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गोल्ड-सिल्वर रेशियो 76 पर पहुंचा, सोना सस्ता होगा या चांदी में आएगी तेजी? समझें पूरा गणित

आम लोगों के लिए अच्छी खबर है। धनतेरस और दिवाली तक सोने की कीमत में और गिरावट आ सकती है। इसके संकेत गोल्ड-सिल्वर रेशियो से मिल रहे हैं।

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गोल्ड प्राइस

देशभर में दिवाली की तैयारी शुरू हो गई है। दिवाली से पहले धनतेरस आता है। इस अवसर पर सोने और चांदी की जमकर खरीदारी होती है। इस बीच सोने-चांदी का अनुपात बढ़कर लगभग 76:1 हो गया है, जिसका मतलब है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए लगभग 76 औंस चांदी की जरूरत होती है। आज के बाजार में, यह ऊंचा अनुपात बताता है कि चांदी की तुलना में सोना काफी महंगा है। जानकारों का कहना है कि सोने के मुकाबले चांदी में बड़ी गिरावट आई है। अब हो सकता है कि सोने में गिरावट आए।

रेशिया घटने और बढ़ने के संकेत

गोल्ड-सिल्वर रेशियो यह बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की जरूरत होगी। रेशियो का बढ़ना आमतौर पर यह दिखाता है कि सोना, चांदी के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, जबकि रेशियो का गिरना यह बताता है कि चांदी की स्थिति मजबूत हो रही है। यह रेशियो निवेशकों को सोने और चांदी की तुलनात्मक कीमत समझने और इन दोनों धातुओं के बीच स्विच करने के मौकों को पहचानने में मदद करता है।

सोन की तुलना में चांदी अभी सस्ती

मौजूदा समय में रेशियो बढ़कर लगभग 76 हो गया है, जो इस साल 27 प्रतिशत और पिछले एक महीने में ही 12 प्रतिशत की वृद्धि है। यह इसके लंबे समय के औसत (लगभग 65-70) से ऊपर है, जिसका मतलब है कि सोने की तुलना में चांदी अब सस्ती धातु है। 2026 में गोल्ड-सिल्वर रेशियो में काफी उतार-चढ़ाव आया है। इस साल की शुरुआत में जब चांदी 121.6 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी, तब यह रेशियो गिरकर लगभग 43.6 पर आ गया था, जो एक दशक से भी ज्यादा समय में इसका सबसे निचला स्तर था। तब से, चांदी अपने उस उच्चतम स्तर से 55 प्रतिशत से ज्यादा और इस साल लगभग 27 प्रतिशत गिरकर करीब 52.8 डॉलर पर आ गई है। इसकी तुलना में, सोना इस साल केवल 7 प्रतिशत के आसपास गिरा है और लगभग 4,027 डॉलर के स्तर पर है।

'गोल्ड-सिल्वर रेशियो का इस्तेमाल इंडिकेटर के रूप में कैसे करें?

कमोडिटी एक्सपर्ट के मुताबिक, गोल्ड-सिल्वर रेशियो का इस्तेमाल बाजार में खरीदारी या बिकवाली का सही समय तय करने के बजाय, दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्य को समझने और पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने के लिए करना ज्यादा बेहतर है। इसके लिए किसी एक सटीक टर्निंग पॉइंट का इंतजार करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना चाहिए।

जब यह अनुपात अपनी ऐतिहासिक सीमा से काफी ऊपर चला जाए, तो निवेशक सोने के मुकाबले चांदी में अपना निवेश धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं। इसके उलट, जब रेशियो काफी नीचे आ जाए, तो यह संकेत हो सकता है कि चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है। ऐसी स्थिति में चांदी में कुछ मुनाफा निकालकर उसे सोने में लगाया जा सकता है।

ऐतिहासिक आंकड़े भी इस रणनीति को समझने में मदद करते हैं। 80 से ऊपर का गोल्ड-सिल्वर रेशियो आमतौर पर चांदी के लिए अनुकूल माना गया है। मार्च 2020 में कोरोना महामारी के दौरान यह अनुपात करीब 126 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद अगले पांच महीनों में चांदी की कीमतों में लगभग 140 फीसदी की तेजी आई थी। वहीं, 50 से नीचे का रेशियो आमतौर पर सोने के बेहतर प्रदर्शन का संकेत माना जाता है।

निवेशक इस रणनीति के तहत अपने पोर्टफोलियो में सोने और चांदी का एक निश्चित अनुपात (टारगेट एलोकेशन) तय कर सकते हैं। जब गोल्ड-सिल्वर रेशियो निर्धारित स्तरों से काफी ऊपर या नीचे चला जाए, तो उसी के अनुसार निवेश में बदलाव यानी रीबैलेंसिंग की जा सकती है। इससे किसी एक बाजार संकेत पर निर्भरता कम होती है और उतार-चढ़ाव के बीच निवेश में अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलती है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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