महिलाओं के लिए घर भी सेफ नहीं! हर 10 मिनट में फैमिली या पार्टनर कर देता है हत्या, UN की चौंकाने वाली रिपोर्ट
Authored by: नितिन अरोड़ाUpdated Nov 25 2025, 14:44 IST
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यूनाइटेड नेशंस की सोमवार (24 नवंबर) को जारी एक चौंकाने वाली नई रिपोर्ट से पता चला है कि हर दिन, हर 10 मिनट में, दुनिया में कहीं न कहीं एक महिला की हत्या उसके किसी जानने वाले द्वारा की जाती है। यह रिपोर्ट महिलाओं के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए मनाए जाने वाले इंटरनेशनल डे के मौके पर पब्लिश हुई। यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि महिलाओं की हत्या को रोकने की दुनिया भर की कोशिशें रुक गई हैं और महिलाओं के खिलाफ हिंसा अभी भी गहरी और बड़े स्तर पर चल रही है।
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यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम और UN विमेन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में करीब 50,000 महिलाओं और लड़कियों की हत्या उनके करीबी पार्टनर या परिवार के सदस्यों ने की। यह आंकड़ा 117 देशों से इकट्ठा किया गया है, जिसमें हर दिन औसतन 137 महिलाओं की हत्या होती है। स्टडी में बताया गया है कि पिछले साल हत्या की शिकार सभी महिलाओं में से 60 परसेंट की हत्या उनके किसी करीबी ने की थी। इसकी तुलना में, सिर्फ 11 परसेंट पुरुष पीड़ितों की हत्या उनके पार्टनर या परिवार के सदस्यों ने की थी।
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स्टडी में चेतावनी दी गई है कि जहां फेमिसाइड से हजारों महिलाओं और लड़कियों की जान जा रही है, ऐसे में 'घर महिलाओं और लड़कियों के लिए हत्या के खतरे के मामले में सबसे खतरनाक जगह बना हुआ है।' दुनिया में कहीं भी महिलाएं सुरक्षित नहीं, लेकिन अफ्रीका में सबसे ज्यादा हालात खराब हैं, जहां लगभग 22,000 मामले दर्ज किए गए। अफ्रीका के बाद, एशिया, अमेरिका, यूरोप और ओशिनिया में सबसे ज्यादा मामले हैं।
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रिसर्चर्स ने बताया कि कुल संख्या पिछले साल से थोड़ी कम है, लेकिन यह हिंसा में असली कमी नहीं दिखाती है। इसके बजाय, उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों में डेटा रिपोर्टिंग और उपलब्धता में अंतर ने शायद संख्याओं पर असर डाला है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, टेक्नोलॉजी में तरक्की ने महिलाओं के लिए मॉडर्न खतरों को जन्म दिया है, जिसमें बिना सहमति के इमेज शेयर करना, डॉक्सिंग और डीपफेक वीडियो शामिल हैं। UN विमेंस पॉलिसी डिवीजन की डायरेक्टर सारा हेंड्रिक्स ने कहा, 'महिलाओं की हत्याओं के अलावा भी देखा जाए तो वे अक्सर हिंसा का शिकार रहती हैं और ये सिलसिला चलता रहता है। इसकी शुरुआत कंट्रोल करने वाले व्यवहार, धमकियों और हैरेसमेंट से शुरू हो सकती हैं, जिसमें ऑनलाइन गतिविधियां भी शामिल है।'
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उन्होंने आगे कहा, 'हमें ऐसे कानूनों को लागू करने की जरूरत है जो यह पहचानें कि हिंसा महिलाओं और लड़कियों की जिंदगी में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से कैसे दिखती है और अपराधियों को इसके जानलेवा होने से पहले ही जिम्मेदार ठहराएं।'