Trump Ukraine Peace Plan: रूस-यूक्रेन के बीच शांति को लेकर ट्रंप ने एक प्लान पेश किया है, जिसपर दोनों देशों के बीच अब बात आगे बढ़ रही है, बातचीत हो रही है। अब ट्रंप के प्लान को लेकर अमेरिका के ही सीनेटर्स ने बड़ा दावा कर दिया है। दावा है कि ट्रंप ने जिस प्लान को पेश किया है, असल में वो अमेरिका का प्लान है ही नहीं, बल्कि वो रूसी दस्तावेज है। सीनेटर इसके लिए ट्रंप के ही खास और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो का हवाला दिया है।
'अमेरिकी योजना मानने से स्पष्ट इनकार'
रूस–यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के ट्रंप के तरीके की आलोचना कर रहे अमेरिकी सीनेटरों ने शनिवार को बताया कि रुबियो ने उन्हें कहा कि जिस शांति प्रस्ताव को ट्रंप कीव पर स्वीकार करने का दबाव डाल रहे हैं, वह “रूस की मांगों की सूची” जैसा है, न कि अमेरिका की वास्तविक नीति। यह 28 बिंदुओं वाला प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन और क्रेमलिन द्वारा यूक्रेन की भागीदारी के बिना तैयार किया गया था। इसमें रूस की कई ऐसी मांगें शामिल हैं जिन्हें यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की बार–बार ठुकरा चुके हैं-जिनमें यूक्रेन द्वारा अपने बड़े भूभाग का त्याग भी शामिल है। ट्रंप चाहते हैं कि यूक्रेन इस योजना को अगले सप्ताह के अंत तक स्वीकार कर ले।
ट्रंप की चाहत
ट्रंप चाहते हैं कि यूक्रेन इस योजना को अगले सप्ताह तक स्वीकार कर ले, लेकिन अमेरिकी सीनेटरों का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए खतरनाक संदेश देगा। सांसद एंगस किंग ने इस योजना की तुलना 1938 के “म्यूनिख समझौते” से की, जिसमें तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने हिटलर को मनाने की कोशिश की थी-लेकिन इतिहास ने इसे एक विनाशकारी तुष्टीकरण समझा। “यह योजना प्रत्यक्ष रूप से आक्रमण को इनाम देती है। रूस का पूर्वी यूक्रेन पर दावा किसी भी नैतिक, राजनीतिक या कानूनी आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।”
सभी तरफ से विरोध
इस योजना की आलोचना सिर्फ डेमोक्रेटों या स्वतंत्र सदस्यों ने ही नहीं की, बल्कि कई रिपब्लिकन सांसद भी इसमें शामिल हैं। रिपब्लिकन सीनेटर माइक राउंड्स ने कहा: “यह हमारी शांति योजना नहीं है। यह पहली नजर में ही रूस द्वारा लिखी गई प्रतीत होती है।” रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने तो साफ कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता मिच मैककॉनेल की आलोचना भी पर्याप्त नहीं थी। मैककॉनेल ने शुक्रवार को कहा था कि यदि प्रशासन पुतिन को संतुष्ट करने में लगा है, तो राष्ट्रपति को नए सलाहकारों की आवश्यकता है।
