Hamas Gaza Rule Three Years After October 7: 7 अक्टूबर के घातक हमलों के ठीक तीन साल बाद, जिसने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को अब तक के सबसे खतरनाक और घातक दौर में धकेल दिया था, आज मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा है: 'क्या हमास कभी फिर से गाजा पट्टी पर अपना राजनीतिक और प्रशासनिक शासन स्थापित कर पाएगा?'
इजरायल ने युद्ध की शुरुआत में ही हमास की सैन्य और प्रशासनिक क्षमताओं को पूरी तरह से नष्ट करने की कसम खाई थी। तीन साल के लगातार सैन्य अभियानों और भीषण युद्ध के बाद गाजा की जमीनी हकीकत, हमास का वजूद और भविष्य के शासन को लेकर स्थिति अब काफी जटिल हो चुकी है।
हमास का सैन्य ढांचा: औपचारिक सेना से गुरिल्ला विद्रोही समूह में तब्दील
पिछले तीन वर्षों में इजरायली रक्षा बलों (IDF) के अभियानों ने हमास के पारंपरिक सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है:
शीर्ष नेतृत्व का खात्मा: हमास के कई शीर्ष राजनीतिक व सैन्य कमांडरों और बटालियन प्रमुखों को खत्म कर दिया गया है।
अंडरग्राउंड नेटवर्क और हथियार तबाह: सुरंगों के विशाल नेटवर्क ('गाजा मेट्रो'), रॉकेट निर्माण इकाइयों और हथियारों के जखीरे का बड़ा हिस्सा नष्ट किया जा चुका है।
गुरिल्ला रणनीति पर शिफ्ट: हमास अब एक संगठित सेना या ब्रिगेड स्तर की ताकत के रूप में काम नहीं कर पा रहा है। हालांकि, वह पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है; अब उसके बचे हुए लड़ाके छोटे-छोटे समूहों में विभाजित होकर गुरिल्ला युद्ध (Hit-and-Run ambushes and IED attacks) का सहारा ले रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य बल से हमास की सीमा-पार हमला करने की क्षमता तो खत्म की जा सकती है, लेकिन एक विचारधारा को पूरी तरह मिटाना बेहद कठिन है।
गाजा में शासन का शून्य और हमास का अनौपचारिक नियंत्रण
गंभीर सैन्य क्षति के बावजूद, हमास अभी भी गाजा के कुछ इलाकों में अनौपचारिक या छाया नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि गाजा में अब तक कोई मजबूत या सर्वस्वीकार्य विकल्प तैयार नहीं हो सका है।
राहत सामग्री पर पकड़: जैसे ही इजरायली बल किसी क्षेत्र से पीछे हटते हैं, हमास के स्थानीय कार्यकर्ता मानवीय सहायता सामग्री के वितरण और कालाबाजारी पर नियंत्रण की कोशिश करने लगते हैं।
कानून-व्यवस्था का संकट: कई क्षेत्रों में सशस्त्र कबीलों, आपराधिक गिरोहों और स्थानीय कमेटियों का कब्जा हो गया है, जिससे पूरे गाजा में भारी अराजकता फैली हुई है।
युद्ध के बाद गाजा पर कौन राज करेगा? (विकल्प और चुनौतियां)
हमास को गाजा के शासन से हमेशा के लिए बाहर करने के लिए एक व्यावहारिक विकल्प का होना अनिवार्य है। अंतरराष्ट्रीय पटल पर मुख्य रूप से 3 विकल्पों पर चर्चा हो रही है, लेकिन सभी में अपनी चुनौतियां हैं:
विकल्प A: पुनर्गठित फिलिस्तीनी प्राधिकरण (Reformed Palestinian Authority - PA)
योजना: अमेरिका और कई पश्चिमी देश चाहते हैं कि वेस्ट बैंक का संचालन करने वाला 'फिलिस्तीनी प्राधिकरण' (PA) सुधारों के बाद गाजा की कमान भी संभाले, ताकि दोनों फिलिस्तीनी क्षेत्रों का एकीकरण हो सके।
चुनौती: PA के पास फिलिस्तीनी जनता का व्यापक भरोसा नहीं है। इसके अलावा, इजरायल का वर्तमान नेतृत्व गाजा में PA के प्रवेश का कड़ा विरोध करता है।
विकल्प B: अंतरराष्ट्रीय या अरब शांति सेना (International / Arab Peacekeeping Force)
योजना: एक बहुराष्ट्रीय अरब गठबंधन या संयुक्त राष्ट्र (UN) समर्थित अंतरराष्ट्रीय बल गाजा में शांति स्थापित करे, पुनर्निर्माण की देखरेख करे और एक नागरिक सरकार बनने तक सुरक्षा संभाले।
चुनौती: सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और मिस्र जैसे प्रमुख अरब देशों ने साफ कर दिया है कि वे स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य के स्पष्ट रोडमैप के बिना न तो अपने सैनिक भेजेंगे और न ही पुनर्निर्माण का खर्च उठाएंगे।
विकल्प C: दीर्घकालिक इजरायली सुरक्षा नियंत्रण (Israeli Security Oversight)
योजना: इजरायल गाजा के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाए रखे और आवश्यकता पड़ने पर सैन्य अभियान चलाए, लेकिन नागरिक प्रशासन की जिम्मेदारी न ले।
चुनौती: इससे गाजा में लंबे समय तक गुरिल्ला युद्ध चलता रहेगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा गाजा के पुनर्निर्माण के लिए धन मिलने की संभावना कम हो जाएगी।
निष्कर्ष: क्या हमास का दोबारा शासन संभव है?

7 अक्टूबर के उस खतरनाक हमले में 1,200 लोगों की जान चली गई
विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का एकमत मानना है कि पूर्व जैसी स्थिति असंभव: हमास के लिए 7 अक्टूबर 2023 से पहले की तरह गाजा पर एक संप्रभु और निर्विरोध शासक के रूप में वापसी करना- जहां उसके पास अपनी सरकार, मंत्रालय और भारी हथियार थे - अब लगभग असंभव है।
प्रभाव खत्म होना भी मुश्किल: हमास को फिलिस्तीनी राजनीति से पूरी तरह बेदखल करना भी आसान नहीं होगा। भले ही वह औपचारिक सरकार का हिस्सा न बने, लेकिन एक राजनीतिक व भूमिगत विद्रोही गुट के रूप में वह गाजा और फिलिस्तीन के भविष्य को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
गाजा के लोगों का हमास के प्रति नजरिया
पिछले 36 महीनों में गाजा के लोगों का हमास के प्रति नजरिया बहुत ज्यादा और दर्दनाक तरीके से बदला है।
Firstpost की रिपोर्ट के अनुसार, भारी तबाही और आम नागरिकों के मारे जाने की वजह से राष्ट्रवाद की भावना और इजराइल के प्रति नाराजगी तो बनी हुई है, लेकिन हमास के राजनीतिक एकाधिकार के प्रति लोगों का सब्र अब टूट चुका है।
अक्टूबर 2023 से अब तक 68,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और इस इलाके की 85 प्रतिशत से ज्यादा आबादी बेघर हो चुकी है।
अभी 2,79,000 से ज्यादा लोग बाढ़-संभावित टेंट कैंपों या ऐसे खंडहरों में रह रहे हैं जिन्हें तुरंत बाहर निकालने की जरूरत है। इस इलाके में खाने, साफ पानी और दवाइयों की भारी कमी बनी हुई है।
2025 के आखिर में और इस पूरे साल, मध्य गाजा और खान यूनिस में लोगों ने जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन किए। लोग सड़कों पर उतर आए और युद्ध को तुरंत खत्म करने, कमर्शियल सामानों की एंट्री और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन से हमास को हटाने की मांग करने लगे।
हमास ने सख्त कार्रवाई, गिरफ्तारियों और घरों पर छापे मारकर जवाब दिया, जिससे आम नागरिकों और बचे हुए मिलिटेंट नेताओं के बीच की खाई और चौड़ी हो गई।
हमास के तानाशाही शासन के तहत लंबे समय से दबे हुए हथियारबंद स्थानीय गुटों और कबीलों ने सत्ता के खालीपन का फायदा उठाया है।
उत्तरी गाजा और रफाह के कुछ हिस्सों में, ताकतवर परिवारों ने अपनी सुरक्षा के लिए स्वतंत्र मिलिशिया बना ली हैं। कुछ मामलों में तो वे मदद के ट्रकों पर कब्जा करने या अनौपचारिक टैक्स लगाने की हमास की कोशिशों का सक्रिय रूप से विरोध भी कर रहे हैं।
बता दें कि हमास के 7 अक्टूबर के उस खतरनाक हमले ने पश्चिम एशिया को बदलकर रख दिया। इस हमले में 1,200 लोगों की जान चली गई। हमास ने अलग अलग तरीकों से इजरायल में हमले किए और लोगों को बुरी तरह मारा। ऐसे में गाजा पट्टी अनिश्चितता के प्रतीक के तौर पर खड़ी है।
