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अमेरिका का बड़ा एक्शन: ईरान के साथ अवैध व्यापार करने वाली एक दर्जन कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध, तीन भारत की भी

US Iran News: अमेरिका की ओर से जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया है, उसमें तीन कंपनियां भारत की भी हैं। सहारा थंडर को ऐसी मुख्य अग्रणी कंपनी के रूप में पहचान की गयी है जो ईरान की वाणिज्यिक गतिविधियों की देखरेख करती है। सहारा थंडर को मदद पहुंचाने को लेकर भारत वे जेन शिपिंग, पोर्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और सी आर्ट शिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड पर प्रतिबंध लगाया गया है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन

US Iran News: अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार को लेकर एक दर्जन से ज्यादा कपंनियों, व्यक्तियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह कार्रवाई ईरानी सेना की ओर से रूस में अवैध व्यापार एवं मानवरहित यानों की आपूर्ति करने के खुलासे के बाद की गई है। अमेरिकी वित्त विभाग की ओर से कहा गया है कि इन कंपनियों, व्यक्तियों एवं जहाजों ने यूक्रेन में रूस द्वारा छेड़ी गयी लड़ाई में ईरानी मानवरहित यानों की गुप्त बिक्री में अहम भूमिका निभायी है।

खास बात यह है कि अमेरिका की ओर से जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया है, उसमें तीन कंपनियां भारत की भी हैं। जानकारी के मुताबिक, सहारा थंडर को ऐसी मुख्य अग्रणी कंपनी के रूप में पहचान की गयी है जो इन प्रयासों में ईरान की वाणिज्यिक गतिविधियों की देखरेख करती है। सहारा थंडर को मदद पहुंचाने को लेकर भारत की जिन तीन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया है, वे जेन शिपिंग, पोर्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और सी आर्ट शिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड हैं।

चीन और ईरान पर बाइडन ने लगाया रूस की मदद करने का आरोप

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन के साथ जंग में रूस की मदद करने के लिए चीन और ईरान पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने यूक्रेन को हथियारों और गोला बारूद की आपूर्ति शुरू करने के दौरान कहा, पुतिन के मित्र उन्हें लगातार साजो सामान की आपूर्ति कर रहे हैं। ईरान ने उन्हें ड्रोन भेजे। उत्तर कोरिया ने बैलेस्टिक मिसाइल और तोप के गोले भेजे हैं, चीन रूस के रक्षा उत्पादन को बढ़ाने के लिए सामान मुहैया करा रहा है। इस प्रकार का सहयोग मिलने पर रूस ने यूक्रेनी शहरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले तेज कर दिए हैं। अपनी मातृभूमि की रक्षा कर रहे यूक्रेन के वीर जवानों पर गोला-बारूद बरसाएं हैं और अब अमेरिका यूक्रेन को युद्ध में अपनी रक्षा करने और तेज पलटवार करने के लिए आवश्यक साजो सामान की आपूर्ति करने जा रहा है।

अमेरिका ने यूक्रेन को भेजी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने रूसी सेनाओं के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए यूक्रेन को गुप्त रूप से लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें सौंपी हैं। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने इस बात की पुष्टि की है। पेंटागन के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल गैरॉन गार्न की ओर से कहा गया है कि राष्ट्रपति बाइडन ने फरवरी में यूक्रेनी क्षेत्र में इस्तेमाल के लिए लंबी दूरी की आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (एटीएसीएमएस) की आपूर्ति को गुप्त रूप से मंजूरी दे दी थी। उस समय यह घोषणा नहीं की गई थी कि हम यूक्रेन को उसके अनुरोध पर यह नई मिसाइल प्रणाली प्रदान कर रहे हैं। बता दें, बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता 300 किलोमीटर तक होती है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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