश्चितता को समाप्त करने के लिए एक बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने रविवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह भरोसा दिलाने के लिए पूरी तरह तैयार है कि वह परमाणु हथियार बनाने की होड़ में नहीं है। इसी बीच अमेरिकी मीडिया ग्रुप 'एक्सियोस' (Axios) ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से सनसनीखेज दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के ऐतिहासिक सीजफायर का ज्ञापन अपने अंतिम चरण में है और दोनों देशों के मध्यस्थ किसी भी वक्त इसका आधिकारिक ऐलान कर सकते हैं।

हम परमाणु हथियार नहीं चाहते: राष्ट्रपति पेजेश्कियान

ईरानी सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग' (IRIB) के दौरे के दौरान राजनयिक और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर तेहरान की प्रतिबद्धता दोहराई। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा "हम दुनिया को यह आश्वस्त करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं कि हम परमाणु हथियार नहीं तलाश रहे हैं और न ही हम इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अशांति या अस्थिरता चाहते हैं। हमारा परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों (जैसे ऊर्जा उत्पादन, चिकित्सा और वैज्ञानिक अनुसंधान) के लिए है, जो परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत हमारा संप्रभु अधिकार है।" इसके साथ ही पेजेश्कियान ने सीधे तौर पर इजराइल को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता और युद्ध को जिंदा रखने के लिए ईरान नहीं, बल्कि "इ़जराइली शासन" जिम्मेदार है, जो शांति के हर मौके को बर्बाद करता है।

समझौते का मुख्य फॉर्मूला: प्रदर्शन के बदले राहत

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस संभावित समझौते का मसौदा बेहद कड़े और व्यावहारिक कूटनीतिक ढांचे पर तैयार किया गया है, जिसे "रिलीफ फॉर परफॉर्मेंस" का नाम दिया गया है। इसके तहत ईरान जैसे-जैसे परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्तों को पूरा करेगा, उसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से उतनी ही राहत मिलती जाएगी। ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ चल रही इस बातचीत में ईरान के वार्ताकार देश की राष्ट्रीय गरिमा, संप्रभुता और सम्मान से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।

कच्चे तेल की कीमतों में आ सकती है गिरावट

यदि अगले कुछ घंटों में इस डील पर मुहर लग जाती है, तो इसके वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर क्रांतिकारी प्रभाव देखने को मिलेंगे। वैश्विक व्यापार और विशेषकर कच्चे तेल की सप्लाई के लिए लाइफलाइन माना जाने वाला 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' तुरंत व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरान को दोबारा अपने कच्चे तेल की बिक्री शुरू करने की अनुमति मिल जाएगी, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से गिर सकती हैं। इसके अलावा यह समझौता दुनिया को एक हाई-स्टेक्स 60 दिन का विंडो देगा, जिसके भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए अंतिम दौर की बातचीत होगी।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारी author

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृ... और देखें

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