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Mathura वाला दांव US के अलास्का में! मैदान में एक ही नाम के दो उम्मीदवार, ट्रंप बोले-ये तो सबसे बड़ा चुनावी फ्रॉड

भारत से हजारों मील दूर अमेरिका के अलास्का राज्य में ऐसे ही एक हमनाम उम्मीदवार ने मध्यावधि चुनावों में एक दिलचस्प पहलू जोड़ दिया है। ये चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और लोकप्रियता पर एक तरह से जनमत संग्रह साबित होने वाले हैं।

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डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

भारत में शायद कम लोगों को यह याद होगा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में मथुरा सीट पर हेमा मालिनी का मुकाबला एक अन्य हेमा मालिनी से हुआ था। इसी तरह, 2019 के लोकसभा चुनाव में वायनाड सीट पर राहुल गांधी के सामने एक अन्य राहुल गांधी और यहां तक कि एक ’राघुल गांधी’ नाम का उम्मीदवार भी मैदान में था,लेकिन अब ऐसा ही एक मामला अमेरिका के सुदूर राज्य अलास्का में सामने आया है जिसने महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों से पहले राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।

भारत में एक ही नाम वाले ऐसे ’डमी’ उम्मीदवारों का चुनाव लड़ना कोई नयी बात नहीं है, वे वहां की चुनावी राजनीति में कभी-कभी हास्य का पुट भी जोड़ देते हैं। लेकिन भारत से हजारों मील दूर अमेरिका के अलास्का राज्य में ऐसे ही एक हमनाम उम्मीदवार ने मध्यावधि चुनावों में एक दिलचस्प पहलू जोड़ दिया है। ये चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और लोकप्रियता पर एक तरह से जनमत संग्रह साबित होने वाले हैं।ट्रंप इस विवाद का पूरा राजनीतिक फायदा उठाने में जुटे हैं। यह विवाद कथित तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी की पर्दे के पीछे से चली गई एक चाल का नतीजा है।

डेनियल सुलिवन का मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार मैरी पेल्टोला से

लगभग सभी जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक, तीन नवंबर को होने वाले प्रतिनिधि सभा और सीनेट के चुनावों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी देशभर में डेमोक्रेटिक पार्टी से पिछड़ रही है। कांग्रेस के इन दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को अलास्का जैसे उसके मजबूत गढ़ों में भी कड़ी चुनौती मिल रही है। अमेरिकी मुख्य भूभाग से अलग स्थित अलास्का में सीनेट चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और मौजूदा सांसद डेनियल सुलिवन का मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार मैरी पेल्टोला से है।मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। चुनाव मैदान में एक तीसरा उम्मीदवार भी है, जिनका नाम डेनियल सुलिवन ही है। वह सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक हैं। हालांकि, शुरुआत में इसे कोई बड़ी बात नहीं माना गया, लेकिन बुधवार को न्यूयॉर्क टाइम्स की एक खबर ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया। खबर में दावा किया गया कि शिक्षक सुलिवन की उम्मीदवारी पेल्टोला की टीम के सुनियोजित प्रयासों का नतीजा है।

ट्रंप ने इसे चुनावी धोखाधड़ी करार देते हुए हंगामा खड़ा कर दिया

इसके तुरंत बाद ट्रंप ने इसे चुनावी धोखाधड़ी करार देते हुए हंगामा खड़ा कर दिया और न्याय विभाग को मामले की जांच के आदेश दे दिए। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि अलास्का के डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेनियल सुलिवन के वोट काटने के लिए जानबूझकर उन्हीं के नाम वाले एक ’डमी’ उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा, ताकि मतदाता भ्रमित हों और रिपब्लिकन उम्मीदवार को मिलने वाले वोट बंट जाएं।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ’ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, 'यह उच्चतम स्तर की चुनावी धोखाधड़ी है... हमारे चुनावों में इस तरह के कृत्य की अनुमति नहीं दी जा सकती।' उन्होंने पेल्टोला का नाम मतपत्र से हटाने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग भी की।

ग्रैंड जूरी की ओर से दर्जनों नए समन जारी किए गए हैं

बृहस्पतिवार को ’सीएनएन’ ने खबर दी कि न्याय विभाग ने इस मामले की आपराधिक जांच में असाधारण तेजी दिखाई है। इसके तहत ग्रैंड जूरी की ओर से दर्जनों नए समन जारी किए गए हैं और संभावित नए आरोपों की पड़ताल की जा रही है।पहली नजर में देखें तो किसी उम्मीदवार के समान नाम वाले दूसरे व्यक्ति का चुनाव लड़ना गैरकानूनी नहीं है। मतपत्र में दोनों सुलिवन के नाम स्पष्ट रूप से अलग-अलग दर्ज हैं। एक के नाम के साथ मौजूदा सांसद होने का उल्लेख है, जबकि दूसरे को किसी भी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं बताया गया है।

सीएनएन के राजनीतिक विश्लेषक स्टीफन कॉलिन्सन ने लिखा, 'लेकिन ट्रंप वर्षों से डेमोक्रेट्स पर चुनावों में धांधली करने और ऐसी चुनावी धोखाधड़ी की साजिश रचने के झूठे आरोप लगाते रहे हैं, जिसका वास्तव में कोई अस्तित्व ही नहीं है। अब आखिरकार उन्हें एक ऐसा मामला मिल गया है, जिसे वह अपने मनमाफिक कहानी गढ़ने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।'उन्होंने कहा, 'असली डैन सुलिवन जीतें या हारें, राष्ट्रपति अलास्का में हुई इस कथित गड़बड़ी को जरूर उछालेंगे और दावा करेंगे कि हर जगह डेमोक्रेट नेता भ्रष्ट हैं। खासकर तब, जब मंगलवार (तीन नवंबर) को रिपब्लिकन पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहता है।'

अमेरिकी कानूनों के तहत चुनाव कराना राज्यों का विषय

हालांकि, अमेरिकी कानूनों के तहत चुनाव कराना राज्यों का विषय है। मतपत्र पर किस उम्मीदवार का नाम शामिल किया जाएगा, इसका फैसला राज्य को करना होता है और इसमें संघीय सरकार की कोई भूमिका नहीं होती। ऐसे में न्याय विभाग की यह जांच अदालत में कानूनी कसौटी पर खरी नहीं उतर सकती।कॉलिन्सन ने लिखा, 'हालांकि, राजनीति में कानून से ज्यादा अहम यह होता है कि लोगों के मन में किसी घटना या मामले को लेकर क्या धारणा बनती है। कई बार यह धारणा वास्तविकता जितनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है। ट्रंप इस बात को आधुनिक दौर के किसी भी अन्य राष्ट्रपति से बेहतर समझते हैं।'

सीनेट में दोनों दलों के बीच मुकाबला बेहद करीबी

अगर ट्रंप किसी ऐसे कानूनी विवाद को खड़ा करने के लिए बेचैन दिख रहे हैं, जिसका कोई ठोस आधार नहीं है, तो इसकी वजह भी है। उनके लिए यह बड़ा झटका होगा, यदि रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा में संभावित हार के साथ ही 100 सदस्यीय सीनेट का नियंत्रण भी गंवा देती है। सीनेट में दोनों दलों के बीच मुकाबला बेहद करीबी है और अलास्का समेत कुछ राज्यों के नतीजे तय करेंगे कि वहां किस पार्टी का नियंत्रण होगा।’न्यूयॉर्क टाइम्स-सिएना’ के एक जनमत सर्वेक्षण में मैरी पेल्टोला को 51 प्रतिशत और सुलिवन को 45 प्रतिशत समर्थन मिलता दिखाया गया है। अगर अलास्का के नतीजे से यह तय होता है कि सीनेट पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा, तो वहां भारी राजनीतिक उठापटक देखने को मिल सकती है। ट्रंप इतनी आसानी से हार मानने वाले नहीं हैं और इसके लिए पूरी ताकत झोंक देंगे।

भारत में भी 2024 में इसी तरह के दोहरे, मिलते-जुलते या हमनाम उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने के खिलाफ जनहित याचिका दायर कर कानूनी चुनौती दी गई थी। लेकिन उच्चतम न्यायालय के माननीय न्यायाधीशों ने इस याचिका को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का नाम राहुल गांधी या लालू प्रसाद यादव होने भर से उसे चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

'चंदूलाल नाम के कम से कम सात अन्य उम्मीदवारों को भी चुनाव मैदान में उतारा था'

भारत में ’डमी’ उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारने की कला में सबसे ज्यादा माहिर कांग्रेस नेता अजीत जोगी थे। 2014 में छत्तीसगढ़ की महासमुंद लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चंदूलाल साहू के खिलाफ चुनाव लड़ते हुए जोगी ने कथित तौर पर चंदूलाल नाम के कम से कम सात अन्य उम्मीदवारों को भी चुनाव मैदान में उतारा था। इसके अलावा तीन उम्मीदवार चंदूराम नाम के भी थे।हालांकि, इन हमनाम उम्मीदवारों के मैदान में होने और उन्हें भी अच्छी-खासी संख्या में वोट मिलने के बावजूद भाजपा के चंदूलाल साहू मामूली अंतर से चुनाव जीत गए।गौर करने वाली बात यह है कि 2014 के चुनाव में हेमा मालिनी हार गई थीं। हालांकि, हारने वाली अभिनेत्री हेमा मालिनी नहीं, बल्कि उनके नाम वाली दूसरी उम्मीदवार थीं।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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