दुनिया

अमेरिका का चौंकाने वाला खुलासा, यूक्रेन जंग में मारे गए अब तक 20 हजार से ज्यादा रूसी लड़ाके

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 2, 2023, 06:30 AM IST

Russia Ukraine War: व्हाइट हाउस के अधिकारी जॉन किर्बी ने कहा है कि दिसंबर 2022 से अब तक रूस के 20 हजार से ज्यादा सैनिक मारे गए हैं, तो एक लाख से ज्यादा घायल हुए हैं। उन्होंने कहा है कि मारे गए सैनिकों में ज्यादातर रूसी निजी कंपनी वैगनर के लड़ाके थे।

Image

रूस-यूक्रेन संघर्ष

Photo : AP

Russia Ukraine War: रूस को लेकर एक बार फिर अमेरिका ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। अमेरिका के मुताबिक, यूक्रेन के साथ जंग लड़ रहे रूस के 2022 से अब तक 20 हजार से ज्यादा सैनिक मारे जा चुके हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, यह दावा व्हाइट हाउस के अधिकारी जॉन किर्बी की ओर से किया गया है।

मीडिया से बात करते हुए किर्बी ने कहा है कि बीते साल दिसंबर से रूस के करीब एक लाख से ज्यादा सैनिक यूक्रेन जंग में घायल भी हुए हैं। अमेरिका की ओर से यह दावा तब किया गया है, जब यूक्रेन बड़े काउंटर अटैक की तैयारी कर रही है और रूस की ओर से यूक्रेन की राजधानी कीव व अन्य शहरों पर हवाई हमले तेज कर दिए गए हैं।

खत्म हुआ रूस का सैन्य भंडार

अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि यूक्रेन के खिलाफ जंग लड़ रहे रूस का सैन्य भंडार और सशस्त्र बल लगभग खत्म हो चुके हैं। किर्बी ने दावा किया गया है कि मारे गए लोगों में आधे से ज्यादा रूसी निजी कंपनी वैगनर के लड़ाके थे। हालांकि, वैगनर लीडर येवगेनी प्रिगोझिन ने रविवार को कहा था कि उनके समूह के सिर्फ 94 लड़ाकों की मौत हुई है।

यूक्रेन में हताहतों के नहीं जारी किए आंकड़ें

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी जॉन किर्बी ने इस दौरान यूक्रेन के हताहतों के आंकड़े पेश करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, अमेरिका ने कभी इस तरह के आंकड़े पेश नहीं किए हैं। हालांकि, उन्होंने एक लाख रूसी सैनिकों के घायल होने के आंकड़ों के पीछे डाउनग्रेडेड इंटेलिजेंस को आधार बताया।

यूक्रेन के बखमुत में लड़ाई जारी

वहीं, रूस-यूक्रेन जंग में यूक्रेन के पूर्वी छोर पर जेलेंस्की की सेना अभी भी मोर्चा संभाले हुए है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बखमुत में दोनों देशों की सेनाओं के बीच भयानक संघर्ष छिड़ा हुआ है। इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेनी सेना अपने क्षेत्रों को वापस लेने के लिए बड़े काउंटर अटैक की तैयारी कर रही है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article