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Syria Conflict: सीरिया के राष्ट्रपति अल-असद की मौत! दमिश्क से भागते समय प्लेन क्रैश की खबर

Bashar Al Assad Plane Crash: सीरिया में विद्रोहियों द्वारा तख्तापलट के बीच राष्ट्रपति बशर अल-असद के प्लेन क्रैश की खबर है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति असद की मौत हो गई है। प्रधानमंत्री गाजी जलाली ने कहा है कि उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। विद्रोहियों द्वारा राजधानी शहर पर हमला किए जाने के बाद से राष्ट्रपति को न तो देखा गया है और न ही उनके बारे में सुना गया है।

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सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद की मौत!

Photo : AP

Bashar Al Assad Plane Crash: सीरिया में विद्रोहियों द्वारा तख्तापलट के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति बशर अल-असद की प्लेन क्रैश में मौत हो गई है। यह हादसा तब हुआ, जब विद्रोहियों द्वारा दमिश्क पर कब्जा किए जाने से पहले राष्ट्रपति असद देश छोड़कर भाग रहे थे। उड़ान भरने के कुछ देर बार उनका विमान रडार से गायब हो गया। इसके बाद प्लेन के क्रैश होने की खबर सामने आई। हालांकि, इस घटना की पुष्टि अभी तक किसी की ओर से नहीं की गई है।

इतना जरूर कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति असद विशेष विमान से अज्ञात स्थान के लिए रवाना हुए थे। इसको लेकर सीरिया के प्रधानमंत्री गाजी जलाली का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति असद और सीरिया के रक्षामंत्री के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति असद की तलाश में सक्रियता से काम चल रहा है और विद्रोही उनके सैन्य और खुफिया अधिकारियों से पूछताछ कर रहे हैं।

तख्तापलट के बाद राष्ट्रपति को किसी ने नहीं देखा

बता दें, सीरियाई विद्रोहियों ने देश के कई शहरों पर कब्जा जमाने के बाद दमिश्क की तरफ रुख किया था। इसके बाद राष्ट्रपति असद ने देश छोड़ दिया। एक सूत्र ने आउटलेट को बताया कि विद्रोही उनकी गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि रविवार की सुबह कथित तौर पर वे जेट से राजधानी से भाग गए थे। विद्रोहियों द्वारा राजधानी शहर पर हमला किए जाने के बाद से राष्ट्रपति को न तो देखा गया है और न ही उनके बारे में सुना गया है।

असद परिवार के 50 साल के शासन का अंत

सीरिया में रविवार को राष्ट्रपति बशर अल-असद के 50 साल के शासन का अंत हो गया। सीरियाई सरकारी टैलीविजन चैनल ने कुछ लोगों के एक समूह का वीडियो बयान प्रसारित किया है जिसमें वे कहते नजर आ रहे हैं कि राष्ट्रपति बशर असद को सत्ता से बाहर कर दिया गया है और सभी कैदियों को रिहा करा दिया गया है। उधर, सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी जलाली ने एक वीडियो बयान जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि वह शासन की बागडोर शांतिपूर्ण तरीके से विपक्ष को सौंपने को तैयार हैं। जलाली ने कहा, मैं अपने आवास पर ही हूं और कहीं नहीं गया हूं और यह इसलिए क्योंकि मुझे अपने देश से प्रेम है। उन्होंने कहा कि वह सुबह काम करने के लिए अपने कार्यालय जाएंगे साथ ही उन्होंने सीरियाई नागरिकों से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाने का आग्रह किया।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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