What is Bridge Course: आपने ट्रेडिशनल कोर्स के बारे में सुना होगा, प्रोफेशनल कोर्स के बारे में भी सुना होगा। वोकेशनल कोर्स भी आजकल काफी चलन में हैं लेकिन क्या आपने Bridge Course के बारे में सुना है? दरसअल, ब्रिज कोर्स शिक्षा जगत का सबसे नया और अनोखा ट्रेंड है। ब्रिज कोर्स को करियर को उड़ान देने वाला कोर्स माना जा रहा है लेकिन इसकी परिभाषा क्या है, उसे समझना जरूरी है। ब्रिज कोर्स, ऐसे कोर्सेज हैं जो ज्ञान और स्किल के बीच के अंतर को भरने का काम करते हैं, यानी अगर किसी छात्र की पढ़ाई और जिस नए कोर्स में वह दाखिला ले रहा है, उसके बीच विषयों या स्किल्स का अंतर है, तो उसे पूरा करने के लिए ब्रिज कोर्स कराया जाता है।
IIT जोधपुर से M.Tech कर चुके और वर्तमान में रिलाएंस ग्रुप के साथ रिसर्च साइंटिस्ट नलिन कौशिक का कहना है किमान लीजिए, अगर आपने 12वीं में कॉमर्स पढ़ी, लेकिन अब कॉलेज में डेटा साइंस या कंप्यूटर एप्लीकेशन पढ़ना चाहते हैं। ऐसे में आपके पास मैथ्स या प्रोग्रामिंग की बुनियादी जानकारी नहीं होगी। इसलिए कॉलेज पहले कुछ हफ्तों या महीनों का ब्रिज कोर्स कराते हैं, ताकि आप बाकी छात्रों के बराबर आ सके। इसी तरह अगर किसी छात्र ने हिंदी माध्यम से पढ़ाई की है और अब वह अंग्रेजी माध्यम के कॉलेज में दाखिला लेता है, तो उसे English Bridge Course कराया जा सकता है। वहीं इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, मैनेजमेंट और साइंस जैसे क्षेत्रों में भी ब्रिज कोर्स काफी आम हो गए हैं।
कौन कौन से ब्रिज कोर्स
नई शिक्षा नीति (NEP 2020) लागू होने के बाद यह शब्द तेजी से चर्चा में है। कई IIT, NIT, केंद्रीय विश्वविद्यालय और निजी संस्थान अब छात्रों के लिए ब्रिज कोर्स शुरू कर रहे हैं। आजकल कई तरह के ब्रिज कोर्स उपलब्ध हैं। कुछ विश्वविद्यालय छात्रों को सॉफ्ट स्किल्स, क्रिटिकल थिंकिंग और एकेडमिक राइटिंग से जुड़े ब्रिज कोर्स भी कराते हैं।
- गणित ब्रिज कोर्स (Mathematics Bridge Course)
- प्रोग्रामिंग ब्रिज कोर्स (Programming Bridge Course)
- इंग्लिश कम्यूनिकेशन ब्रिज कोर्स (English Communication Bridge Course)
- इंजीनियरिंग छात्रों के लिए जीवविज्ञान (Biology for Engineering Students)
- बेसिक फिजिक्स (Basic Physics)
- केमिस्ट्री फाउंडेशन (Chemistry Foundation)
- डेटा विश्लेषण (Data Analytics)
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बुनियादी जानकारी (Artificial Intelligence Fundamentals)
- कोडिंग की बुनियादी शिक्षा (Coding Basics)
- शोध पद्धति (Research Methodology)
डिमांड अचानक क्यों बढ़ गई?
दरअसल, नई शिक्षा नीति ने छात्रों को अपनी पसंद के विषय चुनने की आजादी दी है। अब कोई छात्र साइंस के साथ म्यूजिक पढ़ सकता है, कॉमर्स का छात्र कंप्यूटर साइंस चुन सकता है या आर्ट्स का छात्र डेटा एनालिटिक्स सीख सकता है। इसे मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन कहा जाता है। लेकिन अलग-अलग विषयों में जाने पर ज्ञान यानी नॉलेज अलग अलग होती है। यही अंतर ब्रिज कोर्स पूरा करते हैं। सिर्फ कॉलेज ही नहीं, आजकल कॉरपोरेट कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को नई तकनीकों के लिए तैयार करने के लिए ब्रिज कोर्स करा रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, डाटा साइंस और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स को नई स्किल्स सिखाने के लिए भी ऐसे कोर्स चलाए जा रहे हैं।
कौन कौन से ब्रिज कोर्स
ब्रिज कोर्स के फायदे क्या हैं
ब्रिज कोर्स के कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि छात्र नए विषय को लेकर आत्मविश्वास महसूस करता है। उसे पढ़ाई समझने में आसानी होती है और शुरुआती कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता। इससे पढ़ाई बीच में छोड़ने की संभावना भी कम हो जाती है। यही कारण है कि दुनिया के कई बड़े विश्वविद्यालय नए छात्रों के लिए ब्रिज कोर्स अनिवार्य करते हैं।
- नई पढ़ाई के लिए बेहतर तैयारी
- ज्ञान की कमी (Skill Gap) दूर होती है
- आत्मविश्वास बढ़ता है
- विषय बदलना आसान होता है
- अच्छे अकादमिक प्रदर्शन में मदद
- ड्रॉपआउट का खतरा कम होता है
- नई तकनीकों और स्किल्स की जानकारी मिलती है
- रोजगार के अवसर बढ़ते हैं
- उच्च शिक्षा के लिए मजबूत आधार तैयार होता है
- संचार और व्यक्तित्व विकास
- मल्टीडिसिप्लिनरी शिक्षा को बढ़ावा
- करियर में बदलाव आसान बनता है
कहां से कर सकते हैं ब्रिज कोर्स के लिए आवेदन
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग छात्रों को छह महीने के ब्रिज कोर्स कराता है। इसके लिए ऑफिशियल वेबसाइट bridge.nios.ac.in पर जाकर आवेदन करना होता है। यहां आपको छह महीने के प्राइमरी टीचर एजुकेशन में ब्रिज कोर्स करने का अवसर मिलता है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी सहित देश की अन्य यूनिवर्सिटीज पर ब्रिज कोर्स कराती हैं।
अगर आप भी किसी नए कोर्स या करियर में कदम रखना चाहते हैं, तो Bridge Course आपके लिए एक मजबूत शुरुआत साबित हो सकता है।
बदलती शिक्षा व्यवस्था और तेजी से बदलते जॉब मार्केट को देखते हुए आने वाले वर्षों में ब्रिज कोर्स की अहमियत और भी बढ़ने वाली है। ब्रिज कोर्स कोई डिग्री या डिप्लोमा नहीं होता, बल्कि एक तैयारी का कोर्स होता है। इसका उद्देश्य छात्रों को नई पढ़ाई, नए विषय या नई तकनीक के लिए तैयार करना है।
