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बांग्लादेशी करेंसी से हटेगी शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर, शेख हसीना के भाषणों पर भी लगी रोक

Bangladesh News: बांग्लादेश की अंतरिम यूनुस सरकार ने केंद्रीय बैंक को नए नोट छापने का आदेश दिया। केंद्रीय बैंक के अनुसार, 20, 100, 500 व 1000 के नए नोटों पर बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर नहीं होगी। इन नोटों पर छात्र आंदोलन के अलावा धार्मिक संरचनाओं, बंगाली परंपराओं की थी तस्वीरें होंगी।

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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस।

Bangladesh News: शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश के हाल बुरे होते जा रहे हैं। यहां आए दिन हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं तो मुल्क में अराजकता चरम पर है। अब बांग्लादेश की नई सरकार का नया आदेश सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, यहां की करेंसी से पूर्व राष्ट्रपति व बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर हटाई जाएगी। इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। नए नोटों में जुलाई में हुए छात्र आंदोलन की तस्वीर छापी जाएंगी।

सामने आया है कि बांग्लादेश की अंतरिम यूनुस सरकार ने केंद्रीय बैंक को नए नोट छापने का आदेश दिया। केंद्रीय बैंक के अनुसार, 20, 100, 500 व 1000 के नए नोटों पर बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर नहीं होगी। इन नोटों पर छात्र आंदोलन के अलावा धार्मिक संरचनाओं, बंगाली परंपराओं की थी तस्वीरें होंगी। केंद्रीय बैंक के अनुसार, छह महीने के अंदर नए नोट बाजार में जारी किए जाएंगे। बता दें, जुलाई में हुए छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने शेख मुजीबुर्हमान की प्रतिमा को भी गिरा दिया था।

शेख हसीना के भाषणों पर प्रतिबंध

बांग्लादेश की एक अदालत ने शेख हसीना के किसी भी भाषण के प्रकाशन और प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री हसीना को अगस्त में बांग्लादेश में हुए भारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान सत्ता से बेदखल किया गया था और इसके बाद वह भारत चली गई थीं। हसीना के भाषणों के प्रसारण और प्रकाशन संबंधी मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधिकरण का यह फैसला पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा न्यूयॉर्क में अपनी अवामी लीग पार्टी के समर्थकों को डिजिटल माध्यम से पहली बार सार्वजनिक रूप से संबोधित किए जाने के एक दिन बाद आया है। अपने संबोधन में उन्होंने बांग्लादेश के अंतरिम नेता नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस पर नरसंहार करने और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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