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दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून को किया गया गिरफ्तार, जानें क्या है मामला

Breaking News: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल को गिरफ्तार कर लिया गया है। भ्रष्टाचार जांच कार्यालय और पुलिस ने संयुक्त रूप से यून के मामले बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एक दिन पहले ही यून को हिरासत में लेने की कोशिश की गई थी। बताया जा रहा है कि कई सप्ताह से यून अपने आधिकारिक आवास से बाहर नहीं निकले थे।

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दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून हुए गिरफ्तार।

South Korean President Yoon Suk Yeol Arrested: महाभियोग का सामना कर रहे दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल की मुश्किलों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। दक्षिण कोरियन राष्ट्रपति यून को गिरफ्तार कर लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में ये बड़ी जानकारी सामने आई है। यून कई सप्ताह से सियोल स्थित अपने आधिकारिक आवास से बाहर नहीं निकले थे।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून हुए गिरफ्तार

रॉयटर्स ने भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी के हवाले से रिपोर्ट दी है कि दक्षिण कोरिया के महाभियोग के शिकार राष्ट्रपति यून को गिरफ्तार कर लिया गया।

शीर्ष सहयोगी ने अधिकारियों से किया था ये अनुरोध

महाभियोग का सामना कर रहे दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल के शीर्ष सहयोगी ने मंगलवार को ही कानून लागू करने वाली एजेंसियों से अनुरोध किया था कि वे पिछले महीने लगाए गए ‘मार्शल लॉ’ के मामले में उन्हें हिरासत में लेने के अपने प्रयासों को छोड़ दें। ये अनुरोध ऐसे वक्त किया गया था, जब जांच अधिकारी दूसरी बार राष्ट्रपति को हिरासत में लेने का प्रयास कर रहे थे। उसके कुछ ही वक्त बाद राष्ट्रुपति को गिरफ्तार कर लिया गया।

राष्ट्रपति के ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ चुंग जिन-सुक ने इससे पहले कहा था कि यून से ‘‘किसी अन्य स्थान’’ या उनके निवास पर पूछताछ की जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी एवं पुलिस उन्हें बाहर खींचने की कोशिश कर रही है जैसे कि वह ‘‘दक्षिण अमेरिकी मादक पदार्थ गिरोह’’ के सदस्य हों। हालांकि, राष्ट्रपति के वकीलों में से एक यून काब-क्यून ने कहा था कि ‘चीफ ऑफ स्टाफ’ ने उनसे परामर्श किए बिना ही संदेश जारी किया और कानूनी टीम के पास जांच अधिकारियों के सामने पूछताछ के लिए राष्ट्रपति को पेश कराने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। इन सबके बीच किसी को इस बात की आशंका नहीं थी कि यून को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

अपने आधिकारिक आवास से बाहर नहीं निकले थे यून

यून कई सप्ताह से सियोल स्थित अपने आधिकारिक आवास से बाहर नहीं निकले थे। राष्ट्रपति की सुरक्षा सेवा में शामिल अधिकारियों का तीन जनवरी को लगभग छह घंटे तक उन जांच अधिकारियों के साथ टकराव हुआ जो यून को हिरासत में लेने के लिए आए थे। सुरक्षा सेवा के अधिकारियों ने जांच अधिकारियों को यून को हिरासत में लेने से रोक दिया था।

भ्रष्टाचार जांच कार्यालय और पुलिस संयुक्त रूप से यून के मामले की जांच करेंगे कि क्या तीन दिसंबर को यून द्वारा कुछ समय के लिए ‘मार्शल लॉ’ लागू करने घोषणा विद्रोह के प्रयास के समान थी? जांच एजेंसी और पुलिस ने खुले तौर पर चेताया था कि वारंट की तामील में बाधा डालने वाले राष्ट्रपति के अंगरक्षकों को मौके पर ही गिरफ्तार किया जा सकता है। हिरासत प्रयासों की योजना को लेकर राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी ने हाल के दिनों में सियोल और निकटवर्ती ग्योंगगी प्रांत में फील्ड कमांडरों की कई बैठकें बुलाई।

यून को हिरासत में लेने की आशंका के बीच पिछले दो सप्ताहों से हजारों की संख्या में यून विरोधी और यून समर्थक प्रदर्शनकारी प्रतिदिन सियोल में यून के कार्यालय के पास रैलियां निकाल रहे थे। इसी बीच वो अब गिरफ्तार भी हो गए। इस गिरफ्तारी का असर दक्षिण कोरिया की सड़कों पर भी देखने को मिल सकता है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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